CSS 99अध्याय VII · Employees’ Compensation
धारा 99 · धारा- 99
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अध्याय के अधीन सक्षम प्राधिकारी के निम्नलिखित आदेशों से अपील उच्चर न्यायालय में होगी, अर्थात्ः-
(क) प्रतिकर के रूप में एकमुश्त राशि को चाहे अर्ध-मासिक संदाय से मोचन के तौर पर या अन्यथा, अधिनिर्णीत करने वाला या एकमुश्त राशि के दावे को पूर्णतः या भागतः अननुज्ञात करने वाला आदेश;
(ख) धारा 77 के अधीन क्षतियों के माध्यम से ब्याज या शास्ति अधिनिर्णीत करने वाला आदेश;
(ग) अर्ध-मासिक संदाय से मोचन अनुज्ञात करने से इन्कार करने वाला आदेश;
(घ) मृत कर्मचारी के आश्रितों के बीच प्रतिकर के वितरण का उपबन्ध करने वाला आदेश या किसी ऐसे व्यक्ति के किसी दावे को, जो यह अभिकथन करता हो कि वह ऐसा आश्रित है, अननुज्ञात करने वाला आदेश;
(ङ) धारा 85 की उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन क्षतिपूर्ति की रकम के किसी दावे को अनुज्ञात या अननुज्ञात करने वाला आदेश; अथवा
(च) करार के ज्ञापन को रजिस्ट्रीकृत करने से इंकार करने वाला या उसे रजिस्ट्रीकृत करने वाला या यह उपबन्ध करने वाला कि उसका रजिस्ट्रीकरण शर्तों के अधीन होगा, आदेशः
परन्तु जब तक कि अपील में सारवान् विधि-प्रश्न अन्तर्वलित न हो, और खंड (ग) में निर्दिष्ट आदेश से भिन्न आदेश की दशा में जब तक कि अपील में विवादग्रस्त रकम दस हजार रुपए या ऐसी उच्चतर रकम जो केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, से अन्यून न हो, आदेश के विरुद्ध कोई भी अपील नहीं होगीः
परन्तु यह और कि किसी ऐसे मामले में, जिसमें पक्षकारों ने सक्षम प्राधिकारी के विनिश्चय का पालन करने के लिए कोई करार कर लिया है या जिसमें सक्षम प्राधिकारी का आदेश पक्षकारों में हुए करार को प्रभावशाली करता है, कोई भी अपील नहीं होगीः
परन्तु यह भी कि जब तक कि अपील के ज्ञापन के साथ सक्षम प्राधिकारी द्वारा दिया गया इस आशय का प्रमाणपत्र न हो कि अपीलार्थी ने उसके पास वह रकम निक्षिप्त कर दी है जो उस आदेश के अधीन संदेय है, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, नियोजक द्वारा खंड (क) के अधीन कोई भी अपील नहीं होगी।
(2) इस धारा के अधीन अपील के लिए परिसीमाकाल, आदेश पारित करने की तारीख से साठ दिन का होगा।
(3) परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के उपबन्ध इस धारा के अधीन की गई अपीलों को लागू होंगे।
(क) प्रतिकर के रूप में एकमुश्त राशि को चाहे अर्ध-मासिक संदाय से मोचन के तौर पर या अन्यथा, अधिनिर्णीत करने वाला या एकमुश्त राशि के दावे को पूर्णतः या भागतः अननुज्ञात करने वाला आदेश;
(ख) धारा 77 के अधीन क्षतियों के माध्यम से ब्याज या शास्ति अधिनिर्णीत करने वाला आदेश;
(ग) अर्ध-मासिक संदाय से मोचन अनुज्ञात करने से इन्कार करने वाला आदेश;
(घ) मृत कर्मचारी के आश्रितों के बीच प्रतिकर के वितरण का उपबन्ध करने वाला आदेश या किसी ऐसे व्यक्ति के किसी दावे को, जो यह अभिकथन करता हो कि वह ऐसा आश्रित है, अननुज्ञात करने वाला आदेश;
(ङ) धारा 85 की उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन क्षतिपूर्ति की रकम के किसी दावे को अनुज्ञात या अननुज्ञात करने वाला आदेश; अथवा
(च) करार के ज्ञापन को रजिस्ट्रीकृत करने से इंकार करने वाला या उसे रजिस्ट्रीकृत करने वाला या यह उपबन्ध करने वाला कि उसका रजिस्ट्रीकरण शर्तों के अधीन होगा, आदेशः
परन्तु जब तक कि अपील में सारवान् विधि-प्रश्न अन्तर्वलित न हो, और खंड (ग) में निर्दिष्ट आदेश से भिन्न आदेश की दशा में जब तक कि अपील में विवादग्रस्त रकम दस हजार रुपए या ऐसी उच्चतर रकम जो केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, से अन्यून न हो, आदेश के विरुद्ध कोई भी अपील नहीं होगीः
परन्तु यह और कि किसी ऐसे मामले में, जिसमें पक्षकारों ने सक्षम प्राधिकारी के विनिश्चय का पालन करने के लिए कोई करार कर लिया है या जिसमें सक्षम प्राधिकारी का आदेश पक्षकारों में हुए करार को प्रभावशाली करता है, कोई भी अपील नहीं होगीः
परन्तु यह भी कि जब तक कि अपील के ज्ञापन के साथ सक्षम प्राधिकारी द्वारा दिया गया इस आशय का प्रमाणपत्र न हो कि अपीलार्थी ने उसके पास वह रकम निक्षिप्त कर दी है जो उस आदेश के अधीन संदेय है, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, नियोजक द्वारा खंड (क) के अधीन कोई भी अपील नहीं होगी।
(2) इस धारा के अधीन अपील के लिए परिसीमाकाल, आदेश पारित करने की तारीख से साठ दिन का होगा।
(3) परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के उपबन्ध इस धारा के अधीन की गई अपीलों को लागू होंगे।
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