PPVFR Act 41अध्याय · Farmers’ Rights
धारा 41 · समुदायों के अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह (चाहे वे सक्रिय रूप से खेती में लगे हों या नहीं) या कोई भी सरकारी या गैर-सरकारी संगठन, भारत में किसी भी गाँव या स्थानीय समुदाय की ओर से, प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक राजपत्र में केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से अधिसूचित किसी भी केंद्र में, उस गाँव या स्थानीय समुदाय के लोगों के योगदान से संबंधित किसी भी दावे को दाखिल कर सकता है, जो किसी किस्म के विकास में योगदान से संबंधित हो, ताकि ऐसे गाँव या स्थानीय समुदाय की ओर से दावा प्रस्तुत किया जा सके।
(2) जहां उपधारा (1) के तहत कोई दावा किया जाता है, तो उस उपधारा के तहत अधिसूचित केंद्र ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह या ऐसे सरकारी या गैर-सरकारी संगठन द्वारा किए गए दावे का सत्यापन ऐसे तरीके से कर सकता है जैसा वह उचित समझे, और यदि वह संतुष्ट है कि ऐसे गांव या स्थानीय समुदाय ने इस अधिनियम के तहत पंजीकृत किस्म के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, तो वह अपने निष्कर्षों की रिपोर्ट प्राधिकरण को देगा।
(3) जब प्राधिकरण, उपधारा (2) के तहत किसी रिपोर्ट पर, ऐसी जाँच के बाद, जैसा वह उचित समझे, संतुष्ट हो जाए कि जिस किस्म से रिपोर्ट संबंधित है, वह इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत पंजीकृत है, तो वह उस किस्म के प्रजनक को निर्धारित तरीके से नोटिस जारी कर सकता है और ऐसे प्रजनक को निर्धारित तरीके से आपत्ति दर्ज करने और सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, वह केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी सीमा के अधीन रहते हुए, आदेश द्वारा, उपधारा (1) के तहत दावा करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह या सरकारी या गैर-सरकारी संगठन को भुगतान की जाने वाली ऐसी मुआवजे की राशि प्रदान कर सकता है, जैसा वह उचित समझे।
(4) उपधारा (3) के अधीन दी गई कोई भी क्षतिपूर्ति किस्म के प्रजनक द्वारा जीन निधि में जमा की जाएगी।
(5) उपधारा (3) के अधीन दी गई क्षतिपूर्ति को भू-राजस्व का बकाया माना जाएगा और प्राधिकरण द्वारा तदनुसार वसूल की जाएगी।
(2) जहां उपधारा (1) के तहत कोई दावा किया जाता है, तो उस उपधारा के तहत अधिसूचित केंद्र ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह या ऐसे सरकारी या गैर-सरकारी संगठन द्वारा किए गए दावे का सत्यापन ऐसे तरीके से कर सकता है जैसा वह उचित समझे, और यदि वह संतुष्ट है कि ऐसे गांव या स्थानीय समुदाय ने इस अधिनियम के तहत पंजीकृत किस्म के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, तो वह अपने निष्कर्षों की रिपोर्ट प्राधिकरण को देगा।
(3) जब प्राधिकरण, उपधारा (2) के तहत किसी रिपोर्ट पर, ऐसी जाँच के बाद, जैसा वह उचित समझे, संतुष्ट हो जाए कि जिस किस्म से रिपोर्ट संबंधित है, वह इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत पंजीकृत है, तो वह उस किस्म के प्रजनक को निर्धारित तरीके से नोटिस जारी कर सकता है और ऐसे प्रजनक को निर्धारित तरीके से आपत्ति दर्ज करने और सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, वह केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी सीमा के अधीन रहते हुए, आदेश द्वारा, उपधारा (1) के तहत दावा करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह या सरकारी या गैर-सरकारी संगठन को भुगतान की जाने वाली ऐसी मुआवजे की राशि प्रदान कर सकता है, जैसा वह उचित समझे।
(4) उपधारा (3) के अधीन दी गई कोई भी क्षतिपूर्ति किस्म के प्रजनक द्वारा जीन निधि में जमा की जाएगी।
(5) उपधारा (3) के अधीन दी गई क्षतिपूर्ति को भू-राजस्व का बकाया माना जाएगा और प्राधिकरण द्वारा तदनुसार वसूल की जाएगी।
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