AT Act 4अध्याय II · Establishment of Tribunals and Benches Thereof
धारा 4 · प्रशासनिक न्यायाधिकरणों की स्थापना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा एक प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना करेगी, जिसे केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के नाम से जाना जाएगा, जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अंतर्गत केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण को प्रदत्त अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार का प्रयोग करेगा।
(2) केंद्र सरकार, किसी राज्य सरकार से इस संबंध में अनुरोध प्राप्त होने पर, अधिसूचना द्वारा उस राज्य के लिए एक प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना कर सकती है, जिसे .......(राज्य का नाम) प्रशासनिक न्यायाधिकरण के नाम से जाना जाएगा, जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अंतर्गत राज्य के प्रशासनिक न्यायाधिकरण को प्रदत्त अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार का प्रयोग करेगा।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, तथा इस बात के होते हुए भी कि उन राज्यों में से किसी या सभी ने उस उपधारा के अधीन न्यायाधिकरण स्थापित किए हों, दो या दो से अधिक राज्य आपस में यह समझौता कर सकते हैं कि वही प्रशासनिक न्यायाधिकरण समझौते में भाग लेने वाले प्रत्येक राज्य के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण होगा, और यदि यह समझौता केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित हो और भारत के राजपत्र तथा उन राज्यों में से प्रत्येक के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित हो, तो केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा एक संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण स्थापित कर सकती है, जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उन राज्यों के प्रशासनिक न्यायाधिकरणों को प्रदत्त अधिकार, शक्तियाँ और प्राधिकार का प्रयोग करेगा।
(4) उपधारा (3) के तहत किए गए समझौते में संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण के नाम, संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के चयन में भाग लेने वाले राज्यों के शामिल होने के तरीके, न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के बैठने के स्थानों, संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण से संबंधित व्यय के भाग लेने वाले राज्यों के बीच आवंटन के संबंध में प्रावधान होंगे और इसमें ऐसे अन्य पूरक, आकस्मिक और परिणामी प्रावधान भी शामिल हो सकते हैं जो इस अधिनियम के साथ असंगत न हों और समझौते को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक या उपयुक्त समझे जाएं।
2 [(5) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों या धारा 5 की उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्र सरकार,--
(क) किसी राज्य सरकार की सहमति से, अधिसूचना द्वारा, उस राज्य के लिए उप-धारा (2) के अधीन स्थापित राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के सभी या किसी भी सदस्य को उस राज्य के संबंध में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के सदस्य के रूप में नामित कर सकती है और वे इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण को प्रदत्त अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार का प्रयोग करेंगे;
(ख) किसी राज्य सरकार से इस संबंध में अनुरोध प्राप्त होने पर, अधिसूचना द्वारा उस राज्य में कार्यरत केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के सभी या किसी भी सदस्य को उस राज्य के लिए राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के सदस्य के रूप में नामित कर सकती है और वह इस अधिनियम द्वारा या इसके अंतर्गत उस राज्य के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण को प्रदत्त अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार का प्रयोग करेगी।
और ऐसे पदनाम पर, राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठें, या जैसा भी मामला हो, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठें, सभी मामलों में, संविधान के अनुच्छेद 323ए और इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत स्थापित उस राज्य के लिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण या राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण मानी जाएंगी।
(6) उपधारा (5) के अंतर्गत प्रत्येक अधिसूचना में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण और राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण के लिए सामान्य सदस्यों से संबंधित व्यय के लिए संबंधित राज्य और केंद्र सरकार के बीच विभाजन का प्रावधान होगा, और ऐसे अन्य आनुषंगिक और परिणामी प्रावधान भी होंगे जो इस अधिनियम के साथ असंगत न हों और जिन्हें आवश्यक या उपयुक्त समझा जाए।]
(2) केंद्र सरकार, किसी राज्य सरकार से इस संबंध में अनुरोध प्राप्त होने पर, अधिसूचना द्वारा उस राज्य के लिए एक प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना कर सकती है, जिसे .......(राज्य का नाम) प्रशासनिक न्यायाधिकरण के नाम से जाना जाएगा, जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अंतर्गत राज्य के प्रशासनिक न्यायाधिकरण को प्रदत्त अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार का प्रयोग करेगा।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, तथा इस बात के होते हुए भी कि उन राज्यों में से किसी या सभी ने उस उपधारा के अधीन न्यायाधिकरण स्थापित किए हों, दो या दो से अधिक राज्य आपस में यह समझौता कर सकते हैं कि वही प्रशासनिक न्यायाधिकरण समझौते में भाग लेने वाले प्रत्येक राज्य के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण होगा, और यदि यह समझौता केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित हो और भारत के राजपत्र तथा उन राज्यों में से प्रत्येक के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित हो, तो केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा एक संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण स्थापित कर सकती है, जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उन राज्यों के प्रशासनिक न्यायाधिकरणों को प्रदत्त अधिकार, शक्तियाँ और प्राधिकार का प्रयोग करेगा।
(4) उपधारा (3) के तहत किए गए समझौते में संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण के नाम, संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के चयन में भाग लेने वाले राज्यों के शामिल होने के तरीके, न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के बैठने के स्थानों, संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण से संबंधित व्यय के भाग लेने वाले राज्यों के बीच आवंटन के संबंध में प्रावधान होंगे और इसमें ऐसे अन्य पूरक, आकस्मिक और परिणामी प्रावधान भी शामिल हो सकते हैं जो इस अधिनियम के साथ असंगत न हों और समझौते को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक या उपयुक्त समझे जाएं।
2 [(5) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों या धारा 5 की उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्र सरकार,--
(क) किसी राज्य सरकार की सहमति से, अधिसूचना द्वारा, उस राज्य के लिए उप-धारा (2) के अधीन स्थापित राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के सभी या किसी भी सदस्य को उस राज्य के संबंध में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के सदस्य के रूप में नामित कर सकती है और वे इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण को प्रदत्त अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार का प्रयोग करेंगे;
(ख) किसी राज्य सरकार से इस संबंध में अनुरोध प्राप्त होने पर, अधिसूचना द्वारा उस राज्य में कार्यरत केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के सभी या किसी भी सदस्य को उस राज्य के लिए राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठों के सदस्य के रूप में नामित कर सकती है और वह इस अधिनियम द्वारा या इसके अंतर्गत उस राज्य के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण को प्रदत्त अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार का प्रयोग करेगी।
और ऐसे पदनाम पर, राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठें, या जैसा भी मामला हो, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की पीठ या पीठें, सभी मामलों में, संविधान के अनुच्छेद 323ए और इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत स्थापित उस राज्य के लिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण या राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण मानी जाएंगी।
(6) उपधारा (5) के अंतर्गत प्रत्येक अधिसूचना में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण और राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण के लिए सामान्य सदस्यों से संबंधित व्यय के लिए संबंधित राज्य और केंद्र सरकार के बीच विभाजन का प्रावधान होगा, और ऐसे अन्य आनुषंगिक और परिणामी प्रावधान भी होंगे जो इस अधिनियम के साथ असंगत न हों और जिन्हें आवश्यक या उपयुक्त समझा जाए।]
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