AT Act 3अध्याय I · Preliminary
धारा 3 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
1 [(क) "प्रशासनिक सदस्य" से तात्पर्य न्यायाधिकरण के ऐसे सदस्य से है जो खंड (i) के अर्थ में न्यायिक सदस्य नहीं है;]
2 [(अ)] किसी राज्य के संबंध में "प्रशासनिक न्यायाधिकरण" का अर्थ उस राज्य के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण या, जैसा भी मामला हो, उस राज्य और किसी अन्य राज्य या राज्यों के लिए संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण है;
(ख) "आवेदन" से तात्पर्य धारा 19 के अंतर्गत किए गए आवेदन से है;
(ग) किसी न्यायाधिकरण के संबंध में "नियुक्त दिन" से तात्पर्य उस तिथि से है जिससे धारा 4 के अंतर्गत अधिसूचना द्वारा इसकी स्थापना की जाती है;
(घ) "उपयुक्त सरकार" से तात्पर्य है,--
(i) केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण या संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण के संबंध में, केंद्र सरकार;
(ii) राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण के संबंध में, राज्य सरकार;
(ई) "बेंच" से तात्पर्य न्यायाधिकरण की बेंच से है;
(f) "केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण" से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित प्रशासनिक न्यायाधिकरण से है;
(जी) "अध्यक्ष" से तात्पर्य न्यायाधिकरण के अध्यक्ष से है;
(h) "संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण" से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन स्थापित दो या दो से अधिक राज्यों के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण से है;
3 [(i) "न्यायिक सदस्य" से तात्पर्य इस अधिनियम के तहत नियुक्त न्यायाधिकरण के सदस्य से है, और इसमें 4 [अध्यक्ष] शामिल है, जिसके पास धारा 6 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट योग्यताएं हैं;
(ia) "सदस्य" से तात्पर्य न्यायाधिकरण के सदस्य (चाहे न्यायिक हो या प्रशासनिक) से है, और इसमें अध्यक्ष भी शामिल है 5 ***;]
(j) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है;
(k) "पोस्ट" से तात्पर्य भारत के भीतर या भारत के बाहर स्थित पोस्ट से है;
(l) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(m) "राष्ट्रपति" से तात्पर्य भारत के राष्ट्रपति से है;
6 * * * * *
(ओ) "नियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों से है;
(पी) "सेवा" से तात्पर्य भारत के भीतर या भारत के बाहर दी जाने वाली सेवा से है;
(q) किसी व्यक्ति के संबंध में "सेवा मामले" से तात्पर्य संघ या किसी राज्य या भारत के क्षेत्र के भीतर स्थित किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के मामलों से संबंधित उसकी सेवा की शर्तों से है, या भारत सरकार के नियंत्रण में स्थित किसी निगम [ या समाज] से संबंधित है, जो सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है।
(i) पारिश्रमिक (भत्तों सहित), पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ;
(ii) कार्यकाल जिसमें पुष्टि, वरिष्ठता, पदोन्नति, पदावनति, समयपूर्व सेवानिवृत्ति और अधिवर्षता शामिल हैं;
(iii) किसी भी प्रकार की छुट्टी;
(iv) अनुशासनात्मक मामले; या
(v) कोई अन्य मामला;
(आर) किसी मामले के संबंध में "शिकायतों के निवारण के संबंध में सेवा नियम" से तात्पर्य उन नियमों, विनियमों, आदेशों या अन्य उपकरणों या व्यवस्थाओं से है जो इस अधिनियम के अलावा किसी अन्य तरीके से ऐसे मामलों से संबंधित किसी भी शिकायत के निवारण के संबंध में उस समय लागू हों;
8 [(rr) "सोसायटी" से तात्पर्य सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (21 ऑफ 1860) या किसी राज्य में उस समय लागू किसी संबंधित कानून के तहत पंजीकृत सोसायटी से है;]
(s) "सर्वोच्च न्यायालय" से तात्पर्य भारत के सर्वोच्च न्यायालय से है;
(टी) "ट्रिब्यूनल" से तात्पर्य केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण या राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण या संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण से है;
9 [(u) "उपाध्यक्ष" से तात्पर्य ऐसे सदस्य से है जिसे न्यायाधिकरण की पीठों की स्थापना के प्रत्येक स्थान पर प्रशासनिक कार्य करने के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा अधिकृत किया गया है।
स्पष्टीकरण .--यदि किसी न्यायाधिकरण में दो या दो से अधिक उपाध्यक्ष हों, तो इस अधिनियम में उपाध्यक्ष के संदर्भ को उन प्रत्येक उपाध्यक्ष के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
1 [(क) "प्रशासनिक सदस्य" से तात्पर्य न्यायाधिकरण के ऐसे सदस्य से है जो खंड (i) के अर्थ में न्यायिक सदस्य नहीं है;]
2 [(अ)] किसी राज्य के संबंध में "प्रशासनिक न्यायाधिकरण" का अर्थ उस राज्य के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण या, जैसा भी मामला हो, उस राज्य और किसी अन्य राज्य या राज्यों के लिए संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण है;
(ख) "आवेदन" से तात्पर्य धारा 19 के अंतर्गत किए गए आवेदन से है;
(ग) किसी न्यायाधिकरण के संबंध में "नियुक्त दिन" से तात्पर्य उस तिथि से है जिससे धारा 4 के अंतर्गत अधिसूचना द्वारा इसकी स्थापना की जाती है;
(घ) "उपयुक्त सरकार" से तात्पर्य है,--
(i) केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण या संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण के संबंध में, केंद्र सरकार;
(ii) राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण के संबंध में, राज्य सरकार;
(ई) "बेंच" से तात्पर्य न्यायाधिकरण की बेंच से है;
(f) "केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण" से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित प्रशासनिक न्यायाधिकरण से है;
(जी) "अध्यक्ष" से तात्पर्य न्यायाधिकरण के अध्यक्ष से है;
(h) "संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण" से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन स्थापित दो या दो से अधिक राज्यों के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण से है;
3 [(i) "न्यायिक सदस्य" से तात्पर्य इस अधिनियम के तहत नियुक्त न्यायाधिकरण के सदस्य से है, और इसमें 4 [अध्यक्ष] शामिल है, जिसके पास धारा 6 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट योग्यताएं हैं;
(ia) "सदस्य" से तात्पर्य न्यायाधिकरण के सदस्य (चाहे न्यायिक हो या प्रशासनिक) से है, और इसमें अध्यक्ष भी शामिल है 5 ***;]
(j) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है;
(k) "पोस्ट" से तात्पर्य भारत के भीतर या भारत के बाहर स्थित पोस्ट से है;
(l) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(m) "राष्ट्रपति" से तात्पर्य भारत के राष्ट्रपति से है;
6 * * * * *
(ओ) "नियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों से है;
(पी) "सेवा" से तात्पर्य भारत के भीतर या भारत के बाहर दी जाने वाली सेवा से है;
(q) किसी व्यक्ति के संबंध में "सेवा मामले" से तात्पर्य संघ या किसी राज्य या भारत के क्षेत्र के भीतर स्थित किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के मामलों से संबंधित उसकी सेवा की शर्तों से है, या भारत सरकार के नियंत्रण में स्थित किसी निगम [ या समाज] से संबंधित है, जो सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है।
(i) पारिश्रमिक (भत्तों सहित), पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ;
(ii) कार्यकाल जिसमें पुष्टि, वरिष्ठता, पदोन्नति, पदावनति, समयपूर्व सेवानिवृत्ति और अधिवर्षता शामिल हैं;
(iii) किसी भी प्रकार की छुट्टी;
(iv) अनुशासनात्मक मामले; या
(v) कोई अन्य मामला;
(आर) किसी मामले के संबंध में "शिकायतों के निवारण के संबंध में सेवा नियम" से तात्पर्य उन नियमों, विनियमों, आदेशों या अन्य उपकरणों या व्यवस्थाओं से है जो इस अधिनियम के अलावा किसी अन्य तरीके से ऐसे मामलों से संबंधित किसी भी शिकायत के निवारण के संबंध में उस समय लागू हों;
8 [(rr) "सोसायटी" से तात्पर्य सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (21 ऑफ 1860) या किसी राज्य में उस समय लागू किसी संबंधित कानून के तहत पंजीकृत सोसायटी से है;]
(s) "सर्वोच्च न्यायालय" से तात्पर्य भारत के सर्वोच्च न्यायालय से है;
(टी) "ट्रिब्यूनल" से तात्पर्य केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण या राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण या संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण से है;
9 [(u) "उपाध्यक्ष" से तात्पर्य ऐसे सदस्य से है जिसे न्यायाधिकरण की पीठों की स्थापना के प्रत्येक स्थान पर प्रशासनिक कार्य करने के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा अधिकृत किया गया है।
स्पष्टीकरण .--यदि किसी न्यायाधिकरण में दो या दो से अधिक उपाध्यक्ष हों, तो इस अधिनियम में उपाध्यक्ष के संदर्भ को उन प्रत्येक उपाध्यक्ष के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
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