IF Act 33अध्याय IV · Of Protected Forests
धारा 33 · धारा 30 के अधीन अधिसूचना या धारा 32 के अधीन वाले नियमों के उल्लंघन में किए गए कार्यों के लिए शास्तियां-
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई व्यक्ति निम्नलिखित अपराधों में से कोई अपराध करेगा, अर्थात्ः-
(क) धारा 30 के अधीन आरक्षित किसी वृक्ष को गिराएगा, परितक्षण करेगा, छोटेगा, छेवेगा या जलाएगा या ऐसे किसी वृक्ष की छाल उतार डालेगा या पत्तियां तोड़ डालेगा या उसे अन्यथा नुकसान पहुंचाएगा,
(ख) धारा 30 के अधीन वाले किसी प्रतिषेध के प्रतिकूल पत्थर की खुदाई करेगा या चूने या लकड़ी का कोयला फूंकेगा, या किसी वन-उपज का संग्रहण करेगा, उससे कोई विनिर्माण प्रक्रिया चलाएगा, या उसे हटाएगा,
(ग) किसी संरक्षित वन में, धारा 30 के अधीन वाले किसी प्रतिषेप के प्रतिकूल, किसी भूमि को खेती या किसी अन्य प्रयोजन के लिए तोड़ेगा या साफ करेगा,
(घ) ऐसे बन को आग लगाएगा, या धारा 30 के अधीन आरक्षित किसी वृक्ष तक, चाहे वह खड़ा हो, गिर गया हो, या गिराया गया हो, या ऐसे बन के बन्द किए गए किसी प्रभाग तक फैल जाने से रोकने के लिए युक्तियुक्त-पूर्ण पूर्वावधानी बरते बिना आग जताएगा,
(ङ) ऐसे किसी वृक्ष या बन्द प्रभाग के सामीप्य में अपने द्वारा जलाई गई किसी आग को जलता छोड़ देगा,
(च) किसी वृक्ष को इस प्रकार गिराएगा या किसी इमारती लकड़ी को इस प्रकार खींचेगा कि यथापूर्वोक्त रूप में आरक्षित किसी वृक्ष को नुकसान पहुंचाता है,
(छ) पशुओं को ऐसे किसी वृक्ष को नुकसान पहुंचाने देगा,
(ज) धारा 32 के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों का अतिलंघन करेगा,
वह उस अवधि के लिए कारावास से, जो छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
(2) जब कभी संरक्षित वन में जानबूझकर या घोर उपेक्षा द्वारा आग लगाई जाती है, तब राज्य सरकार, इस बात के होते हुए भी कि इस धारा के अधीन कोई शास्ति लगाई गई है, निदेश दे सकेगी कि ऐसे वन में या उसके किसी प्रभाग में चरागाह या वन-उपज के किसी अधिकार का प्रयोग उतनी अवधि के लिए, जितनी वह ठीक समझती है, निलम्बित रहेगा।
(क) धारा 30 के अधीन आरक्षित किसी वृक्ष को गिराएगा, परितक्षण करेगा, छोटेगा, छेवेगा या जलाएगा या ऐसे किसी वृक्ष की छाल उतार डालेगा या पत्तियां तोड़ डालेगा या उसे अन्यथा नुकसान पहुंचाएगा,
(ख) धारा 30 के अधीन वाले किसी प्रतिषेध के प्रतिकूल पत्थर की खुदाई करेगा या चूने या लकड़ी का कोयला फूंकेगा, या किसी वन-उपज का संग्रहण करेगा, उससे कोई विनिर्माण प्रक्रिया चलाएगा, या उसे हटाएगा,
(ग) किसी संरक्षित वन में, धारा 30 के अधीन वाले किसी प्रतिषेप के प्रतिकूल, किसी भूमि को खेती या किसी अन्य प्रयोजन के लिए तोड़ेगा या साफ करेगा,
(घ) ऐसे बन को आग लगाएगा, या धारा 30 के अधीन आरक्षित किसी वृक्ष तक, चाहे वह खड़ा हो, गिर गया हो, या गिराया गया हो, या ऐसे बन के बन्द किए गए किसी प्रभाग तक फैल जाने से रोकने के लिए युक्तियुक्त-पूर्ण पूर्वावधानी बरते बिना आग जताएगा,
(ङ) ऐसे किसी वृक्ष या बन्द प्रभाग के सामीप्य में अपने द्वारा जलाई गई किसी आग को जलता छोड़ देगा,
(च) किसी वृक्ष को इस प्रकार गिराएगा या किसी इमारती लकड़ी को इस प्रकार खींचेगा कि यथापूर्वोक्त रूप में आरक्षित किसी वृक्ष को नुकसान पहुंचाता है,
(छ) पशुओं को ऐसे किसी वृक्ष को नुकसान पहुंचाने देगा,
(ज) धारा 32 के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों का अतिलंघन करेगा,
वह उस अवधि के लिए कारावास से, जो छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
(2) जब कभी संरक्षित वन में जानबूझकर या घोर उपेक्षा द्वारा आग लगाई जाती है, तब राज्य सरकार, इस बात के होते हुए भी कि इस धारा के अधीन कोई शास्ति लगाई गई है, निदेश दे सकेगी कि ऐसे वन में या उसके किसी प्रभाग में चरागाह या वन-उपज के किसी अधिकार का प्रयोग उतनी अवधि के लिए, जितनी वह ठीक समझती है, निलम्बित रहेगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 6 माह
- जुर्माना
- ₹500
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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