JJ Act 9अध्याय III · Juvenile Justice Board
धारा 9 · इस अधिनियम के तहत अधिकार प्राप्त न कर चुके मजिस्ट्रेट द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब कोई मजिस्ट्रेट, जिसे इस अधिनियम के अधीन बोर्ड की शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है, इस राय का हो कि जिस व्यक्ति पर अपराध करने का आरोप है और जिसे उसके समक्ष लाया गया है, वह बच्चा है, तो वह बिना किसी देरी के ऐसी राय दर्ज करेगा और बच्चे को कार्यवाही के अभिलेख सहित तुरंत अधिकार क्षेत्र वाले बोर्ड को भेज देगा।
(2) यदि किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति ने बोर्ड के अलावा किसी अन्य न्यायालय के समक्ष यह दावा किया कि वह व्यक्ति अपराध के घटित होने की तिथि पर बच्चा था या बच्चा है, या यदि न्यायालय स्वयं इस राय का है कि वह व्यक्ति अपराध के घटित होने की तिथि पर बच्चा था, तो उक्त न्यायालय जांच करेगा, ऐसे साक्ष्य लेगा जो उस व्यक्ति की आयु निर्धारित करने के लिए आवश्यक हों (परन्तु शपथपत्र नहीं), और इस मामले पर एक निष्कर्ष दर्ज करेगा, जिसमें उस व्यक्ति की आयु यथासंभव निकट बताई जाएगी:
बशर्ते कि ऐसा दावा किसी भी न्यायालय के समक्ष उठाया जा सकता है और इसे किसी भी स्तर पर, यहां तक कि मामले के अंतिम निपटारे के बाद भी, मान्यता दी जाएगी और ऐसे दावे का निर्धारण इस अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में निहित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा, भले ही वह व्यक्ति इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को या उससे पहले बच्चा न रह गया हो।
(3) यदि न्यायालय यह पाता है कि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है और वह अपराध किए जाने की तिथि पर बच्चा था, तो वह बच्चे को उचित आदेश पारित करने के लिए बोर्ड को भेजेगा और न्यायालय द्वारा पारित कोई भी सजा अप्रभावी मानी जाएगी।
(4) यदि इस धारा के अंतर्गत किसी व्यक्ति को सुरक्षात्मक हिरासत में रखना आवश्यक हो, जबकि उस व्यक्ति के बच्चे होने के दावे की जाँच की जा रही हो, तो इस बीच उस व्यक्ति को किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है।
(2) यदि किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति ने बोर्ड के अलावा किसी अन्य न्यायालय के समक्ष यह दावा किया कि वह व्यक्ति अपराध के घटित होने की तिथि पर बच्चा था या बच्चा है, या यदि न्यायालय स्वयं इस राय का है कि वह व्यक्ति अपराध के घटित होने की तिथि पर बच्चा था, तो उक्त न्यायालय जांच करेगा, ऐसे साक्ष्य लेगा जो उस व्यक्ति की आयु निर्धारित करने के लिए आवश्यक हों (परन्तु शपथपत्र नहीं), और इस मामले पर एक निष्कर्ष दर्ज करेगा, जिसमें उस व्यक्ति की आयु यथासंभव निकट बताई जाएगी:
बशर्ते कि ऐसा दावा किसी भी न्यायालय के समक्ष उठाया जा सकता है और इसे किसी भी स्तर पर, यहां तक कि मामले के अंतिम निपटारे के बाद भी, मान्यता दी जाएगी और ऐसे दावे का निर्धारण इस अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में निहित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा, भले ही वह व्यक्ति इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को या उससे पहले बच्चा न रह गया हो।
(3) यदि न्यायालय यह पाता है कि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है और वह अपराध किए जाने की तिथि पर बच्चा था, तो वह बच्चे को उचित आदेश पारित करने के लिए बोर्ड को भेजेगा और न्यायालय द्वारा पारित कोई भी सजा अप्रभावी मानी जाएगी।
(4) यदि इस धारा के अंतर्गत किसी व्यक्ति को सुरक्षात्मक हिरासत में रखना आवश्यक हो, जबकि उस व्यक्ति के बच्चे होने के दावे की जाँच की जा रही हो, तो इस बीच उस व्यक्ति को किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है।
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