IF Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · निर्वचन खण्ड
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ से विरुद्ध न हो,-
(1) "पशु" के अन्तर्गत हाथी, ऊंट, भैंसे, घोड़े, घोड़ियां, खस्सी, पशु, टट्टू बछेडे, बछेडिया, खच्चर, गधे, सुअर, मेढ़े मेड़िया, भेडें, मेमने, बकरियां और बकरियों के मेमने हैं:
(2) "वन अधिकारी" से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे *** राज्य सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त सशक्त कोई अधिकारी इस अधिनियम के सब या किसी प्रयोजन को पूरा करने के लिए अथवा इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन वन अधिकारी द्वारा की जाने के लिए अपेक्षित कोई बात करने के लिए नियुक्त करे;
(3) "वन अपराध" से इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध अभिप्रेत है;
(4) "वन-उपज" के अन्तर्गत-
(क) निम्नलिखित वस्तुएं आती है अर्थात् इमारती लकड़ी, लकड़ी का कोयला, कुचुक, खैर, लकड़ी का तेल, राल, प्राकृतिक वारनिश, छाल, लाख महुआ के फूल, महुआ के बीज, कुथ और हरड़ भले ही वे वन में पाई या वन से लाई गई हों या नहीं; और
(ख) निम्नलिखित वस्तुएं, उस सूरत में आती हैं जिसमें कि वे वन में पाई जाती हैं या वन से लाई जाती हैं, अर्थात्-
(i) वृक्ष और पत्ते, फूल और फल और वृक्षों के इसमें इसके पूर्व अवर्णित सब अन्य भाग और उपज,
(ii) (घास, बेलें, नरकुल और काई सहित) वे पौधे जो वृक्ष नहीं हैं और ऐसे पौधों के सब भाग और उपज,
(iii) वन्य पशु और खालें, हाथी दांत, सींग, हड्डियां, रेशम, रेशम के कोए, शहद और मोम तथा पशुओं के सब अन्य भाग या उत्पाद,
(iv) पीट, सतही मिट्टी, चट्टान और (चूना पत्थर, लेटराइट, खनिज तेल और खानों और खदानों की सब पैदावार सहित) खनिजः
(4क) "स्वामी" के अन्तर्गत, ऐसी सम्पत्ति के बारे में, प्रतिपाल्य अधिकरण आता है जो ऐसे अधिकरण के अधीक्षण या भार-साधन में है:।
(5) "नदी" के अन्तर्गत कोई सरिता, नहर, सकरी खाड़ी या अन्य प्राकृतिक या कृत्रिम जल सरणी है;
(6) "इमारती लकड़ी" के अन्तर्गत वृक्ष आते हैं जब कि वे गिर गए हों या गिराए गए हों, और सब प्रकार की लकड़ी है चाहे वह किसी प्रयोजन के लिए काटी, गड़ी या खोखली की गई हों या नहीं; और
(7) "वृक्ष" के अन्तर्गत ताड़, ***, ठूंठ, झाड़-झांखड़ और बेंत आते हैं।
(1) "पशु" के अन्तर्गत हाथी, ऊंट, भैंसे, घोड़े, घोड़ियां, खस्सी, पशु, टट्टू बछेडे, बछेडिया, खच्चर, गधे, सुअर, मेढ़े मेड़िया, भेडें, मेमने, बकरियां और बकरियों के मेमने हैं:
(2) "वन अधिकारी" से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे *** राज्य सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त सशक्त कोई अधिकारी इस अधिनियम के सब या किसी प्रयोजन को पूरा करने के लिए अथवा इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन वन अधिकारी द्वारा की जाने के लिए अपेक्षित कोई बात करने के लिए नियुक्त करे;
(3) "वन अपराध" से इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन दण्डनीय कोई अपराध अभिप्रेत है;
(4) "वन-उपज" के अन्तर्गत-
(क) निम्नलिखित वस्तुएं आती है अर्थात् इमारती लकड़ी, लकड़ी का कोयला, कुचुक, खैर, लकड़ी का तेल, राल, प्राकृतिक वारनिश, छाल, लाख महुआ के फूल, महुआ के बीज, कुथ और हरड़ भले ही वे वन में पाई या वन से लाई गई हों या नहीं; और
(ख) निम्नलिखित वस्तुएं, उस सूरत में आती हैं जिसमें कि वे वन में पाई जाती हैं या वन से लाई जाती हैं, अर्थात्-
(i) वृक्ष और पत्ते, फूल और फल और वृक्षों के इसमें इसके पूर्व अवर्णित सब अन्य भाग और उपज,
(ii) (घास, बेलें, नरकुल और काई सहित) वे पौधे जो वृक्ष नहीं हैं और ऐसे पौधों के सब भाग और उपज,
(iii) वन्य पशु और खालें, हाथी दांत, सींग, हड्डियां, रेशम, रेशम के कोए, शहद और मोम तथा पशुओं के सब अन्य भाग या उत्पाद,
(iv) पीट, सतही मिट्टी, चट्टान और (चूना पत्थर, लेटराइट, खनिज तेल और खानों और खदानों की सब पैदावार सहित) खनिजः
(4क) "स्वामी" के अन्तर्गत, ऐसी सम्पत्ति के बारे में, प्रतिपाल्य अधिकरण आता है जो ऐसे अधिकरण के अधीक्षण या भार-साधन में है:।
(5) "नदी" के अन्तर्गत कोई सरिता, नहर, सकरी खाड़ी या अन्य प्राकृतिक या कृत्रिम जल सरणी है;
(6) "इमारती लकड़ी" के अन्तर्गत वृक्ष आते हैं जब कि वे गिर गए हों या गिराए गए हों, और सब प्रकार की लकड़ी है चाहे वह किसी प्रयोजन के लिए काटी, गड़ी या खोखली की गई हों या नहीं; और
(7) "वृक्ष" के अन्तर्गत ताड़, ***, ठूंठ, झाड़-झांखड़ और बेंत आते हैं।
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