MS Act 244अध्याय I · Wreck
धारा 244 · बीमा या अन्य वित्तीय सुरक्षा का रखरखाव।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) तीन सौ और उससे अधिक सकल टन भार वाले भारतीय पोत के प्रत्येक पंजीकृत स्वामी को इस अध्याय के अंतर्गत अपने दायित्व को कवर करने के उद्देश्य से अनिवार्य बीमा कवरेज या ऐसी अन्य वित्तीय सुरक्षा बनाए रखना आवश्यक होगा, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(2) तीन सौ और उससे अधिक सकल टन भार वाले भारतीय पोत के अलावा किसी अन्य पोत का प्रत्येक पोत स्वामी या संचालक, जब वह उस क्षेत्र में हो जिस पर यह अध्याय लागू होता है, तो उसे कन्वेंशन के तहत अपनी देयता को कवर करने के लिए बीमा कवरेज या अन्य वित्तीय सुरक्षा बनाए रखनी होगी और इस आशय का प्रमाण पत्र पोत पर रखना होगा।
(3) उपधारा ( 2 ) में निर्दिष्ट प्रमाण पत्र, यदि जहाज निम्नलिखित स्थिति में हो, तो...
(क) भारत में पंजीकृत, प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया जाएगा;
(ख) भारत के अलावा किसी अन्य सम्मेलन राज्य में पंजीकृत, उस राज्य की सरकार द्वारा या उसके अधिकार के तहत प्रदान किया जाएगा; और
(ग) किसी ऐसे राज्य में पंजीकृत जो कन्वेंशन राज्य नहीं है, उसे किसी कन्वेंशन राज्य द्वारा अधिकृत उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा प्रदान या प्रमाणित किया जाएगा।
(4) कोई भी जहाज जो उपधारा ( 2 ) के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे प्राधिकरण द्वारा हिरासत में लिया जा सकता है।
(5) इस अध्याय के अंतर्गत उत्पन्न होने वाले किसी भी लागत के दावे को पंजीकृत जहाज स्वामी के दायित्व के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने वाले बीमाकर्ता या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध सीधे लाया जा सकता है और ऐसे मामले में, बीमाकर्ता या ऐसा व्यक्ति उन बचावों (दिवालियापन या कंपनी के परिसमापन के अलावा) का सहारा ले सकता है जिनका सहारा पंजीकृत जहाज स्वामी ले सकता था, जिसमें इस अधिनियम के अंतर्गत प्रदान की गई देयता की सीमा भी शामिल है।
बशर्ते कि जहां पंजीकृत जहाज मालिक इस अधिनियम के तहत दायित्व की सीमा का हकदार नहीं है, वहां बीमाकर्ता या ऐसा व्यक्ति उपधारा ( 1 ) के तहत बनाए रखने के लिए आवश्यक बीमा या अन्य वित्तीय सुरक्षा की राशि के बराबर राशि तक दायित्व को सीमित कर सकता है।
इसके अलावा, बीमाकर्ता या ऐसा व्यक्ति यह बचाव प्रस्तुत कर सकता है कि समुद्री दुर्घटना पंजीकृत जहाज मालिक के जानबूझकर किए गए दुर्व्यवहार के परिणामस्वरूप हुई है, लेकिन वह किसी अन्य बचाव का सहारा नहीं ले सकता है जिसका सहारा बीमाकर्ता या व्यक्ति पंजीकृत जहाज मालिक द्वारा बीमाकर्ता या व्यक्ति के विरुद्ध लाई गई कार्यवाही में ले सकता था।
इसके अलावा, बीमाकर्ता या ऐसे व्यक्ति को पंजीकृत जहाज मालिक को ऐसी कार्यवाही में शामिल करने की मांग करने का अधिकार होगा।
(2) तीन सौ और उससे अधिक सकल टन भार वाले भारतीय पोत के अलावा किसी अन्य पोत का प्रत्येक पोत स्वामी या संचालक, जब वह उस क्षेत्र में हो जिस पर यह अध्याय लागू होता है, तो उसे कन्वेंशन के तहत अपनी देयता को कवर करने के लिए बीमा कवरेज या अन्य वित्तीय सुरक्षा बनाए रखनी होगी और इस आशय का प्रमाण पत्र पोत पर रखना होगा।
(3) उपधारा ( 2 ) में निर्दिष्ट प्रमाण पत्र, यदि जहाज निम्नलिखित स्थिति में हो, तो...
(क) भारत में पंजीकृत, प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया जाएगा;
(ख) भारत के अलावा किसी अन्य सम्मेलन राज्य में पंजीकृत, उस राज्य की सरकार द्वारा या उसके अधिकार के तहत प्रदान किया जाएगा; और
(ग) किसी ऐसे राज्य में पंजीकृत जो कन्वेंशन राज्य नहीं है, उसे किसी कन्वेंशन राज्य द्वारा अधिकृत उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा प्रदान या प्रमाणित किया जाएगा।
(4) कोई भी जहाज जो उपधारा ( 2 ) के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे प्राधिकरण द्वारा हिरासत में लिया जा सकता है।
(5) इस अध्याय के अंतर्गत उत्पन्न होने वाले किसी भी लागत के दावे को पंजीकृत जहाज स्वामी के दायित्व के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने वाले बीमाकर्ता या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध सीधे लाया जा सकता है और ऐसे मामले में, बीमाकर्ता या ऐसा व्यक्ति उन बचावों (दिवालियापन या कंपनी के परिसमापन के अलावा) का सहारा ले सकता है जिनका सहारा पंजीकृत जहाज स्वामी ले सकता था, जिसमें इस अधिनियम के अंतर्गत प्रदान की गई देयता की सीमा भी शामिल है।
बशर्ते कि जहां पंजीकृत जहाज मालिक इस अधिनियम के तहत दायित्व की सीमा का हकदार नहीं है, वहां बीमाकर्ता या ऐसा व्यक्ति उपधारा ( 1 ) के तहत बनाए रखने के लिए आवश्यक बीमा या अन्य वित्तीय सुरक्षा की राशि के बराबर राशि तक दायित्व को सीमित कर सकता है।
इसके अलावा, बीमाकर्ता या ऐसा व्यक्ति यह बचाव प्रस्तुत कर सकता है कि समुद्री दुर्घटना पंजीकृत जहाज मालिक के जानबूझकर किए गए दुर्व्यवहार के परिणामस्वरूप हुई है, लेकिन वह किसी अन्य बचाव का सहारा नहीं ले सकता है जिसका सहारा बीमाकर्ता या व्यक्ति पंजीकृत जहाज मालिक द्वारा बीमाकर्ता या व्यक्ति के विरुद्ध लाई गई कार्यवाही में ले सकता था।
इसके अलावा, बीमाकर्ता या ऐसे व्यक्ति को पंजीकृत जहाज मालिक को ऐसी कार्यवाही में शामिल करने की मांग करने का अधिकार होगा।
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