CSS 1अध्याय I · Preliminary
धारा 1 · शीर्षक का संक्षिप्त विवरण, प्रारंभ और आवेदन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम को सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 कहा जा सकता है।
(2) यह पूरे भारत में लागू होता है।
(3) यह ऐसी तिथि से लागू होगा जो केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे; और इस संहिता के विभिन्न प्रावधानों के लिए अलग-अलग तिथियां नियुक्त की जा सकती हैं और किसी भी ऐसे प्रावधान में इस संहिता के प्रारंभ होने का कोई भी संदर्भ उस प्रावधान के लागू होने के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
(4) प्रथम अनुसूची के स्तंभ (1) और (2) में निर्दिष्ट अध्यायों की प्रयोज्यता, इस संहिता के अन्य प्रावधानों की प्रयोज्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी होगी जैसी उस अनुसूची के स्तंभ (3) में संबंधित प्रविष्टि में निर्दिष्ट है।
(5) उपधारा (4) में किसी बात के होते हुए भी, यदि केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त को, चाहे किसी प्रतिष्ठान के नियोक्ता द्वारा किए गए आवेदन पर या अन्यथा, यह प्रतीत होता है कि उस प्रतिष्ठान के नियोक्ता और अधिकांश कर्मचारियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि अध्याय III के प्रावधान उस प्रतिष्ठान पर लागू किए जाएं, तो केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त अधिसूचना द्वारा उक्त अध्याय के प्रावधानों को उस प्रतिष्ठान पर ऐसे समझौते की तिथि से या समझौते में निर्दिष्ट किसी बाद की तिथि से लागू कर सकता है।
बशर्ते कि यदि किसी प्रतिष्ठान का नियोक्ता, जिस पर इस उपधारा के अंतर्गत अध्याय III के प्रावधान लागू होते हैं, ऐसे प्रावधानों के लागू होने से मुक्त होना चाहता है, तो वह केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त को आवेदन कर सकता है और केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, यदि संतुष्ट हो कि नियोक्ता और अधिकांश कर्मचारियों के बीच इस संबंध में सहमति है, तो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से और ऐसी शर्तों के अधीन, उस अध्याय के प्रावधानों को ऐसे प्रतिष्ठान पर लागू नहीं करेगा।
(6) केंद्र सरकार, ऐसा करने के अपने इरादे की कम से कम दो महीने की सूचना देने के बाद, अधिसूचना द्वारा, इस संहिता के प्रावधानों को किसी भी प्रतिष्ठान पर लागू कर सकती है, जिसमें अधिसूचना में निर्दिष्ट व्यक्तियों की संख्या से कम व्यक्ति कार्यरत न हों।
(7) उपधारा (4) में किसी बात के होते हुए भी, यदि निगम के महानिदेशक को, चाहे किसी प्रतिष्ठान के नियोक्ता द्वारा उन्हें दिए गए आवेदन पर या अन्यथा, यह प्रतीत होता है कि उस प्रतिष्ठान के नियोक्ता और अधिकांश कर्मचारियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि अध्याय IV के प्रावधान उस प्रतिष्ठान पर लागू किए जाएं, तो निगम के महानिदेशक अधिसूचना द्वारा उक्त अध्याय के प्रावधानों को उस प्रतिष्ठान पर ऐसे समझौते की तिथि से या समझौते में निर्दिष्ट किसी बाद की तिथि से लागू कर सकते हैं।
बशर्ते कि यदि किसी प्रतिष्ठान का नियोक्ता, जिस पर इस उपधारा के अंतर्गत अध्याय IV के प्रावधान लागू होते हैं, ऐसे प्रावधानों के लागू होने से मुक्त होना चाहता है, तो वह निगम के महानिदेशक को आवेदन कर सकता है और निगम के महानिदेशक, यदि संतुष्ट हैं कि नियोक्ता और अधिकांश कर्मचारियों के बीच इस संबंध में सहमति है, तो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से और ऐसी शर्तों के अधीन, उस अध्याय के प्रावधानों को ऐसे प्रतिष्ठान पर लागू नहीं करेंगे।
(8) उपधारा (4) में किसी बात के होते हुए भी, कोई प्रतिष्ठान जिस पर कोई अध्याय प्रथम उदाहरण में लागू होता है, उसके बाद भी लागू होता रहेगा, भले ही उसमें कर्मचारियों की संख्या किसी भी बाद के समय में उस अध्याय के संबंध में प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट सीमा से कम हो जाए।
(2) यह पूरे भारत में लागू होता है।
(3) यह ऐसी तिथि से लागू होगा जो केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे; और इस संहिता के विभिन्न प्रावधानों के लिए अलग-अलग तिथियां नियुक्त की जा सकती हैं और किसी भी ऐसे प्रावधान में इस संहिता के प्रारंभ होने का कोई भी संदर्भ उस प्रावधान के लागू होने के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
(4) प्रथम अनुसूची के स्तंभ (1) और (2) में निर्दिष्ट अध्यायों की प्रयोज्यता, इस संहिता के अन्य प्रावधानों की प्रयोज्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी होगी जैसी उस अनुसूची के स्तंभ (3) में संबंधित प्रविष्टि में निर्दिष्ट है।
(5) उपधारा (4) में किसी बात के होते हुए भी, यदि केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त को, चाहे किसी प्रतिष्ठान के नियोक्ता द्वारा किए गए आवेदन पर या अन्यथा, यह प्रतीत होता है कि उस प्रतिष्ठान के नियोक्ता और अधिकांश कर्मचारियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि अध्याय III के प्रावधान उस प्रतिष्ठान पर लागू किए जाएं, तो केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त अधिसूचना द्वारा उक्त अध्याय के प्रावधानों को उस प्रतिष्ठान पर ऐसे समझौते की तिथि से या समझौते में निर्दिष्ट किसी बाद की तिथि से लागू कर सकता है।
बशर्ते कि यदि किसी प्रतिष्ठान का नियोक्ता, जिस पर इस उपधारा के अंतर्गत अध्याय III के प्रावधान लागू होते हैं, ऐसे प्रावधानों के लागू होने से मुक्त होना चाहता है, तो वह केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त को आवेदन कर सकता है और केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, यदि संतुष्ट हो कि नियोक्ता और अधिकांश कर्मचारियों के बीच इस संबंध में सहमति है, तो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से और ऐसी शर्तों के अधीन, उस अध्याय के प्रावधानों को ऐसे प्रतिष्ठान पर लागू नहीं करेगा।
(6) केंद्र सरकार, ऐसा करने के अपने इरादे की कम से कम दो महीने की सूचना देने के बाद, अधिसूचना द्वारा, इस संहिता के प्रावधानों को किसी भी प्रतिष्ठान पर लागू कर सकती है, जिसमें अधिसूचना में निर्दिष्ट व्यक्तियों की संख्या से कम व्यक्ति कार्यरत न हों।
(7) उपधारा (4) में किसी बात के होते हुए भी, यदि निगम के महानिदेशक को, चाहे किसी प्रतिष्ठान के नियोक्ता द्वारा उन्हें दिए गए आवेदन पर या अन्यथा, यह प्रतीत होता है कि उस प्रतिष्ठान के नियोक्ता और अधिकांश कर्मचारियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि अध्याय IV के प्रावधान उस प्रतिष्ठान पर लागू किए जाएं, तो निगम के महानिदेशक अधिसूचना द्वारा उक्त अध्याय के प्रावधानों को उस प्रतिष्ठान पर ऐसे समझौते की तिथि से या समझौते में निर्दिष्ट किसी बाद की तिथि से लागू कर सकते हैं।
बशर्ते कि यदि किसी प्रतिष्ठान का नियोक्ता, जिस पर इस उपधारा के अंतर्गत अध्याय IV के प्रावधान लागू होते हैं, ऐसे प्रावधानों के लागू होने से मुक्त होना चाहता है, तो वह निगम के महानिदेशक को आवेदन कर सकता है और निगम के महानिदेशक, यदि संतुष्ट हैं कि नियोक्ता और अधिकांश कर्मचारियों के बीच इस संबंध में सहमति है, तो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से और ऐसी शर्तों के अधीन, उस अध्याय के प्रावधानों को ऐसे प्रतिष्ठान पर लागू नहीं करेंगे।
(8) उपधारा (4) में किसी बात के होते हुए भी, कोई प्रतिष्ठान जिस पर कोई अध्याय प्रथम उदाहरण में लागू होता है, उसके बाद भी लागू होता रहेगा, भले ही उसमें कर्मचारियों की संख्या किसी भी बाद के समय में उस अध्याय के संबंध में प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट सीमा से कम हो जाए।
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