PSS Act 30अध्याय VII · Offences and Penalties
धारा 30 · छूट देने की शक्ति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
30. रिजर्व बैंक द्वारा दंड लगाने की शक्ति।-- (1) धारा 26 में किसी बात के होते हुए भी, यदि धारा 26 की उपधारा ( 2 ) [या उपधारा (3)] या उपधारा (6) में निर्दिष्ट प्रकृति का कोई उल्लंघन या चूक होती है, तो रिजर्व बैंक उल्लंघन करने वाले या चूक करने वाले व्यक्ति पर 3 [दस लाख] रुपये से अधिक का दंड या ऐसे उल्लंघन या चूक में शामिल राशि का दुगुना, जहाँ ऐसी राशि का निर्धारण किया जा सकता है, जो भी अधिक हो, लगा सकता है, और यदि ऐसा उल्लंघन या चूक निरंतर बनी रहती है, तो पहले उल्लंघन या चूक के बाद प्रत्येक दिन के लिए पच्चीस हजार रुपये तक का अतिरिक्त दंड लगाया जा सकता है, जिस दौरान उल्लंघन या चूक जारी रहती है।
(2) उपधारा (1) के अधीन दंड लगाने के उद्देश्य से, रिजर्व बैंक चूककर्ता को नोटिस जारी करेगा जिसमें उससे कारण बताने को कहा जाएगा कि नोटिस में निर्दिष्ट राशि दंड के रूप में क्यों नहीं लगाई जानी चाहिए और ऐसे चूककर्ता को सुनवाई का उचित अवसर भी दिया जाएगा।
(3) इस धारा के तहत रिजर्व बैंक द्वारा लगाया गया कोई भी जुर्माना, रिजर्व बैंक द्वारा जारी नोटिस के भुगतान की मांग करते हुए डिफ़ॉल्टर को तामील किए जाने की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर देय होगा, और यदि व्यक्ति इस अवधि के भीतर राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो डिफ़ॉल्टर कंपनी के पंजीकृत कार्यालय या व्यक्ति के आधिकारिक व्यवसाय के क्षेत्र में अधिकार क्षेत्र रखने वाले प्रधान सिविल न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश पर राशि वसूल की जा सकती है।
बशर्ते कि ऐसा कोई निर्देश केवल रिजर्व बैंक के किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा किए गए आवेदन पर ही दिया जाएगा।
(4) रिजर्व बैंक डिफ़ॉल्टर के चालू खाते (यदि कोई हो) से राशि डेबिट करके या डिफ़ॉल्टर के क्रेडिट में रखी प्रतिभूतियों को लिक्विडेट करके या इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार जुर्माने की राशि वसूल कर सकता है।
(5) उपधारा (3) के तहत निर्देश देने वाला न्यायालय चूककर्ता द्वारा देय राशि निर्दिष्ट करते हुए एक प्रमाण पत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाण पत्र उसी प्रकार लागू होगा जैसे कि किसी दीवानी मुकदमे में न्यायालय द्वारा दिया गया कोई निर्णय।
(6) यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी न्यायालय में उपधारा (2) या, जैसा भी मामला हो, धारा 26 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट प्रकृति के उल्लंघन या चूक के संबंध में कोई शिकायत दर्ज की गई हो, तो उस व्यक्ति पर इस धारा के अंतर्गत कोई दंड लगाने की कार्यवाही नहीं की जाएगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन दंड लगाने के उद्देश्य से, रिजर्व बैंक चूककर्ता को नोटिस जारी करेगा जिसमें उससे कारण बताने को कहा जाएगा कि नोटिस में निर्दिष्ट राशि दंड के रूप में क्यों नहीं लगाई जानी चाहिए और ऐसे चूककर्ता को सुनवाई का उचित अवसर भी दिया जाएगा।
(3) इस धारा के तहत रिजर्व बैंक द्वारा लगाया गया कोई भी जुर्माना, रिजर्व बैंक द्वारा जारी नोटिस के भुगतान की मांग करते हुए डिफ़ॉल्टर को तामील किए जाने की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर देय होगा, और यदि व्यक्ति इस अवधि के भीतर राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो डिफ़ॉल्टर कंपनी के पंजीकृत कार्यालय या व्यक्ति के आधिकारिक व्यवसाय के क्षेत्र में अधिकार क्षेत्र रखने वाले प्रधान सिविल न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश पर राशि वसूल की जा सकती है।
बशर्ते कि ऐसा कोई निर्देश केवल रिजर्व बैंक के किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा किए गए आवेदन पर ही दिया जाएगा।
(4) रिजर्व बैंक डिफ़ॉल्टर के चालू खाते (यदि कोई हो) से राशि डेबिट करके या डिफ़ॉल्टर के क्रेडिट में रखी प्रतिभूतियों को लिक्विडेट करके या इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार जुर्माने की राशि वसूल कर सकता है।
(5) उपधारा (3) के तहत निर्देश देने वाला न्यायालय चूककर्ता द्वारा देय राशि निर्दिष्ट करते हुए एक प्रमाण पत्र जारी करेगा और ऐसा प्रत्येक प्रमाण पत्र उसी प्रकार लागू होगा जैसे कि किसी दीवानी मुकदमे में न्यायालय द्वारा दिया गया कोई निर्णय।
(6) यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी न्यायालय में उपधारा (2) या, जैसा भी मामला हो, धारा 26 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट प्रकृति के उल्लंघन या चूक के संबंध में कोई शिकायत दर्ज की गई हो, तो उस व्यक्ति पर इस धारा के अंतर्गत कोई दंड लगाने की कार्यवाही नहीं की जाएगी।
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