CSS 37अध्याय IV · Employees State Insurance Corporation
धारा 37 · चिकित्सा बोर्ड के संदर्भ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई प्रश्न---
(क) क्या संबंधित दुर्घटना के परिणामस्वरूप स्थायी विकलांगता हुई है; या
(ख) क्या आय क्षमता में हुई हानि की सीमा का आकलन अनंतिम रूप से या अंतिम रूप से किया जा सकता है; या
(ग) क्या आय क्षमता में कमी के अनुपात का आकलन अनंतिम है या अंतिम; या
(घ) अनंतिम मूल्यांकन के मामले में, वह अवधि जिसके लिए ऐसा मूल्यांकन मान्य रहेगा,
इसका निर्धारण विनियमों के प्रावधानों के अनुसार गठित चिकित्सा बोर्ड (जिसे इसके बाद चिकित्सा बोर्ड कहा जाएगा) द्वारा किया जाएगा और ऐसे किसी भी प्रश्न को इसके बाद "अक्षमता प्रश्न" कहा जाएगा।
(2) किसी भी बीमित व्यक्ति के स्थायी विकलांगता लाभ के मामले को निगम द्वारा संबंधित विकलांगता के निर्धारण हेतु चिकित्सा बोर्ड को भेजा जाएगा और यदि उस या किसी बाद के संदर्भ में बीमित व्यक्ति की कमाई क्षमता में हानि की सीमा का अनंतिम आकलन किया जाता है, तो अनंतिम आकलन द्वारा ध्यान में रखी गई अवधि के अंत से पहले इसे फिर से चिकित्सा बोर्ड को भेजा जाएगा।
(3) इस अध्याय के अंतर्गत चिकित्सा बोर्ड द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय की समीक्षा चिकित्सा बोर्ड द्वारा किसी भी समय की जा सकती है, यदि वह नए साक्ष्यों से संतुष्ट हो कि निर्णय कर्मचारी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी महत्वपूर्ण तथ्य के गैर-खुलासे या गलत बयानी के परिणामस्वरूप दिया गया था, चाहे गैर-खुलासा या गलत बयानी कपटपूर्ण थी या नहीं।
(4) संबंधित रोजगार चोट के परिणामस्वरूप होने वाली विकलांगता की सीमा के किसी भी आकलन की समीक्षा चिकित्सा बोर्ड द्वारा भी की जा सकती है यदि वह संतुष्ट है कि आकलन किए जाने के बाद से संबंधित चोट के परिणामों में पर्याप्त और अप्रत्याशित वृद्धि हुई है:
बशर्ते कि इस उपधारा के अंतर्गत किसी मूल्यांकन की समीक्षा तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि चिकित्सा बोर्ड, मूल्यांकन में ध्यान में रखी गई अवधि और उपर्युक्त गंभीर स्थिति की संभावित अवधि को ध्यान में रखते हुए, इस राय का न हो कि इसकी समीक्षा न करने से पर्याप्त अन्याय होगा।
(5) विनियमों द्वारा गठित चिकित्सा अपील न्यायाधिकरण की अनुमति के बिना, उप-धारा (4) के तहत किसी भी आवेदन पर मूल्यांकन की समीक्षा नहीं की जाएगी जो आवेदन की तिथि से पांच वर्ष से कम, या अनंतिम मूल्यांकन के मामले में छह महीने से कम समय में किया गया हो, और ऐसी समीक्षा पर किसी भी संशोधित मूल्यांकन द्वारा ध्यान में रखी जाने वाली अवधि में आवेदन की तिथि से पहले की कोई अवधि शामिल नहीं होगी।
(6) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों के अधीन रहते हुए, चिकित्सा बोर्ड समीक्षा के मामले से उस तरीके से निपट सकता है जिस तरीके से वह मूल संदर्भ में मामले से निपटता, और विशेष रूप से अनंतिम मूल्यांकन कर सकता है, भले ही समीक्षाधीन मूल्यांकन अंतिम हो, और उपधारा (2) के प्रावधान इस उपधारा के तहत समीक्षा के आवेदन और ऐसे आवेदन के संबंध में चिकित्सा बोर्ड के निर्णय पर उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस उपधारा के तहत विकलांगता लाभ के मामले और ऐसे मामले के संबंध में चिकित्सा बोर्ड के निर्णय पर लागू होते हैं।
(7) (क) यदि बीमित व्यक्ति या निगम चिकित्सा बोर्ड के किसी निर्णय से असंतुष्ट हो, तो बीमित व्यक्ति या निगम, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से और निर्धारित समय के भीतर अपील कर सकता है---
(i) विनियमों के प्रावधानों के अनुसार गठित चिकित्सा अपील न्यायाधिकरण; या
(ii) कर्मचारी बीमा न्यायालय सीधे:
बशर्ते कि यदि किसी बीमित व्यक्ति ने चिकित्सा बोर्ड के निर्णय के आधार पर विकलांगता लाभ के रूपांतरण के लिए आवेदन किया है और ऐसे लाभों का रूपांतरित मूल्य प्राप्त कर लिया है, तो इस उपधारा के अंतर्गत ऐसे बीमित व्यक्ति द्वारा कोई अपील नहीं की जा सकती है।
इसके अलावा, यदि निगम ने चिकित्सा बोर्ड के निर्णय के आधार पर विकलांगता लाभ का परिवर्तित मूल्य अदा कर दिया है, तो निगम द्वारा इस उपधारा के अंतर्गत कोई अपील नहीं की जा सकेगी।
(ख) यदि बीमित व्यक्ति या निगम ने खंड (क) के उपखंड (i) के अंतर्गत चिकित्सा अपील न्यायाधिकरण में अपील की हो, न कि उस खंड के उपखंड (ii) के अंतर्गत कर्मचारी बीमा न्यायालय में, तो उसे, जैसा भी मामला हो, कर्मचारी बीमा न्यायालय में द्वितीय अपील दाखिल करने का अधिकार होगा, ऐसे तरीके से और ऐसे समय के भीतर जैसा कि उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए।
(क) क्या संबंधित दुर्घटना के परिणामस्वरूप स्थायी विकलांगता हुई है; या
(ख) क्या आय क्षमता में हुई हानि की सीमा का आकलन अनंतिम रूप से या अंतिम रूप से किया जा सकता है; या
(ग) क्या आय क्षमता में कमी के अनुपात का आकलन अनंतिम है या अंतिम; या
(घ) अनंतिम मूल्यांकन के मामले में, वह अवधि जिसके लिए ऐसा मूल्यांकन मान्य रहेगा,
इसका निर्धारण विनियमों के प्रावधानों के अनुसार गठित चिकित्सा बोर्ड (जिसे इसके बाद चिकित्सा बोर्ड कहा जाएगा) द्वारा किया जाएगा और ऐसे किसी भी प्रश्न को इसके बाद "अक्षमता प्रश्न" कहा जाएगा।
(2) किसी भी बीमित व्यक्ति के स्थायी विकलांगता लाभ के मामले को निगम द्वारा संबंधित विकलांगता के निर्धारण हेतु चिकित्सा बोर्ड को भेजा जाएगा और यदि उस या किसी बाद के संदर्भ में बीमित व्यक्ति की कमाई क्षमता में हानि की सीमा का अनंतिम आकलन किया जाता है, तो अनंतिम आकलन द्वारा ध्यान में रखी गई अवधि के अंत से पहले इसे फिर से चिकित्सा बोर्ड को भेजा जाएगा।
(3) इस अध्याय के अंतर्गत चिकित्सा बोर्ड द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय की समीक्षा चिकित्सा बोर्ड द्वारा किसी भी समय की जा सकती है, यदि वह नए साक्ष्यों से संतुष्ट हो कि निर्णय कर्मचारी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी महत्वपूर्ण तथ्य के गैर-खुलासे या गलत बयानी के परिणामस्वरूप दिया गया था, चाहे गैर-खुलासा या गलत बयानी कपटपूर्ण थी या नहीं।
(4) संबंधित रोजगार चोट के परिणामस्वरूप होने वाली विकलांगता की सीमा के किसी भी आकलन की समीक्षा चिकित्सा बोर्ड द्वारा भी की जा सकती है यदि वह संतुष्ट है कि आकलन किए जाने के बाद से संबंधित चोट के परिणामों में पर्याप्त और अप्रत्याशित वृद्धि हुई है:
बशर्ते कि इस उपधारा के अंतर्गत किसी मूल्यांकन की समीक्षा तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि चिकित्सा बोर्ड, मूल्यांकन में ध्यान में रखी गई अवधि और उपर्युक्त गंभीर स्थिति की संभावित अवधि को ध्यान में रखते हुए, इस राय का न हो कि इसकी समीक्षा न करने से पर्याप्त अन्याय होगा।
(5) विनियमों द्वारा गठित चिकित्सा अपील न्यायाधिकरण की अनुमति के बिना, उप-धारा (4) के तहत किसी भी आवेदन पर मूल्यांकन की समीक्षा नहीं की जाएगी जो आवेदन की तिथि से पांच वर्ष से कम, या अनंतिम मूल्यांकन के मामले में छह महीने से कम समय में किया गया हो, और ऐसी समीक्षा पर किसी भी संशोधित मूल्यांकन द्वारा ध्यान में रखी जाने वाली अवधि में आवेदन की तिथि से पहले की कोई अवधि शामिल नहीं होगी।
(6) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों के अधीन रहते हुए, चिकित्सा बोर्ड समीक्षा के मामले से उस तरीके से निपट सकता है जिस तरीके से वह मूल संदर्भ में मामले से निपटता, और विशेष रूप से अनंतिम मूल्यांकन कर सकता है, भले ही समीक्षाधीन मूल्यांकन अंतिम हो, और उपधारा (2) के प्रावधान इस उपधारा के तहत समीक्षा के आवेदन और ऐसे आवेदन के संबंध में चिकित्सा बोर्ड के निर्णय पर उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस उपधारा के तहत विकलांगता लाभ के मामले और ऐसे मामले के संबंध में चिकित्सा बोर्ड के निर्णय पर लागू होते हैं।
(7) (क) यदि बीमित व्यक्ति या निगम चिकित्सा बोर्ड के किसी निर्णय से असंतुष्ट हो, तो बीमित व्यक्ति या निगम, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से और निर्धारित समय के भीतर अपील कर सकता है---
(i) विनियमों के प्रावधानों के अनुसार गठित चिकित्सा अपील न्यायाधिकरण; या
(ii) कर्मचारी बीमा न्यायालय सीधे:
बशर्ते कि यदि किसी बीमित व्यक्ति ने चिकित्सा बोर्ड के निर्णय के आधार पर विकलांगता लाभ के रूपांतरण के लिए आवेदन किया है और ऐसे लाभों का रूपांतरित मूल्य प्राप्त कर लिया है, तो इस उपधारा के अंतर्गत ऐसे बीमित व्यक्ति द्वारा कोई अपील नहीं की जा सकती है।
इसके अलावा, यदि निगम ने चिकित्सा बोर्ड के निर्णय के आधार पर विकलांगता लाभ का परिवर्तित मूल्य अदा कर दिया है, तो निगम द्वारा इस उपधारा के अंतर्गत कोई अपील नहीं की जा सकेगी।
(ख) यदि बीमित व्यक्ति या निगम ने खंड (क) के उपखंड (i) के अंतर्गत चिकित्सा अपील न्यायाधिकरण में अपील की हो, न कि उस खंड के उपखंड (ii) के अंतर्गत कर्मचारी बीमा न्यायालय में, तो उसे, जैसा भी मामला हो, कर्मचारी बीमा न्यायालय में द्वितीय अपील दाखिल करने का अधिकार होगा, ऐसे तरीके से और ऐसे समय के भीतर जैसा कि उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए।
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