AT Act 21अध्याय IV · Procedure
धारा 21 · सीमा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) न्यायाधिकरण किसी आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा,--
(क) ऐसे मामले में जहां धारा 20 की उपधारा (2) के खंड (क) में उल्लिखित अंतिम आदेश शिकायत के संबंध में दिया गया है, जब तक कि आवेदन ऐसे अंतिम आदेश दिए जाने की तारीख से एक वर्ष के भीतर नहीं किया जाता है;
(ख) ऐसे मामले में जहां धारा 20 की उपधारा (2) के खंड (ख) में उल्लिखित अपील या अभ्यावेदन किया गया हो और उसके बाद छह महीने की अवधि बीत जाने के बाद भी ऐसा कोई अंतिम आदेश न दिया गया हो, तो उक्त छह महीने की अवधि की समाप्ति की तारीख से एक वर्ष के भीतर।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहाँ--
(क) जिस शिकायत के संबंध में आवेदन किया गया है, वह उस आदेश के कारण उत्पन्न हुई हो जो उस तारीख से ठीक पहले के तीन वर्षों की अवधि के दौरान किसी भी समय पारित किया गया हो, जिस तारीख से इस अधिनियम के तहत न्यायाधिकरण का अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार उस मामले के संबंध में प्रयोग करने योग्य हो जाता है जिससे ऐसा आदेश संबंधित है; और
(ख) उक्त तिथि से पहले किसी भी उच्च न्यायालय के समक्ष ऐसी शिकायत के निवारण के लिए कोई कार्यवाही प्रारंभ नहीं की गई थी।
यदि आवेदन उपधारा (1) के खंड (क) या, जैसा भी मामला हो, खंड (ख) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर या उक्त तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर किया जाता है, तो न्यायाधिकरण द्वारा आवेदन पर विचार किया जाएगा, जो भी अवधि बाद में समाप्त हो।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा ( 1) के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट एक वर्ष की अवधि के बाद या, जैसा भी मामला हो, उपधारा (2) में निर्दिष्ट छह महीने की अवधि के बाद आवेदन स्वीकार किया जा सकता है, यदि आवेदक न्यायाधिकरण को संतुष्ट कर दे कि उसके पास ऐसी अवधि के भीतर आवेदन न करने का पर्याप्त कारण था।
(क) ऐसे मामले में जहां धारा 20 की उपधारा (2) के खंड (क) में उल्लिखित अंतिम आदेश शिकायत के संबंध में दिया गया है, जब तक कि आवेदन ऐसे अंतिम आदेश दिए जाने की तारीख से एक वर्ष के भीतर नहीं किया जाता है;
(ख) ऐसे मामले में जहां धारा 20 की उपधारा (2) के खंड (ख) में उल्लिखित अपील या अभ्यावेदन किया गया हो और उसके बाद छह महीने की अवधि बीत जाने के बाद भी ऐसा कोई अंतिम आदेश न दिया गया हो, तो उक्त छह महीने की अवधि की समाप्ति की तारीख से एक वर्ष के भीतर।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहाँ--
(क) जिस शिकायत के संबंध में आवेदन किया गया है, वह उस आदेश के कारण उत्पन्न हुई हो जो उस तारीख से ठीक पहले के तीन वर्षों की अवधि के दौरान किसी भी समय पारित किया गया हो, जिस तारीख से इस अधिनियम के तहत न्यायाधिकरण का अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार उस मामले के संबंध में प्रयोग करने योग्य हो जाता है जिससे ऐसा आदेश संबंधित है; और
(ख) उक्त तिथि से पहले किसी भी उच्च न्यायालय के समक्ष ऐसी शिकायत के निवारण के लिए कोई कार्यवाही प्रारंभ नहीं की गई थी।
यदि आवेदन उपधारा (1) के खंड (क) या, जैसा भी मामला हो, खंड (ख) में निर्दिष्ट अवधि के भीतर या उक्त तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर किया जाता है, तो न्यायाधिकरण द्वारा आवेदन पर विचार किया जाएगा, जो भी अवधि बाद में समाप्त हो।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा ( 1) के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट एक वर्ष की अवधि के बाद या, जैसा भी मामला हो, उपधारा (2) में निर्दिष्ट छह महीने की अवधि के बाद आवेदन स्वीकार किया जा सकता है, यदि आवेदक न्यायाधिकरण को संतुष्ट कर दे कि उसके पास ऐसी अवधि के भीतर आवेदन न करने का पर्याप्त कारण था।
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