MV Act 47अध्याय IV · Registration of Motor Vehicles
धारा 47 · किसी अन्य राज्य में स्थानांतरण होने पर नए पंजीकरण चिह्न का आवंटन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब किसी राज्य में पंजीकृत मोटर वाहन को किसी अन्य राज्य में बारह माह से अधिक समय तक रखा गया हो, तो वाहन का स्वामी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर और ऐसे प्रपत्र में, जिसमें ऐसे विवरण हों, उस पंजीकरण प्राधिकारी को, जिसके अधिकार क्षेत्र में वाहन उस समय है, नए पंजीकरण चिह्न के आवंटन के लिए आवेदन करेगा और पंजीकरण प्रमाण पत्र उस पंजीकरण प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा:
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न होने चाहिए-
(i) धारा 48 के तहत प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र द्वारा, या
(ii) यदि ऐसा कोई प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया गया है, तो—
(क) धारा 48 की उपधारा (2) के तहत प्राप्त रसीद; या
(ख) वाहन के स्वामी द्वारा धारा 48 में निर्दिष्ट पंजीकरण प्राधिकारी को पंजीकृत डाक पावती के माध्यम से आवेदन भेजने पर प्राप्त डाक पावती।
इसके साथ ही इस बात की घोषणा भी करनी होगी कि उसे ऐसे किसी प्राधिकारी से कोई ऐसा पत्र प्राप्त नहीं हुआ है जिसमें ऐसा प्रमाण पत्र देने से इनकार किया गया हो या उसे ऐसे किसी निर्देश का पालन करने के लिए कहा गया हो जिसके अधीन ऐसा प्रमाण पत्र दिया जा सकता है:
इसके अलावा, यदि किसी मोटर वाहन को किराया-खरीद, पट्टा या बंधक समझौते के तहत रखा गया है, तो इस उपधारा के तहत आवेदन के साथ उस व्यक्ति से अनापत्ति प्रमाण पत्र संलग्न होना चाहिए जिसके साथ ऐसा समझौता किया गया है, और धारा 51 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, उस व्यक्ति से ऐसा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के संबंध में लागू होंगे जिसके साथ ऐसा समझौता किया गया है।
(2) पंजीकरण प्राधिकारी, जिसके समक्ष उपधारा (1) के अधीन आवेदन किया जाता है, धारा 62 के अधीन प्राप्त प्रतिलेखों (यदि कोई हो) का उचित सत्यापन करने के बाद, वाहन को धारा 41 की उपधारा (6) में निर्दिष्ट पंजीकरण चिह्न प्रदान करेगा, जिसे वाहन पर प्रदर्शित किया जाएगा और आवेदक को लौटाने से पहले पंजीकरण प्रमाण पत्र पर चिह्न अंकित करेगा तथा उस पंजीकरण प्राधिकारी से संपर्क करके, जिसके द्वारा वाहन पूर्व में पंजीकृत था, वाहन के पंजीकरण को उस पंजीकरण प्राधिकारी के अभिलेखों से अपने अभिलेखों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था करेगा।
(3) जहां कोई मोटर वाहन किराया-खरीद या पट्टा या बंधक समझौते के तहत धारित है, वहां पंजीकरण प्राधिकारी, उप-धारा (2) के तहत वाहन को पंजीकरण चिह्न आवंटित करने के बाद, उस व्यक्ति को सूचित करेगा जिसका नाम पंजीकरण प्रमाण पत्र में उस व्यक्ति के रूप में निर्दिष्ट किया गया है जिसके साथ पंजीकृत स्वामी ने किराया-खरीद या पट्टा या बंधक समझौता किया है (पंजीकरण प्रमाण पत्र में दर्ज ऐसे व्यक्ति के पते पर पंजीकृत डाक पावती द्वारा उक्त पंजीकरण चिह्न के आवंटन की सूचना भेजकर)।
(4) राज्य सरकार धारा 65 के तहत नियम बना सकती है, जिसके अनुसार राज्य में पंजीकृत न होने वाले किसी मोटर वाहन के स्वामी को, जो राज्य में लाया गया हो या उस समय राज्य में हो, राज्य में निर्धारित प्राधिकारी को मोटर वाहन और उसके पंजीकरण के संबंध में ऐसी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी, जैसी निर्धारित की जाए।
(5) यदि स्वामी निर्धारित अवधि के भीतर उप-धारा (1) के अंतर्गत आवेदन करने में विफल रहता है, तो पंजीकरण प्राधिकारी मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, धारा 177 के अंतर्गत उसके विरुद्ध की जाने वाली किसी भी कार्रवाई के बदले स्वामी से ऐसी राशि का भुगतान करने की मांग कर सकता है जो एक सौ रुपये से अधिक न हो, जैसा कि उप-धारा (7) के अंतर्गत निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि यदि स्वामी उक्त राशि का भुगतान करने में विफल रहता है तो उसके विरुद्ध धारा 177 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
(6) जहां स्वामी ने उपधारा (5) के अधीन राशि का भुगतान कर दिया है, वहां धारा 177 के तहत उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
(7) उपधारा (5) के प्रयोजनों के लिए, राज्य सरकार उपधारा (1) के तहत आवेदन करने में स्वामी की ओर से हुई देरी की अवधि को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग राशियाँ निर्धारित कर सकती है।
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न होने चाहिए-
(i) धारा 48 के तहत प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र द्वारा, या
(ii) यदि ऐसा कोई प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया गया है, तो—
(क) धारा 48 की उपधारा (2) के तहत प्राप्त रसीद; या
(ख) वाहन के स्वामी द्वारा धारा 48 में निर्दिष्ट पंजीकरण प्राधिकारी को पंजीकृत डाक पावती के माध्यम से आवेदन भेजने पर प्राप्त डाक पावती।
इसके साथ ही इस बात की घोषणा भी करनी होगी कि उसे ऐसे किसी प्राधिकारी से कोई ऐसा पत्र प्राप्त नहीं हुआ है जिसमें ऐसा प्रमाण पत्र देने से इनकार किया गया हो या उसे ऐसे किसी निर्देश का पालन करने के लिए कहा गया हो जिसके अधीन ऐसा प्रमाण पत्र दिया जा सकता है:
इसके अलावा, यदि किसी मोटर वाहन को किराया-खरीद, पट्टा या बंधक समझौते के तहत रखा गया है, तो इस उपधारा के तहत आवेदन के साथ उस व्यक्ति से अनापत्ति प्रमाण पत्र संलग्न होना चाहिए जिसके साथ ऐसा समझौता किया गया है, और धारा 51 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, उस व्यक्ति से ऐसा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के संबंध में लागू होंगे जिसके साथ ऐसा समझौता किया गया है।
(2) पंजीकरण प्राधिकारी, जिसके समक्ष उपधारा (1) के अधीन आवेदन किया जाता है, धारा 62 के अधीन प्राप्त प्रतिलेखों (यदि कोई हो) का उचित सत्यापन करने के बाद, वाहन को धारा 41 की उपधारा (6) में निर्दिष्ट पंजीकरण चिह्न प्रदान करेगा, जिसे वाहन पर प्रदर्शित किया जाएगा और आवेदक को लौटाने से पहले पंजीकरण प्रमाण पत्र पर चिह्न अंकित करेगा तथा उस पंजीकरण प्राधिकारी से संपर्क करके, जिसके द्वारा वाहन पूर्व में पंजीकृत था, वाहन के पंजीकरण को उस पंजीकरण प्राधिकारी के अभिलेखों से अपने अभिलेखों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था करेगा।
(3) जहां कोई मोटर वाहन किराया-खरीद या पट्टा या बंधक समझौते के तहत धारित है, वहां पंजीकरण प्राधिकारी, उप-धारा (2) के तहत वाहन को पंजीकरण चिह्न आवंटित करने के बाद, उस व्यक्ति को सूचित करेगा जिसका नाम पंजीकरण प्रमाण पत्र में उस व्यक्ति के रूप में निर्दिष्ट किया गया है जिसके साथ पंजीकृत स्वामी ने किराया-खरीद या पट्टा या बंधक समझौता किया है (पंजीकरण प्रमाण पत्र में दर्ज ऐसे व्यक्ति के पते पर पंजीकृत डाक पावती द्वारा उक्त पंजीकरण चिह्न के आवंटन की सूचना भेजकर)।
(4) राज्य सरकार धारा 65 के तहत नियम बना सकती है, जिसके अनुसार राज्य में पंजीकृत न होने वाले किसी मोटर वाहन के स्वामी को, जो राज्य में लाया गया हो या उस समय राज्य में हो, राज्य में निर्धारित प्राधिकारी को मोटर वाहन और उसके पंजीकरण के संबंध में ऐसी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी, जैसी निर्धारित की जाए।
(5) यदि स्वामी निर्धारित अवधि के भीतर उप-धारा (1) के अंतर्गत आवेदन करने में विफल रहता है, तो पंजीकरण प्राधिकारी मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, धारा 177 के अंतर्गत उसके विरुद्ध की जाने वाली किसी भी कार्रवाई के बदले स्वामी से ऐसी राशि का भुगतान करने की मांग कर सकता है जो एक सौ रुपये से अधिक न हो, जैसा कि उप-धारा (7) के अंतर्गत निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि यदि स्वामी उक्त राशि का भुगतान करने में विफल रहता है तो उसके विरुद्ध धारा 177 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
(6) जहां स्वामी ने उपधारा (5) के अधीन राशि का भुगतान कर दिया है, वहां धारा 177 के तहत उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
(7) उपधारा (5) के प्रयोजनों के लिए, राज्य सरकार उपधारा (1) के तहत आवेदन करने में स्वामी की ओर से हुई देरी की अवधि को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग राशियाँ निर्धारित कर सकती है।
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