धारा 231 · आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि प्राप्त करने के इरादे से झूठे साक्ष्य देना या गढ़ना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जो कोई भी झूठी गवाही देता है या गढ़ता है, इस इरादे से कि ऐसा करने से किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया जाए, जो भारत में वर्तमान में लागू कानून के अनुसार मृत्युदंड योग्य नहीं है, बल्कि आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है, उसे उसी प्रकार दंडित किया जाएगा जैसे उस अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति को दंडित किया जाता है।
चित्रण।
A न्यायालय के समक्ष झूठी गवाही देता है, जिसका उद्देश्य Z को डकैती के अपराध में दोषी ठहराना होता है। डकैती की सज़ा आजीवन कारावास या दस वर्ष तक का कठोर कारावास है, जिसमें जुर्माना हो भी सकता है और नहीं भी। अतः A आजीवन कारावास या कारावास (जुर्माने के साथ या बिना) का पात्र है।
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A न्यायालय के समक्ष झूठी गवाही देता है, जिसका उद्देश्य Z को डकैती के अपराध में दोषी ठहराना होता है। डकैती की सज़ा आजीवन कारावास या दस वर्ष तक का कठोर कारावास है, जिसमें जुर्माना हो भी सकता है और नहीं भी। अतः A आजीवन कारावास या कारावास (जुर्माने के साथ या बिना) का पात्र है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- आजीवन कारावास
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 231IPC 195
195. Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of offence punishable with imprisonment for life or imprisonment.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
