JJ Act 36अध्याय VI · Procedure in Relation to Children in Need of Care and Protection
धारा 36 · जाँच करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी बच्चे को पेश किए जाने पर या धारा 31 के तहत रिपोर्ट प्राप्त होने पर, समिति निर्धारित तरीके से जांच करेगी और समिति, स्वयं या धारा 31 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति या एजेंसी की रिपोर्ट पर, बच्चे को बाल गृह या उपयुक्त सुविधा या उपयुक्त व्यक्ति के पास भेजने का आदेश पारित कर सकती है, और सामाजिक कार्यकर्ता या बाल कल्याण अधिकारी या बाल कल्याण पुलिस अधिकारी द्वारा शीघ्र सामाजिक जांच कराने का आदेश दे सकती है।
बशर्ते कि छह वर्ष से कम आयु के सभी बच्चे, जो अनाथ हैं, सौंप दिए गए हैं या परित्यक्त प्रतीत होते हैं, उन्हें उपलब्ध होने पर विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी में रखा जाएगा।
(2) सामाजिक जांच पंद्रह दिनों के भीतर पूरी की जाएगी ताकि समिति बच्चे की पहली प्रस्तुति के चार महीने के भीतर अंतिम आदेश पारित कर सके:
बशर्ते कि अनाथ, परित्यक्त या आत्मसमर्पण किए गए बच्चों के लिए, जांच पूरी करने का समय धारा 38 में निर्दिष्ट किया जाएगा।
(3) जांच पूरी होने के बाद, यदि समिति की राय है कि उक्त बच्चे का कोई परिवार या प्रत्यक्ष सहारा नहीं है या उसे निरंतर देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता है, तो वह बच्चे को किसी विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी को भेज सकती है यदि बच्चा छह वर्ष से कम आयु का है, बाल गृह में या किसी उपयुक्त सुविधा या व्यक्ति या पालक परिवार के पास, जब तक कि बच्चे के लिए पुनर्वास के उपयुक्त साधन नहीं मिल जाते, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, या जब तक बच्चा अठारह वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर लेता।
बशर्ते कि बाल गृह में या किसी उपयुक्त सुविधा या व्यक्ति या पालक परिवार के साथ रखे गए बच्चे की स्थिति की समीक्षा समिति द्वारा, निर्धारित अनुसार की जाएगी।
(4) समिति मामलों के निपटारे की प्रकृति और लंबित मामलों पर एक त्रैमासिक रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को निर्धारित तरीके से प्रस्तुत करेगी, ताकि लंबित मामलों की समीक्षा की जा सके।
(5) उपधारा (4) के तहत समीक्षा के बाद, जिला मजिस्ट्रेट समिति को लंबित मामलों को निपटाने के लिए आवश्यक उपचारात्मक उपाय करने का निर्देश देगा, यदि आवश्यक हो, और ऐसी समीक्षाओं की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेगा, जो आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त समितियों का गठन करवा सकती है।
बशर्ते कि यदि ऐसे निर्देश प्राप्त होने के तीन महीने बाद भी समिति द्वारा लंबित मामलों का समाधान नहीं किया जाता है, तो राज्य सरकार उक्त समिति को भंग कर देगी और एक नई समिति का गठन करेगी।
(6) समिति की समाप्ति की प्रत्याशा में और नई समिति के गठन में समय की हानि न हो, इसके लिए राज्य सरकार समिति के सदस्यों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले पात्र व्यक्तियों का एक स्थायी पैनल बनाए रखेगी।
(7) उपधारा (5) के तहत नई समिति के गठन में किसी भी प्रकार की देरी होने पर, निकटवर्ती जिले की बाल कल्याण समिति इस बीच की अवधि में जिम्मेदारी ग्रहण करेगी।
बशर्ते कि छह वर्ष से कम आयु के सभी बच्चे, जो अनाथ हैं, सौंप दिए गए हैं या परित्यक्त प्रतीत होते हैं, उन्हें उपलब्ध होने पर विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी में रखा जाएगा।
(2) सामाजिक जांच पंद्रह दिनों के भीतर पूरी की जाएगी ताकि समिति बच्चे की पहली प्रस्तुति के चार महीने के भीतर अंतिम आदेश पारित कर सके:
बशर्ते कि अनाथ, परित्यक्त या आत्मसमर्पण किए गए बच्चों के लिए, जांच पूरी करने का समय धारा 38 में निर्दिष्ट किया जाएगा।
(3) जांच पूरी होने के बाद, यदि समिति की राय है कि उक्त बच्चे का कोई परिवार या प्रत्यक्ष सहारा नहीं है या उसे निरंतर देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता है, तो वह बच्चे को किसी विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी को भेज सकती है यदि बच्चा छह वर्ष से कम आयु का है, बाल गृह में या किसी उपयुक्त सुविधा या व्यक्ति या पालक परिवार के पास, जब तक कि बच्चे के लिए पुनर्वास के उपयुक्त साधन नहीं मिल जाते, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, या जब तक बच्चा अठारह वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर लेता।
बशर्ते कि बाल गृह में या किसी उपयुक्त सुविधा या व्यक्ति या पालक परिवार के साथ रखे गए बच्चे की स्थिति की समीक्षा समिति द्वारा, निर्धारित अनुसार की जाएगी।
(4) समिति मामलों के निपटारे की प्रकृति और लंबित मामलों पर एक त्रैमासिक रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को निर्धारित तरीके से प्रस्तुत करेगी, ताकि लंबित मामलों की समीक्षा की जा सके।
(5) उपधारा (4) के तहत समीक्षा के बाद, जिला मजिस्ट्रेट समिति को लंबित मामलों को निपटाने के लिए आवश्यक उपचारात्मक उपाय करने का निर्देश देगा, यदि आवश्यक हो, और ऐसी समीक्षाओं की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेगा, जो आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त समितियों का गठन करवा सकती है।
बशर्ते कि यदि ऐसे निर्देश प्राप्त होने के तीन महीने बाद भी समिति द्वारा लंबित मामलों का समाधान नहीं किया जाता है, तो राज्य सरकार उक्त समिति को भंग कर देगी और एक नई समिति का गठन करेगी।
(6) समिति की समाप्ति की प्रत्याशा में और नई समिति के गठन में समय की हानि न हो, इसके लिए राज्य सरकार समिति के सदस्यों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले पात्र व्यक्तियों का एक स्थायी पैनल बनाए रखेगी।
(7) उपधारा (5) के तहत नई समिति के गठन में किसी भी प्रकार की देरी होने पर, निकटवर्ती जिले की बाल कल्याण समिति इस बीच की अवधि में जिम्मेदारी ग्रहण करेगी।
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