AT Act 29अध्याय V · Miscellaneous
धारा 29 · लंबित मामलों का स्थानांतरण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के तहत किसी न्यायाधिकरण की स्थापना की तिथि से ठीक पहले किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण के समक्ष लंबित प्रत्येक वाद या अन्य कार्यवाही, जिसका वाद कारण ऐसा हो कि यदि वह ऐसी स्थापना के बाद उत्पन्न हुआ होता, तो ऐसे न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में होता, उस तिथि को ऐसे न्यायाधिकरण को स्थानांतरित हो जाएगी।
बशर्ते कि इस उपधारा में कुछ भी उच्च न्यायालय के समक्ष उपर्युक्त लंबित किसी अपील पर लागू नहीं होगा 1 ***।
(2) किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण या निगम 2 [या सोसायटी] के संबंध में किसी न्यायाधिकरण को अधिकार क्षेत्र प्रदान किए जाने की तिथि से ठीक पहले किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण के समक्ष लंबित प्रत्येक वाद या अन्य कार्यवाही, जिसका वाद कारण ऐसा हो कि यदि वह उक्त तिथि के बाद उत्पन्न हुआ होता, तो ऐसे न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में होता, उस तिथि को ऐसे न्यायाधिकरण को स्थानांतरित हो जाएगी:
बशर्ते कि इस उपधारा की कोई बात उच्च न्यायालय के समक्ष उपर्युक्त रूप से लंबित किसी अपील पर लागू नहीं होगी। 3 ***
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण या निगम 4 [या सोसायटी] के संबंध में, "वह तिथि जिससे न्यायाधिकरण को अधिकार क्षेत्र प्रदान किया जाता है", का अर्थ वह तिथि है जिससे धारा 14 की उपधारा (3) या, जैसा भी मामला हो, धारा 15 की उपधारा (3) के प्रावधान ऐसे स्थानीय या अन्य प्राधिकरण या निगम 4 [या सोसायटी] पर लागू होते हैं।
(3) जहां संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना की तिथि से ठीक पहले, जिन राज्यों के लिए इसकी स्थापना की गई है, उनमें से किसी एक या अधिक राज्यों में राज्य न्यायाधिकरण या राज्य न्यायाधिकरण हैं, तो उक्त तिथि से ठीक पहले ऐसे राज्य न्यायाधिकरण या राज्य न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित सभी मामले, उनके अभिलेखों सहित, उस तिथि को ऐसे संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे।
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "राज्य न्यायाधिकरण" से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन स्थापित न्यायाधिकरण से है।
(4) जहाँ कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण से उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के अधीन किसी न्यायाधिकरण को हस्तांतरित की जाती है,--
(क) न्यायालय या अन्य प्राधिकारी, ऐसे हस्तांतरण के बाद यथाशीघ्र ऐसे मुकदमे, अपील या अन्य कार्यवाही के अभिलेख न्यायाधिकरण को अग्रेषित करेगा; और
(ख) न्यायाधिकरण ऐसे अभिलेख प्राप्त होने पर, ऐसे वाद, अपील या अन्य कार्यवाही पर, जहाँ तक संभव हो, धारा 19 के अंतर्गत आवेदन के मामले में, उस चरण से कार्यवाही कर सकता है जो ऐसे हस्तांतरण से पहले पहुँच गया था या किसी पूर्व चरण से या नए सिरे से, जैसा न्यायाधिकरण उचित समझे।
(5) जहाँ कोई मामला उपधारा (3) के अधीन संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण को हस्तांतरित किया जाता है, तो संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण ऐसे मामले से उस चरण से निपटना शुरू कर सकता है जिस चरण तक वह हस्तांतरण से पहले पहुँचा था।
5 [(6) प्रशासनिक न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 1987 (51 ऑफ 1987) के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित प्रत्येक मामला, यदि वह ऐसा मामला है जिसका कारण जिस पर वह आधारित है, ऐसा है कि यदि वह ऐसे प्रारंभ के बाद उत्पन्न हुआ होता, तो वह किसी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में होता, तो ऐसे प्रारंभ होने पर उसके अभिलेखों सहित वह मामला ऐसे न्यायालय को स्थानांतरित हो जाएगा।
(7) जहां कोई मामला उपधारा (6) के अधीन किसी न्यायालय को हस्तांतरित किया जाता है, तो वह न्यायालय उस मामले पर उस चरण से कार्यवाही कर सकता है जिस चरण तक वह हस्तांतरण से पहले पहुंचा था।]
बशर्ते कि इस उपधारा में कुछ भी उच्च न्यायालय के समक्ष उपर्युक्त लंबित किसी अपील पर लागू नहीं होगा 1 ***।
(2) किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण या निगम 2 [या सोसायटी] के संबंध में किसी न्यायाधिकरण को अधिकार क्षेत्र प्रदान किए जाने की तिथि से ठीक पहले किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण के समक्ष लंबित प्रत्येक वाद या अन्य कार्यवाही, जिसका वाद कारण ऐसा हो कि यदि वह उक्त तिथि के बाद उत्पन्न हुआ होता, तो ऐसे न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में होता, उस तिथि को ऐसे न्यायाधिकरण को स्थानांतरित हो जाएगी:
बशर्ते कि इस उपधारा की कोई बात उच्च न्यायालय के समक्ष उपर्युक्त रूप से लंबित किसी अपील पर लागू नहीं होगी। 3 ***
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण या निगम 4 [या सोसायटी] के संबंध में, "वह तिथि जिससे न्यायाधिकरण को अधिकार क्षेत्र प्रदान किया जाता है", का अर्थ वह तिथि है जिससे धारा 14 की उपधारा (3) या, जैसा भी मामला हो, धारा 15 की उपधारा (3) के प्रावधान ऐसे स्थानीय या अन्य प्राधिकरण या निगम 4 [या सोसायटी] पर लागू होते हैं।
(3) जहां संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना की तिथि से ठीक पहले, जिन राज्यों के लिए इसकी स्थापना की गई है, उनमें से किसी एक या अधिक राज्यों में राज्य न्यायाधिकरण या राज्य न्यायाधिकरण हैं, तो उक्त तिथि से ठीक पहले ऐसे राज्य न्यायाधिकरण या राज्य न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित सभी मामले, उनके अभिलेखों सहित, उस तिथि को ऐसे संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे।
स्पष्टीकरण .--इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "राज्य न्यायाधिकरण" से तात्पर्य धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन स्थापित न्यायाधिकरण से है।
(4) जहाँ कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण से उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के अधीन किसी न्यायाधिकरण को हस्तांतरित की जाती है,--
(क) न्यायालय या अन्य प्राधिकारी, ऐसे हस्तांतरण के बाद यथाशीघ्र ऐसे मुकदमे, अपील या अन्य कार्यवाही के अभिलेख न्यायाधिकरण को अग्रेषित करेगा; और
(ख) न्यायाधिकरण ऐसे अभिलेख प्राप्त होने पर, ऐसे वाद, अपील या अन्य कार्यवाही पर, जहाँ तक संभव हो, धारा 19 के अंतर्गत आवेदन के मामले में, उस चरण से कार्यवाही कर सकता है जो ऐसे हस्तांतरण से पहले पहुँच गया था या किसी पूर्व चरण से या नए सिरे से, जैसा न्यायाधिकरण उचित समझे।
(5) जहाँ कोई मामला उपधारा (3) के अधीन संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण को हस्तांतरित किया जाता है, तो संयुक्त प्रशासनिक न्यायाधिकरण ऐसे मामले से उस चरण से निपटना शुरू कर सकता है जिस चरण तक वह हस्तांतरण से पहले पहुँचा था।
5 [(6) प्रशासनिक न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 1987 (51 ऑफ 1987) के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित प्रत्येक मामला, यदि वह ऐसा मामला है जिसका कारण जिस पर वह आधारित है, ऐसा है कि यदि वह ऐसे प्रारंभ के बाद उत्पन्न हुआ होता, तो वह किसी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में होता, तो ऐसे प्रारंभ होने पर उसके अभिलेखों सहित वह मामला ऐसे न्यायालय को स्थानांतरित हो जाएगा।
(7) जहां कोई मामला उपधारा (6) के अधीन किसी न्यायालय को हस्तांतरित किया जाता है, तो वह न्यायालय उस मामले पर उस चरण से कार्यवाही कर सकता है जिस चरण तक वह हस्तांतरण से पहले पहुंचा था।]
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