धारा 115 · जानबूझकर चोट पहुंचाना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या इस ज्ञान के साथ कि वह किसी व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, कोई कार्य करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाता है, तो उसे “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना” कहा जाता है।
(2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या दस हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या दस हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 1 वर्ष
- जुर्माना
- ₹10,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 115IPC 321
321. Voluntarily causing hurt.
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