RE Act 53अध्याय VII · The Real Estate Appellate Tribunal
धारा 53 · न्यायाधिकरण की शक्तियाँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) अपीलीय न्यायाधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं होगा, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होगा।
(2) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, अपीलीय न्यायाधिकरण को अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने का अधिकार होगा।
(3) अपीलीय न्यायाधिकरण भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) में निहित साक्ष्य के नियमों से भी बाध्य नहीं होगा।
(4) इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के निर्वहन हेतु अपीलीय न्यायाधिकरण को निम्नलिखित मामलों के संबंध में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय को प्राप्त समान शक्तियाँ प्राप्त होंगी, अर्थात्:---
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना;
(ई) अपने निर्णयों की समीक्षा करना;
(f) चूक के आधार पर आवेदन खारिज करना या उसे एकतरफा रूप से निर्देशित करना; और
(जी) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(5) अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष सभी कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 196 के प्रयोजनों के लिए धारा 193, 219 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी, और अपीलीय न्यायाधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय XXVI के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय माना जाएगा।
(2) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, अपीलीय न्यायाधिकरण को अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने का अधिकार होगा।
(3) अपीलीय न्यायाधिकरण भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) में निहित साक्ष्य के नियमों से भी बाध्य नहीं होगा।
(4) इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के निर्वहन हेतु अपीलीय न्यायाधिकरण को निम्नलिखित मामलों के संबंध में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय को प्राप्त समान शक्तियाँ प्राप्त होंगी, अर्थात्:---
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना;
(ई) अपने निर्णयों की समीक्षा करना;
(f) चूक के आधार पर आवेदन खारिज करना या उसे एकतरफा रूप से निर्देशित करना; और
(जी) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(5) अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष सभी कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 196 के प्रयोजनों के लिए धारा 193, 219 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी, और अपीलीय न्यायाधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय XXVI के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय माना जाएगा।
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