AT Act 19अध्याय IV · Procedure
धारा 19 · न्यायाधिकरणों में आवेदन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आने वाले किसी मामले से संबंधित किसी आदेश से पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत के निवारण के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन कर सकता है।
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, आदेश का अर्थ है दिया गया आदेश--
(क) भारत सरकार द्वारा या भारत के भूभाग के भीतर स्थित किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण द्वारा या भारत सरकार के नियंत्रण में स्थित किसी निगम [या समाज] द्वारा, जिसका स्वामित्व या नियंत्रण सरकार के पास हो; या
(ख) सरकार के किसी अधिकारी, समिति या अन्य निकाय या एजेंसी द्वारा या स्थानीय या अन्य प्राधिकरण या निगम 1 [या समाज] द्वारा, जैसा कि खंड (क) में निर्दिष्ट है।
(2) उप-धारा (1) के अंतर्गत प्रत्येक आवेदन ऐसे प्रपत्र में होगा तथा उसके साथ ऐसे दस्तावेज या अन्य साक्ष्य तथा ऐसा शुल्क (यदि कोई हो, सौ रुपये से अधिक नहीं) 2 [ऐसे आवेदन को दाखिल करने के संबंध में तथा प्रक्रियाओं की तामील या निष्पादन के लिए ऐसे अन्य शुल्क, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए] संलग्न होगा।
3 [(3) उपधारा (1) के तहत आवेदन प्राप्त होने पर, यदि न्यायाधिकरण आवश्यक समझे जाने वाली जांच के बाद संतुष्ट हो जाता है कि आवेदन उसके द्वारा निर्णय या परीक्षण के लिए उपयुक्त मामला है, तो वह ऐसे आवेदन को स्वीकार करेगा; परन्तु यदि न्यायाधिकरण संतुष्ट नहीं होता है, तो वह अपने कारण दर्ज करने के बाद आवेदन को संक्षेप में अस्वीकार कर सकता है।]
(4) जहां उपधारा (3) के तहत किसी न्यायाधिकरण द्वारा आवेदन स्वीकार कर लिया गया है, तो ऐसे आवेदन के विषय-वस्तु से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए प्रासंगिक सेवा नियमों के तहत ऐसी स्वीकृति से ठीक पहले लंबित सभी कार्यवाही समाप्त हो जाएगी और न्यायाधिकरण द्वारा अन्यथा निर्देशित किए जाने के अलावा, ऐसे नियमों के तहत ऐसे मामले से संबंधित कोई अपील या अभ्यावेदन आगे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, आदेश का अर्थ है दिया गया आदेश--
(क) भारत सरकार द्वारा या भारत के भूभाग के भीतर स्थित किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण द्वारा या भारत सरकार के नियंत्रण में स्थित किसी निगम [या समाज] द्वारा, जिसका स्वामित्व या नियंत्रण सरकार के पास हो; या
(ख) सरकार के किसी अधिकारी, समिति या अन्य निकाय या एजेंसी द्वारा या स्थानीय या अन्य प्राधिकरण या निगम 1 [या समाज] द्वारा, जैसा कि खंड (क) में निर्दिष्ट है।
(2) उप-धारा (1) के अंतर्गत प्रत्येक आवेदन ऐसे प्रपत्र में होगा तथा उसके साथ ऐसे दस्तावेज या अन्य साक्ष्य तथा ऐसा शुल्क (यदि कोई हो, सौ रुपये से अधिक नहीं) 2 [ऐसे आवेदन को दाखिल करने के संबंध में तथा प्रक्रियाओं की तामील या निष्पादन के लिए ऐसे अन्य शुल्क, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाए] संलग्न होगा।
3 [(3) उपधारा (1) के तहत आवेदन प्राप्त होने पर, यदि न्यायाधिकरण आवश्यक समझे जाने वाली जांच के बाद संतुष्ट हो जाता है कि आवेदन उसके द्वारा निर्णय या परीक्षण के लिए उपयुक्त मामला है, तो वह ऐसे आवेदन को स्वीकार करेगा; परन्तु यदि न्यायाधिकरण संतुष्ट नहीं होता है, तो वह अपने कारण दर्ज करने के बाद आवेदन को संक्षेप में अस्वीकार कर सकता है।]
(4) जहां उपधारा (3) के तहत किसी न्यायाधिकरण द्वारा आवेदन स्वीकार कर लिया गया है, तो ऐसे आवेदन के विषय-वस्तु से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए प्रासंगिक सेवा नियमों के तहत ऐसी स्वीकृति से ठीक पहले लंबित सभी कार्यवाही समाप्त हो जाएगी और न्यायाधिकरण द्वारा अन्यथा निर्देशित किए जाने के अलावा, ऐसे नियमों के तहत ऐसे मामले से संबंधित कोई अपील या अभ्यावेदन आगे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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