PSS Act 4अध्याय III · Authorisation of Payment Systems
धारा 4 · भुगतान प्रणाली बिना प्राधिकरण के संचालित नहीं होगी।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) भारतीय रिजर्व बैंक के अलावा कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्राधिकरण के अधीन और उसके अनुसार ही भुगतान प्रणाली शुरू या संचालित करेगा:
बशर्ते कि इस खंड में निहित कोई भी बात निम्नलिखित पर लागू नहीं होगी--
(क) इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर किसी मौजूदा भुगतान प्रणाली का संचालन, ऐसे प्रारंभ होने की तिथि से छह महीने से अधिक की अवधि तक जारी रहेगा, जब तक कि इस अवधि के भीतर, ऐसी भुगतान प्रणाली का संचालक इस अधिनियम के तहत प्राधिकरण प्राप्त न कर ले या इस अधिनियम की धारा 7 के तहत प्राधिकरण के लिए किया गया आवेदन रिजर्व बैंक द्वारा अस्वीकार न कर दिया जाए;
(ख) कोई भी व्यक्ति जो किसी अन्य व्यक्ति के विधिवत नियुक्त एजेंट के रूप में कार्य कर रहा हो, जिसे भुगतान देय है;
(ग) कोई कंपनी जो अपनी होल्डिंग कंपनी या उसकी किसी सहायक कंपनी से या किसी अन्य कंपनी से, जो उसी होल्डिंग कंपनी की सहायक कंपनी हो, भुगतान स्वीकार करती है;
(घ) कोई अन्य व्यक्ति जिसे रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के हितों या भुगतान प्रणालियों के कुशल संचालन, किसी भुगतान प्रणाली के आकार या किसी अन्य कारण से, अधिसूचना द्वारा, इस धारा के प्रावधानों से छूट दे सकता है।
(2) रिजर्व बैंक, इस धारा की उपधारा (1) के तहत, किसी कंपनी या निगम को बैंकों के मौजूदा क्लियरिंग हाउस या नए क्लियरिंग हाउस को संचालित या विनियमित करने के लिए अधिकृत कर सकता है ताकि पूरे देश में बैंकों के लिए एक समान खुदरा क्लियरिंग हाउस प्रणाली हो सके।
हालांकि, यह शर्त है कि ऐसी कंपनी या निगम की कम से कम इक्यावन प्रतिशत इक्विटी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पास होनी चाहिए।
स्पष्टीकरण।--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों" में "संगत नया बैंक", "भारतीय स्टेट बैंक" और "सहायक बैंक" शामिल होंगे, जैसा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 में परिभाषित है।
बशर्ते कि इस खंड में निहित कोई भी बात निम्नलिखित पर लागू नहीं होगी--
(क) इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर किसी मौजूदा भुगतान प्रणाली का संचालन, ऐसे प्रारंभ होने की तिथि से छह महीने से अधिक की अवधि तक जारी रहेगा, जब तक कि इस अवधि के भीतर, ऐसी भुगतान प्रणाली का संचालक इस अधिनियम के तहत प्राधिकरण प्राप्त न कर ले या इस अधिनियम की धारा 7 के तहत प्राधिकरण के लिए किया गया आवेदन रिजर्व बैंक द्वारा अस्वीकार न कर दिया जाए;
(ख) कोई भी व्यक्ति जो किसी अन्य व्यक्ति के विधिवत नियुक्त एजेंट के रूप में कार्य कर रहा हो, जिसे भुगतान देय है;
(ग) कोई कंपनी जो अपनी होल्डिंग कंपनी या उसकी किसी सहायक कंपनी से या किसी अन्य कंपनी से, जो उसी होल्डिंग कंपनी की सहायक कंपनी हो, भुगतान स्वीकार करती है;
(घ) कोई अन्य व्यक्ति जिसे रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के हितों या भुगतान प्रणालियों के कुशल संचालन, किसी भुगतान प्रणाली के आकार या किसी अन्य कारण से, अधिसूचना द्वारा, इस धारा के प्रावधानों से छूट दे सकता है।
(2) रिजर्व बैंक, इस धारा की उपधारा (1) के तहत, किसी कंपनी या निगम को बैंकों के मौजूदा क्लियरिंग हाउस या नए क्लियरिंग हाउस को संचालित या विनियमित करने के लिए अधिकृत कर सकता है ताकि पूरे देश में बैंकों के लिए एक समान खुदरा क्लियरिंग हाउस प्रणाली हो सके।
हालांकि, यह शर्त है कि ऐसी कंपनी या निगम की कम से कम इक्यावन प्रतिशत इक्विटी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पास होनी चाहिए।
स्पष्टीकरण।--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों" में "संगत नया बैंक", "भारतीय स्टेट बैंक" और "सहायक बैंक" शामिल होंगे, जैसा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 में परिभाषित है।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

