CSS 42अध्याय IV · Employees State Insurance Corporation
धारा 42 · नियोक्ता द्वारा पंजीकरण न कराने आदि की स्थिति में निगम के अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि कोई नियोक्ता,—
(क) किसी कर्मचारी की नियुक्ति के समय या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित विस्तारित अवधि के भीतर धारा 28 के अंतर्गत बीमा कराने में विफल रहता है या लापरवाही करता है, जिसके परिणामस्वरूप कर्मचारी इस अध्याय के अंतर्गत किसी भी लाभ का हकदार नहीं रह जाता है; या
(ख) धारा 28 के अंतर्गत किसी कर्मचारी का बीमा करता है, दुर्घटना की तिथि को या उसके बाद, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे कर्मचारी को शारीरिक चोट लगी हो, जिससे वह कर्मचारी निगम से किसी आश्रित लाभ या विकलांगता लाभ प्राप्त करने का हकदार न रह जाए; या
(ग) यदि वह किसी कर्मचारी के संबंध में इस अध्याय के अंतर्गत देय किसी अंशदान का भुगतान करने में विफल रहता है या उपेक्षा करता है, और इसके कारण वह कर्मचारी किसी लाभ का हकदार नहीं रह जाता है या कम वेतनमान पर लाभ का हकदार हो जाता है,
तब, निगम, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से संतुष्ट होने पर कि कर्मचारी को लाभ देय है, कर्मचारी को उस दर पर लाभ का भुगतान कर सकता है जिस दर पर वह हकदार है या हकदार होता यदि विफलता या लापरवाही न हुई होती, और निगम नियोक्ता को सुनवाई का अवसर दिए जाने के अधीन, कर्मचारी को भुगतान किए गए लाभ के पूंजीकृत मूल्य की वसूली करने का हकदार होगा, जिसकी गणना केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से की जाएगी।
बशर्ते कि गणना की जाने वाली पूंजीकृत मूल्य को किसी भी अंशदान और ब्याज या हर्जाने के भुगतान के लिए समायोजित किया जा सकता है, जो नियोक्ता को ऐसे अंशदान के भुगतान में देरी या भुगतान न करने के लिए देना पड़ सकता है।
(2) इस धारा के अधीन वसूली योग्य राशि को भू-राजस्व के बकाया के समान वसूल किया जा सकता है या धारा 129 से 132 के अधीन निर्दिष्ट तरीके से वसूल किया जा सकता है।
(क) किसी कर्मचारी की नियुक्ति के समय या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित विस्तारित अवधि के भीतर धारा 28 के अंतर्गत बीमा कराने में विफल रहता है या लापरवाही करता है, जिसके परिणामस्वरूप कर्मचारी इस अध्याय के अंतर्गत किसी भी लाभ का हकदार नहीं रह जाता है; या
(ख) धारा 28 के अंतर्गत किसी कर्मचारी का बीमा करता है, दुर्घटना की तिथि को या उसके बाद, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे कर्मचारी को शारीरिक चोट लगी हो, जिससे वह कर्मचारी निगम से किसी आश्रित लाभ या विकलांगता लाभ प्राप्त करने का हकदार न रह जाए; या
(ग) यदि वह किसी कर्मचारी के संबंध में इस अध्याय के अंतर्गत देय किसी अंशदान का भुगतान करने में विफल रहता है या उपेक्षा करता है, और इसके कारण वह कर्मचारी किसी लाभ का हकदार नहीं रह जाता है या कम वेतनमान पर लाभ का हकदार हो जाता है,
तब, निगम, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से संतुष्ट होने पर कि कर्मचारी को लाभ देय है, कर्मचारी को उस दर पर लाभ का भुगतान कर सकता है जिस दर पर वह हकदार है या हकदार होता यदि विफलता या लापरवाही न हुई होती, और निगम नियोक्ता को सुनवाई का अवसर दिए जाने के अधीन, कर्मचारी को भुगतान किए गए लाभ के पूंजीकृत मूल्य की वसूली करने का हकदार होगा, जिसकी गणना केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से की जाएगी।
बशर्ते कि गणना की जाने वाली पूंजीकृत मूल्य को किसी भी अंशदान और ब्याज या हर्जाने के भुगतान के लिए समायोजित किया जा सकता है, जो नियोक्ता को ऐसे अंशदान के भुगतान में देरी या भुगतान न करने के लिए देना पड़ सकता है।
(2) इस धारा के अधीन वसूली योग्य राशि को भू-राजस्व के बकाया के समान वसूल किया जा सकता है या धारा 129 से 132 के अधीन निर्दिष्ट तरीके से वसूल किया जा सकता है।
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