CSS 76अध्याय VII · Employees’ Compensation
धारा 76 · मुआवजे की राशि।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अध्याय के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, मुआवजे की राशि निम्नलिखित होगी:---
(क) यदि मृत्यु चोट के परिणामस्वरूप होती है, तो मृतक कर्मचारी के मासिक वेतन के पचास प्रतिशत के बराबर राशि को संबंधित कारक से गुणा किया जाएगा या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित राशि, इनमें से जो भी अधिक हो;
(ख) यदि चोट के परिणामस्वरूप स्थायी पूर्ण विकलांगता हो जाती है, तो घायल कर्मचारी के मासिक वेतन के साठ प्रतिशत के बराबर राशि को संबंधित कारक से गुणा किया जाएगा या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित राशि, इनमें से जो भी अधिक हो:
बशर्ते कि केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट मुआवजे की राशि बढ़ा सकती है।
स्पष्टीकरण। ---खंड (क) और (ख) के प्रयोजनों के लिए, किसी कर्मचारी के संबंध में "प्रासंगिक कारक" का अर्थ छठी अनुसूची के स्तंभ (3) में निर्दिष्ट कारक है, जो उसके स्तंभ (2) में संबंधित प्रविष्टि के विरुद्ध कारकों से संबंधित है, जिसमें उन वर्षों की संख्या निर्दिष्ट है जो उस तिथि से ठीक पहले कर्मचारी के अंतिम जन्मदिन पर उसकी आयु के पूर्ण वर्षों के बराबर है जिस तिथि को मुआवजा देय हुआ था;
(ग) जहां चोट के परिणामस्वरूप स्थायी आंशिक विकलांगता हो जाती है, ---
(i) चौथी अनुसूची के भाग II में निर्दिष्ट किसी चोट के मामले में, स्थायी पूर्ण विकलांगता के मामले में देय मुआवजे का वह प्रतिशत जो उसमें उस चोट के कारण अर्जित क्षमता की हानि के प्रतिशत के रूप में निर्दिष्ट है; और
(ii) चौथी अनुसूची में निर्दिष्ट न की गई चोट के मामले में, स्थायी पूर्ण विकलांगता के मामले में देय मुआवजे का वह प्रतिशत जो चोट के कारण स्थायी रूप से अर्जित क्षमता के नुकसान (चिकित्सक द्वारा मूल्यांकन के अनुसार) के अनुपात में हो।
स्पष्टीकरण 1.---इस खंड के प्रयोजनों के लिए, जहां एक ही दुर्घटना से एक से अधिक चोटें लगती हैं, इस मद के अंतर्गत देय मुआवजे की राशि को जोड़ा जाएगा, लेकिन किसी भी स्थिति में उस राशि से अधिक नहीं होगा जो स्थायी पूर्ण विकलांगता होने की स्थिति में देय होती।
स्पष्टीकरण 2.---उप-खंड (ii) के अंतर्गत आय क्षमता की हानि का आकलन करते समय, चिकित्सक को चौथी अनुसूची में निर्दिष्ट विभिन्न चोटों के संबंध में आय क्षमता की हानि के प्रतिशत पर उचित ध्यान देना होगा;
(घ) जहां चोट के परिणामस्वरूप अस्थायी विकलांगता, चाहे पूर्ण हो या आंशिक, हो, तो कर्मचारी के मासिक वेतन के पच्चीस प्रतिशत के बराबर राशि का अर्धमासिक भुगतान उपधारा (4) के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, भारत के बाहर हुई किसी दुर्घटना के संबंध में किसी कर्मचारी को देय मुआवजे की राशि निर्धारित करते समय, सक्षम प्राधिकारी उस देश के कानून के अनुसार, जिसमें दुर्घटना हुई है, ऐसे कर्मचारी को दिए गए मुआवजे की राशि को ध्यान में रखेगा और अपने द्वारा निर्धारित राशि में से उस देश के कानून के अनुसार कर्मचारी को दिए गए मुआवजे की राशि को घटा देगा।
(3) केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए किसी कर्मचारी के संबंध में ऐसे मासिक वेतन निर्दिष्ट कर सकती है, जिन्हें वह आवश्यक समझे।
(4) उपधारा (1) के खंड (घ) में निर्दिष्ट अर्धमासिक भुगतान सोलहवें दिन देय होगा---
(i) विकलांगता की तिथि से, यदि ऐसी विकलांगता अट्ठाईस दिन या उससे अधिक समय तक बनी रहती है; या
(ii) विकलांगता की तिथि से तीन दिन की प्रतीक्षा अवधि समाप्त होने के बाद, यदि ऐसी विकलांगता अट्ठाईस दिनों से कम समय तक रहती है; और उसके बाद विकलांगता की अवधि के दौरान या पाँच वर्ष की अवधि के दौरान, जो भी कम हो, हर पखवाड़े:
उसे उपलब्ध कराया---
(क) कर्मचारी को मिलने वाली किसी भी एकमुश्त राशि या अर्धमासिक भुगतान में से वह राशि काट ली जाएगी जो कर्मचारी ने विकलांगता की अवधि के दौरान नियोक्ता से मुआवजे के रूप में प्राप्त की हो, ऐसी एकमुश्त राशि या पहले अर्धमासिक भुगतान की प्राप्ति से पहले, और नियोक्ता से चिकित्सा उपचार के लिए कर्मचारी द्वारा प्राप्त किया गया ऐसा भुगतान या भत्ता मुआवजे के रूप में प्राप्त भुगतान या भत्ता नहीं माना जाएगा;
(ख) किसी भी मामले में अर्धमासिक भुगतान उस राशि से अधिक नहीं होगा, यदि कोई हो, जिससे दुर्घटना से पहले कर्मचारी के मासिक वेतन की आधी राशि दुर्घटना के बाद उसके द्वारा अर्जित किए जा रहे वेतन की आधी राशि से अधिक हो।
(5) कर्मचारी को रोजगार के दौरान लगी चोटों के उपचार के लिए उसके द्वारा किए गए वास्तविक चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति उसके नियोक्ता द्वारा की जाएगी।
(6) किसी अर्धमासिक भुगतान के देय होने की तिथि से पहले अक्षमता समाप्त होने पर, उस अर्धमासिक के लिए उस अर्धमासिक में अक्षमता की अवधि के अनुपात में राशि देय होगी।
(7) यदि कर्मचारी की चोट के परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो जाती है, तो नियोक्ता उप-धारा (1) के अधीन मुआवजे के अतिरिक्त, सक्षम प्राधिकारी के पास कम से कम पंद्रह हजार रुपये या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित राशि जमा करेगा, जिसका भुगतान कर्मचारी के अंतिम संस्कार के व्यय के लिए उसके सबसे बड़े जीवित आश्रित को किया जाएगा, या यदि कर्मचारी का कोई आश्रित नहीं था या उसकी मृत्यु के समय वह अपने आश्रित के साथ नहीं रह रहा था, तो उस व्यक्ति को किया जाएगा जिसने वास्तव में ऐसा व्यय किया हो।
बशर्ते कि केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा इस उपधारा में निर्दिष्ट राशि को बढ़ा सकती है।
(क) यदि मृत्यु चोट के परिणामस्वरूप होती है, तो मृतक कर्मचारी के मासिक वेतन के पचास प्रतिशत के बराबर राशि को संबंधित कारक से गुणा किया जाएगा या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित राशि, इनमें से जो भी अधिक हो;
(ख) यदि चोट के परिणामस्वरूप स्थायी पूर्ण विकलांगता हो जाती है, तो घायल कर्मचारी के मासिक वेतन के साठ प्रतिशत के बराबर राशि को संबंधित कारक से गुणा किया जाएगा या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित राशि, इनमें से जो भी अधिक हो:
बशर्ते कि केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट मुआवजे की राशि बढ़ा सकती है।
स्पष्टीकरण। ---खंड (क) और (ख) के प्रयोजनों के लिए, किसी कर्मचारी के संबंध में "प्रासंगिक कारक" का अर्थ छठी अनुसूची के स्तंभ (3) में निर्दिष्ट कारक है, जो उसके स्तंभ (2) में संबंधित प्रविष्टि के विरुद्ध कारकों से संबंधित है, जिसमें उन वर्षों की संख्या निर्दिष्ट है जो उस तिथि से ठीक पहले कर्मचारी के अंतिम जन्मदिन पर उसकी आयु के पूर्ण वर्षों के बराबर है जिस तिथि को मुआवजा देय हुआ था;
(ग) जहां चोट के परिणामस्वरूप स्थायी आंशिक विकलांगता हो जाती है, ---
(i) चौथी अनुसूची के भाग II में निर्दिष्ट किसी चोट के मामले में, स्थायी पूर्ण विकलांगता के मामले में देय मुआवजे का वह प्रतिशत जो उसमें उस चोट के कारण अर्जित क्षमता की हानि के प्रतिशत के रूप में निर्दिष्ट है; और
(ii) चौथी अनुसूची में निर्दिष्ट न की गई चोट के मामले में, स्थायी पूर्ण विकलांगता के मामले में देय मुआवजे का वह प्रतिशत जो चोट के कारण स्थायी रूप से अर्जित क्षमता के नुकसान (चिकित्सक द्वारा मूल्यांकन के अनुसार) के अनुपात में हो।
स्पष्टीकरण 1.---इस खंड के प्रयोजनों के लिए, जहां एक ही दुर्घटना से एक से अधिक चोटें लगती हैं, इस मद के अंतर्गत देय मुआवजे की राशि को जोड़ा जाएगा, लेकिन किसी भी स्थिति में उस राशि से अधिक नहीं होगा जो स्थायी पूर्ण विकलांगता होने की स्थिति में देय होती।
स्पष्टीकरण 2.---उप-खंड (ii) के अंतर्गत आय क्षमता की हानि का आकलन करते समय, चिकित्सक को चौथी अनुसूची में निर्दिष्ट विभिन्न चोटों के संबंध में आय क्षमता की हानि के प्रतिशत पर उचित ध्यान देना होगा;
(घ) जहां चोट के परिणामस्वरूप अस्थायी विकलांगता, चाहे पूर्ण हो या आंशिक, हो, तो कर्मचारी के मासिक वेतन के पच्चीस प्रतिशत के बराबर राशि का अर्धमासिक भुगतान उपधारा (4) के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, भारत के बाहर हुई किसी दुर्घटना के संबंध में किसी कर्मचारी को देय मुआवजे की राशि निर्धारित करते समय, सक्षम प्राधिकारी उस देश के कानून के अनुसार, जिसमें दुर्घटना हुई है, ऐसे कर्मचारी को दिए गए मुआवजे की राशि को ध्यान में रखेगा और अपने द्वारा निर्धारित राशि में से उस देश के कानून के अनुसार कर्मचारी को दिए गए मुआवजे की राशि को घटा देगा।
(3) केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए किसी कर्मचारी के संबंध में ऐसे मासिक वेतन निर्दिष्ट कर सकती है, जिन्हें वह आवश्यक समझे।
(4) उपधारा (1) के खंड (घ) में निर्दिष्ट अर्धमासिक भुगतान सोलहवें दिन देय होगा---
(i) विकलांगता की तिथि से, यदि ऐसी विकलांगता अट्ठाईस दिन या उससे अधिक समय तक बनी रहती है; या
(ii) विकलांगता की तिथि से तीन दिन की प्रतीक्षा अवधि समाप्त होने के बाद, यदि ऐसी विकलांगता अट्ठाईस दिनों से कम समय तक रहती है; और उसके बाद विकलांगता की अवधि के दौरान या पाँच वर्ष की अवधि के दौरान, जो भी कम हो, हर पखवाड़े:
उसे उपलब्ध कराया---
(क) कर्मचारी को मिलने वाली किसी भी एकमुश्त राशि या अर्धमासिक भुगतान में से वह राशि काट ली जाएगी जो कर्मचारी ने विकलांगता की अवधि के दौरान नियोक्ता से मुआवजे के रूप में प्राप्त की हो, ऐसी एकमुश्त राशि या पहले अर्धमासिक भुगतान की प्राप्ति से पहले, और नियोक्ता से चिकित्सा उपचार के लिए कर्मचारी द्वारा प्राप्त किया गया ऐसा भुगतान या भत्ता मुआवजे के रूप में प्राप्त भुगतान या भत्ता नहीं माना जाएगा;
(ख) किसी भी मामले में अर्धमासिक भुगतान उस राशि से अधिक नहीं होगा, यदि कोई हो, जिससे दुर्घटना से पहले कर्मचारी के मासिक वेतन की आधी राशि दुर्घटना के बाद उसके द्वारा अर्जित किए जा रहे वेतन की आधी राशि से अधिक हो।
(5) कर्मचारी को रोजगार के दौरान लगी चोटों के उपचार के लिए उसके द्वारा किए गए वास्तविक चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति उसके नियोक्ता द्वारा की जाएगी।
(6) किसी अर्धमासिक भुगतान के देय होने की तिथि से पहले अक्षमता समाप्त होने पर, उस अर्धमासिक के लिए उस अर्धमासिक में अक्षमता की अवधि के अनुपात में राशि देय होगी।
(7) यदि कर्मचारी की चोट के परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो जाती है, तो नियोक्ता उप-धारा (1) के अधीन मुआवजे के अतिरिक्त, सक्षम प्राधिकारी के पास कम से कम पंद्रह हजार रुपये या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित राशि जमा करेगा, जिसका भुगतान कर्मचारी के अंतिम संस्कार के व्यय के लिए उसके सबसे बड़े जीवित आश्रित को किया जाएगा, या यदि कर्मचारी का कोई आश्रित नहीं था या उसकी मृत्यु के समय वह अपने आश्रित के साथ नहीं रह रहा था, तो उस व्यक्ति को किया जाएगा जिसने वास्तव में ऐसा व्यय किया हो।
बशर्ते कि केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा इस उपधारा में निर्दिष्ट राशि को बढ़ा सकती है।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

