CSS 56अध्याय V · Gratuity
धारा 56 · ग्रेच्युटी की राशि का निर्धारण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अध्याय के अधीन ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए पात्र व्यक्ति या उसकी ओर से लिखित रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत कोई व्यक्ति, उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित समय और प्रारूप में नियोक्ता को लिखित आवेदन भेजेगा, ताकि ऐसी ग्रेच्युटी का भुगतान किया जा सके।
(2) जैसे ही ग्रेच्युटी देय हो जाती है, नियोक्ता, चाहे उपधारा (1) में निर्दिष्ट आवेदन किया गया हो या नहीं, ग्रेच्युटी की राशि निर्धारित करेगा और उस व्यक्ति को लिखित में सूचना देगा जिसे ग्रेच्युटी देय है और साथ ही सक्षम प्राधिकारी को भी निर्धारित ग्रेच्युटी की राशि निर्दिष्ट करते हुए सूचना देगा।
(3) नियोक्ता ग्रेच्युटी की राशि का भुगतान उस व्यक्ति को देय तिथि से तीस दिनों के भीतर करने की व्यवस्था करेगा जिसे ग्रेच्युटी देय है।
(4) यदि उपधारा (3) के अधीन देय ग्रेच्युटी की राशि नियोक्ता द्वारा उपधारा (3) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर भुगतान नहीं की जाती है, तो नियोक्ता ग्रेच्युटी के देय होने की तिथि से लेकर भुगतान की तिथि तक साधारण ब्याज का भुगतान ऐसे दर पर करेगा, जो केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर दीर्घकालिक जमाओं के पुनर्भुगतान के लिए अधिसूचित दर से अधिक न हो।
बशर्ते कि यदि भुगतान में देरी कर्मचारी की गलती के कारण हुई हो और नियोक्ता ने इस आधार पर विलंबित भुगतान के लिए सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति प्राप्त कर ली हो, तो ऐसा कोई ब्याज देय नहीं होगा।
(5) (क) यदि इस अध्याय के अधीन किसी कर्मचारी को देय ग्रेच्युटी की राशि के संबंध में, या ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए किसी कर्मचारी के दावे की स्वीकार्यता के संबंध में, या ग्रेच्युटी प्राप्त करने के हकदार व्यक्ति के संबंध में कोई विवाद हो, तो नियोक्ता सक्षम प्राधिकारी के पास उतनी राशि जमा करेगा जितनी वह ग्रेच्युटी के रूप में देय स्वीकार करता है।
(ख) जहां खंड (क) में निर्दिष्ट किसी मामले या मामलों के संबंध में कोई विवाद हो, वहां नियोक्ता या कर्मचारी या विवाद उठाने वाला कोई अन्य व्यक्ति विवाद का निर्णय करने के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित प्रपत्र में सक्षम प्राधिकारी को आवेदन कर सकता है।
(ग) सक्षम प्राधिकारी उचित जांच के बाद और विवाद के पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद विवादित मामले या मामलों का निर्धारण करेगा और यदि ऐसी जांच के परिणामस्वरूप कर्मचारी को कोई राशि देय पाई जाती है, तो सक्षम प्राधिकारी नियोक्ता को ऐसी राशि का भुगतान करने का निर्देश देगा या, जैसा भी मामला हो, नियोक्ता द्वारा पहले से जमा की गई राशि को घटाकर ऐसी राशि का भुगतान करने का निर्देश देगा।
(घ) सक्षम प्राधिकारी नियोक्ता द्वारा जमा की गई राशि, जिसमें यदि कोई अतिरिक्त राशि हो तो वह भी शामिल है, उस राशि का भुगतान हकदार व्यक्ति को करेगा।
(ई) खंड (क) के अधीन जमा किए जाने के बाद जितनी जल्दी हो सके, सक्षम प्राधिकारी जमा राशि का भुगतान करेगा—
(i) आवेदक को, यदि वह कर्मचारी है; या
(ii) जहां आवेदक कर्मचारी नहीं है, वहां नामित व्यक्ति को या, जैसा भी मामला हो, ऐसे नामित व्यक्ति के अभिभावक को या कर्मचारी के उत्तराधिकारी को, यदि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट है कि आवेदक को ग्रेच्युटी की राशि प्राप्त करने के अधिकार के संबंध में कोई विवाद नहीं है।
(6) उपधारा (5) के तहत जांच करने के उद्देश्य से, सक्षम प्राधिकारी को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो किसी न्यायालय को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के तहत किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय निम्नलिखित मामलों के संबंध में प्राप्त होती हैं, अर्थात्:—
(क) किसी व्यक्ति की उपस्थिति को लागू करना या उससे शपथ पर पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) गवाहों की जांच के लिए आयोग जारी करना।
(7) इस धारा के अंतर्गत कोई भी जाँच भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) की धारा 193, धारा 228 और धारा 196 के प्रयोजन के लिए न्यायिक कार्यवाही होगी।
(8) उपधारा (5) के तहत किसी आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति, आदेश प्राप्त होने की तिथि से साठ दिनों के भीतर, उपयुक्त सरकार या ऐसे अन्य प्राधिकारी को अपील कर सकता है जिसे उपयुक्त सरकार इस संबंध में निर्दिष्ट करे।
बशर्ते कि उपयुक्त सरकार या अपीलीय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, यदि संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से उक्त साठ दिनों की अवधि के भीतर अपील दायर करने से वंचित रहा, तो उक्त अवधि को साठ दिनों की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकता है:
इसके अलावा, नियोक्ता द्वारा कोई अपील तब तक स्वीकार नहीं की जाएगी जब तक कि अपील करते समय अपीलकर्ता सक्षम प्राधिकारी का यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत न कर दे कि अपीलकर्ता ने उसके पास उपधारा (5) के तहत जमा की जाने वाली ग्रेच्युटी की राशि के बराबर राशि जमा कर दी है, या अपीलीय प्राधिकारी के पास ऐसी राशि जमा न कर दे।
(9) उपयुक्त सरकार या अपीलीय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, अपील के पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद सक्षम प्राधिकारी के निर्णय की पुष्टि, संशोधन या उसे रद्द कर सकता है।
(2) जैसे ही ग्रेच्युटी देय हो जाती है, नियोक्ता, चाहे उपधारा (1) में निर्दिष्ट आवेदन किया गया हो या नहीं, ग्रेच्युटी की राशि निर्धारित करेगा और उस व्यक्ति को लिखित में सूचना देगा जिसे ग्रेच्युटी देय है और साथ ही सक्षम प्राधिकारी को भी निर्धारित ग्रेच्युटी की राशि निर्दिष्ट करते हुए सूचना देगा।
(3) नियोक्ता ग्रेच्युटी की राशि का भुगतान उस व्यक्ति को देय तिथि से तीस दिनों के भीतर करने की व्यवस्था करेगा जिसे ग्रेच्युटी देय है।
(4) यदि उपधारा (3) के अधीन देय ग्रेच्युटी की राशि नियोक्ता द्वारा उपधारा (3) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर भुगतान नहीं की जाती है, तो नियोक्ता ग्रेच्युटी के देय होने की तिथि से लेकर भुगतान की तिथि तक साधारण ब्याज का भुगतान ऐसे दर पर करेगा, जो केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर दीर्घकालिक जमाओं के पुनर्भुगतान के लिए अधिसूचित दर से अधिक न हो।
बशर्ते कि यदि भुगतान में देरी कर्मचारी की गलती के कारण हुई हो और नियोक्ता ने इस आधार पर विलंबित भुगतान के लिए सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति प्राप्त कर ली हो, तो ऐसा कोई ब्याज देय नहीं होगा।
(5) (क) यदि इस अध्याय के अधीन किसी कर्मचारी को देय ग्रेच्युटी की राशि के संबंध में, या ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए किसी कर्मचारी के दावे की स्वीकार्यता के संबंध में, या ग्रेच्युटी प्राप्त करने के हकदार व्यक्ति के संबंध में कोई विवाद हो, तो नियोक्ता सक्षम प्राधिकारी के पास उतनी राशि जमा करेगा जितनी वह ग्रेच्युटी के रूप में देय स्वीकार करता है।
(ख) जहां खंड (क) में निर्दिष्ट किसी मामले या मामलों के संबंध में कोई विवाद हो, वहां नियोक्ता या कर्मचारी या विवाद उठाने वाला कोई अन्य व्यक्ति विवाद का निर्णय करने के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित प्रपत्र में सक्षम प्राधिकारी को आवेदन कर सकता है।
(ग) सक्षम प्राधिकारी उचित जांच के बाद और विवाद के पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद विवादित मामले या मामलों का निर्धारण करेगा और यदि ऐसी जांच के परिणामस्वरूप कर्मचारी को कोई राशि देय पाई जाती है, तो सक्षम प्राधिकारी नियोक्ता को ऐसी राशि का भुगतान करने का निर्देश देगा या, जैसा भी मामला हो, नियोक्ता द्वारा पहले से जमा की गई राशि को घटाकर ऐसी राशि का भुगतान करने का निर्देश देगा।
(घ) सक्षम प्राधिकारी नियोक्ता द्वारा जमा की गई राशि, जिसमें यदि कोई अतिरिक्त राशि हो तो वह भी शामिल है, उस राशि का भुगतान हकदार व्यक्ति को करेगा।
(ई) खंड (क) के अधीन जमा किए जाने के बाद जितनी जल्दी हो सके, सक्षम प्राधिकारी जमा राशि का भुगतान करेगा—
(i) आवेदक को, यदि वह कर्मचारी है; या
(ii) जहां आवेदक कर्मचारी नहीं है, वहां नामित व्यक्ति को या, जैसा भी मामला हो, ऐसे नामित व्यक्ति के अभिभावक को या कर्मचारी के उत्तराधिकारी को, यदि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट है कि आवेदक को ग्रेच्युटी की राशि प्राप्त करने के अधिकार के संबंध में कोई विवाद नहीं है।
(6) उपधारा (5) के तहत जांच करने के उद्देश्य से, सक्षम प्राधिकारी को वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो किसी न्यायालय को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के तहत किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय निम्नलिखित मामलों के संबंध में प्राप्त होती हैं, अर्थात्:—
(क) किसी व्यक्ति की उपस्थिति को लागू करना या उससे शपथ पर पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) गवाहों की जांच के लिए आयोग जारी करना।
(7) इस धारा के अंतर्गत कोई भी जाँच भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) की धारा 193, धारा 228 और धारा 196 के प्रयोजन के लिए न्यायिक कार्यवाही होगी।
(8) उपधारा (5) के तहत किसी आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति, आदेश प्राप्त होने की तिथि से साठ दिनों के भीतर, उपयुक्त सरकार या ऐसे अन्य प्राधिकारी को अपील कर सकता है जिसे उपयुक्त सरकार इस संबंध में निर्दिष्ट करे।
बशर्ते कि उपयुक्त सरकार या अपीलीय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, यदि संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से उक्त साठ दिनों की अवधि के भीतर अपील दायर करने से वंचित रहा, तो उक्त अवधि को साठ दिनों की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकता है:
इसके अलावा, नियोक्ता द्वारा कोई अपील तब तक स्वीकार नहीं की जाएगी जब तक कि अपील करते समय अपीलकर्ता सक्षम प्राधिकारी का यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत न कर दे कि अपीलकर्ता ने उसके पास उपधारा (5) के तहत जमा की जाने वाली ग्रेच्युटी की राशि के बराबर राशि जमा कर दी है, या अपीलीय प्राधिकारी के पास ऐसी राशि जमा न कर दे।
(9) उपयुक्त सरकार या अपीलीय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, अपील के पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद सक्षम प्राधिकारी के निर्णय की पुष्टि, संशोधन या उसे रद्द कर सकता है।
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