IF Act 26अध्याय II · Of Reserved Forests
धारा 26 · ऐसे वनों में प्रतिषिद्ध कार्य
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई व्यक्ति-
(क) धारा 5 के अधीन प्रतिषिद्ध नई कटाई-सफाई करेगा; या
(ख) आरक्षित वन में आग लगाएगा, या इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किन्हीं नियमों का उल्लंघन करते हुए ऐसी रीति से आग जलाएगा या आग को जलते छोड़ देगा जिससे ऐसा वन संकटापन्न हो जाए: या
जो आरक्षित वन में,-
(ग) ऐसी ऋतुओं में के सिवाय, जिन्हें वन अधिकारी इस निमित्त अधिसूचित करे, कोई आग जलाएगा, रखेगा या ले जाएगा;
(घ) अतिचार करेगा या पशु चराएगा या पशुओं को अतिचार करने देगाः
(ङ) किसी वृक्ष को गिराने या किसी इमारती लकड़ी को काटने या घसीटने में उपेक्षा द्वारा कोई नुकसान पहुंचाएगाः
(च) किसी वृक्ष को गिराएगा, परितक्षण करेगा, छांटेगा, छेवेगा, या उसे जलाएगा या उसकी छाल उतार डालेगा, या पत्तियां तोड़ डालेगा, या उसे अन्यथा नुकसान पहुंचाएगा;
(छ) पत्थर की खुदाई करेगा, चूना या लकड़ी का कोयला फूंकेगा, या किसी वन उपज का संग्रह करेगा, उससे कोई विनिर्माण प्रक्रिया करेगा, या उसे हटाएगा;
(ज) खेती या किसी अन्य प्रयोजन के लिए किसी भूमि को साफ करेगा या तोड़ेगा;
(झ) राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के उल्लंघन में शिकार खेलेगा, गोली चलाएगा, मछली पकड़ेगा, जल विषैला करेगा या पाश या जाल बिछाएगा; या
(ञ) किसी ऐसे क्षेत्र में, जिसमें हाथी परिरक्षण अधिनियम, 1879 (1879 का 6) प्रवृत्त नहीं है, इस प्रकार बनाए गए किन्हीं नियमों के उल्लंघन में हाथियों का वध करेगा या उन्हें पकड़ेगा,
वह वन को नुकसान पहुंचाने के कारण ऐसे प्रतिकर के अतिरिक्त, जिसका संदाय किया जाना सिद्धदोष करने वाला न्यायालय निदिष्ट करे, ऐसी अवधि के कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(2) इस धारा की किसी बात की बाबत यह न समझा जाएगा कि वह-
(क) वन अधिकारी की लिखित अनुज्ञा या राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किसी नियम के अधीन किए गए किसी कार्य को, या
(ख) धारा 15 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन चालू रखे गए या सरकार द्वारा या उसकी ओर से धारा 23 के अधीन दिए गए लिखित अनुदान या की गई लिखित संविदा द्वारा सृष्ट किसी अधिकार, के प्रयोग को, प्रतिषिद्ध करती है।
(3) जब कभी आरक्षित वन में जानबूझकर या घोर उपेक्षा द्वारा आग लगाई जाती है तब (इस बात के होते हुए भी कि इस धारा के अधीन कोई शास्ति लगाई गई है) राज्य सरकार निदेश दे सकेगी कि ऐसे बन या उसके किसी प्रभाग में चरागाह या वन-उपज के सब अधिकारों का प्रयोग उतनी कालावधि के लिए, जितनी वह ठीक समझती है, निलम्बित रहेगा ।
(क) धारा 5 के अधीन प्रतिषिद्ध नई कटाई-सफाई करेगा; या
(ख) आरक्षित वन में आग लगाएगा, या इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किन्हीं नियमों का उल्लंघन करते हुए ऐसी रीति से आग जलाएगा या आग को जलते छोड़ देगा जिससे ऐसा वन संकटापन्न हो जाए: या
जो आरक्षित वन में,-
(ग) ऐसी ऋतुओं में के सिवाय, जिन्हें वन अधिकारी इस निमित्त अधिसूचित करे, कोई आग जलाएगा, रखेगा या ले जाएगा;
(घ) अतिचार करेगा या पशु चराएगा या पशुओं को अतिचार करने देगाः
(ङ) किसी वृक्ष को गिराने या किसी इमारती लकड़ी को काटने या घसीटने में उपेक्षा द्वारा कोई नुकसान पहुंचाएगाः
(च) किसी वृक्ष को गिराएगा, परितक्षण करेगा, छांटेगा, छेवेगा, या उसे जलाएगा या उसकी छाल उतार डालेगा, या पत्तियां तोड़ डालेगा, या उसे अन्यथा नुकसान पहुंचाएगा;
(छ) पत्थर की खुदाई करेगा, चूना या लकड़ी का कोयला फूंकेगा, या किसी वन उपज का संग्रह करेगा, उससे कोई विनिर्माण प्रक्रिया करेगा, या उसे हटाएगा;
(ज) खेती या किसी अन्य प्रयोजन के लिए किसी भूमि को साफ करेगा या तोड़ेगा;
(झ) राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के उल्लंघन में शिकार खेलेगा, गोली चलाएगा, मछली पकड़ेगा, जल विषैला करेगा या पाश या जाल बिछाएगा; या
(ञ) किसी ऐसे क्षेत्र में, जिसमें हाथी परिरक्षण अधिनियम, 1879 (1879 का 6) प्रवृत्त नहीं है, इस प्रकार बनाए गए किन्हीं नियमों के उल्लंघन में हाथियों का वध करेगा या उन्हें पकड़ेगा,
वह वन को नुकसान पहुंचाने के कारण ऐसे प्रतिकर के अतिरिक्त, जिसका संदाय किया जाना सिद्धदोष करने वाला न्यायालय निदिष्ट करे, ऐसी अवधि के कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(2) इस धारा की किसी बात की बाबत यह न समझा जाएगा कि वह-
(क) वन अधिकारी की लिखित अनुज्ञा या राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किसी नियम के अधीन किए गए किसी कार्य को, या
(ख) धारा 15 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन चालू रखे गए या सरकार द्वारा या उसकी ओर से धारा 23 के अधीन दिए गए लिखित अनुदान या की गई लिखित संविदा द्वारा सृष्ट किसी अधिकार, के प्रयोग को, प्रतिषिद्ध करती है।
(3) जब कभी आरक्षित वन में जानबूझकर या घोर उपेक्षा द्वारा आग लगाई जाती है तब (इस बात के होते हुए भी कि इस धारा के अधीन कोई शास्ति लगाई गई है) राज्य सरकार निदेश दे सकेगी कि ऐसे बन या उसके किसी प्रभाग में चरागाह या वन-उपज के सब अधिकारों का प्रयोग उतनी कालावधि के लिए, जितनी वह ठीक समझती है, निलम्बित रहेगा ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 6 माह
- जुर्माना
- ₹500
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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