PSS Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "बैंक" से तात्पर्य है,--
(i) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की द्वितीय अनुसूची में शामिल बैंक;
(ii) डाकघर बचत बैंक;
(iii) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 के खंड (सी) में परिभाषित बैंकिंग कंपनी;
(iv) एक सहकारी बैंक जैसा कि धारा 5 के खंड (सीसी) में परिभाषित है, जैसा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 56 द्वारा जोड़ा गया है; और
(v) ऐसा कोई अन्य बैंक जिसे रिजर्व बैंक अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निर्दिष्ट कर सकता है;
(ख) "डेरिवेटिव" से तात्पर्य किसी भविष्य की तिथि पर निपटाने योग्य साधन से है, जिसका मूल्य ब्याज दर, विदेशी मुद्रा दर, क्रेडिट रेटिंग या क्रेडिट सूचकांक, प्रतिभूतियों की कीमत (जिसे "अंतर्निहित" भी कहा जाता है), या किसी अन्य अंतर्निहित या इनमें से एक से अधिक के संयोजन में परिवर्तन से प्राप्त होता है और इसमें ब्याज दर स्वैप, फॉरवर्ड रेट एग्रीमेंट, विदेशी मुद्रा स्वैप, विदेशी मुद्रा रुपया स्वैप, विदेशी मुद्रा विकल्प, विदेशी मुद्रा रुपया विकल्प या कोई अन्य साधन शामिल हैं, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ग) "इलेक्ट्रॉनिक निधि हस्तांतरण" से तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा निर्देश, प्राधिकरण या आदेश के माध्यम से किसी बैंक को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उस बैंक में रखे गए खाते से डेबिट या क्रेडिट करने के लिए किए गए किसी भी निधि हस्तांतरण से है और इसमें प्वाइंट ऑफ सेल ट्रांसफर, स्वचालित टेलर मशीन लेनदेन, निधि का प्रत्यक्ष जमा या निकासी, टेलीफोन, इंटरनेट और कार्ड भुगतान द्वारा शुरू किए गए हस्तांतरण शामिल हैं;
(घ) "सकल निपटान प्रणाली" से तात्पर्य ऐसी भुगतान प्रणाली से है जिसमें निधियों या प्रतिभूतियों का प्रत्येक निपटान अलग-अलग या व्यक्तिगत निर्देशों के आधार पर होता है;
1 [(da) "जारीकर्ता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो समय-समय पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट कानूनी इकाई पहचानकर्ता या ऐसी अन्य विशिष्ट पहचान (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) जारी करता है;
(डीबी) "कानूनी इकाई पहचानकर्ता" से तात्पर्य किसी व्यक्ति को जारीकर्ता द्वारा ऐसे डेरिवेटिव या वित्तीय लेनदेन में उस व्यक्ति की पहचान करने के उद्देश्य से सौंपा गया एक अद्वितीय पहचान कोड है, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है;]
(ई) "नेटिंग" का अर्थ है सिस्टम प्रदाता द्वारा देय या भुगतान योग्य या सुपुर्दगी योग्य धनराशि या प्रतिभूतियों की राशि का निर्धारण, सिस्टम प्रतिभागियों के बीच भुगतान दायित्वों या सुपुर्दगी दायित्वों को समायोजित करने या समायोजित करने के परिणामस्वरूप, जिसमें सिस्टम प्रदाता द्वारा किसी सिस्टम प्रतिभागी की दिवालियापन या विघटन या समापन या ऐसी अन्य परिस्थितियों से उत्पन्न होने वाले दावे और दायित्व शामिल हैं, जिन्हें सिस्टम प्रदाता अपने नियमों या विनियमों या उप-नियमों (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) में निर्दिष्ट कर सकता है, भविष्य की तिथि पर निपटान के लिए स्वीकृत लेनदेन के संबंध में, ताकि केवल शुद्ध दावा मांगा जाए या शुद्ध दायित्व ही माना जाए;
(f) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है;
(g) "भुगतान निर्देश" से तात्पर्य किसी भी रूप में, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों सहित, भुगतान करने हेतु जारी किए गए किसी भी उपकरण, प्राधिकरण या आदेश से है,--
(i) किसी व्यक्ति द्वारा किसी सिस्टम प्रतिभागी को; या
(ii) एक सिस्टम प्रतिभागी द्वारा दूसरे सिस्टम प्रतिभागी को;
(h) "भुगतान दायित्व" से तात्पर्य एक प्रणाली प्रतिभागी द्वारा दूसरे प्रणाली प्रतिभागी को निधियों, प्रतिभूतियों या विदेशी मुद्रा या डेरिवेटिव या अन्य लेनदेन से संबंधित एक या अधिक भुगतान निर्देशों के समाशोधन या निपटान के परिणामस्वरूप देय ऋण से है;
(i) "भुगतान प्रणाली" से तात्पर्य ऐसी प्रणाली से है जो भुगतानकर्ता और लाभार्थी के बीच भुगतान को प्रभावी बनाने में सक्षम बनाती है, जिसमें समाशोधन, भुगतान या निपटान सेवा या ये सभी शामिल हैं, लेकिन इसमें स्टॉक एक्सचेंज शामिल नहीं है।
स्पष्टीकरण .--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "भुगतान प्रणाली" में क्रेडिट कार्ड संचालन, डेबिट कार्ड संचालन, स्मार्ट कार्ड संचालन, धन हस्तांतरण संचालन या इसी तरह के संचालन को सक्षम करने वाली प्रणालियाँ शामिल हैं;
(j) "निर्धारित" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों द्वारा निर्धारित से है;
(k) "विनियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाया गया विनियम है;
(एल) "रिजर्व बैंक" से तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का अधिनियम 2) के तहत गठित भारतीय रिजर्व बैंक से है;
(m) "प्रतिभूतियाँ" से तात्पर्य लोक ऋण अधिनियम, 1944 (18 ऑफ 1944) में परिभाषित सरकारी प्रतिभूतियों से है, या ऐसी अन्य प्रतिभूतियों से है जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर उस अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित किया जा सकता है;
(n) "निपटान" का अर्थ है भुगतान निर्देशों का निपटान और इसमें प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा या डेरिवेटिव या अन्य लेनदेन का निपटान शामिल है जिसमें भुगतान दायित्व शामिल होते हैं;
(o) "प्रणालीगत जोखिम" से तात्पर्य निम्नलिखित से उत्पन्न होने वाले जोखिम से है--
(i) भुगतान प्रणाली के अंतर्गत किसी प्रणाली प्रतिभागी द्वारा अपने भुगतान दायित्वों को समय पर पूरा करने में असमर्थता; या
(ii) प्रणाली में कोई व्यवधान,
जिसके कारण अन्य प्रतिभागी समय पर अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल हो सकते हैं और इससे प्रणाली की स्थिरता पर प्रभाव पड़ने की संभावना है:
बशर्ते कि यदि किसी विशेष जोखिम से प्रणाली की स्थिरता पर प्रभाव पड़ने की संभावना के संबंध में कोई संदेह या मतभेद उत्पन्न होता है, तो रिजर्व बैंक का निर्णय अंतिम होगा;
(पी) "सिस्टम प्रतिभागी" से तात्पर्य किसी भुगतान प्रणाली में भाग लेने वाले बैंक या किसी अन्य व्यक्ति से है और इसमें सिस्टम प्रदाता भी शामिल है;
(q) "सिस्टम प्रदाता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो अधिकृत भुगतान प्रणाली का संचालन करता है;
3 [(आर) "व्यापार भंडार" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो समय-समय पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट किए गए ऐसे डेरिवेटिव या वित्तीय लेनदेन से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों या डेटा को एकत्र करने, संकलित करने, संग्रहीत करने, बनाए रखने, संसाधित करने या प्रसारित करने के व्यवसाय में संलग्न है।]
(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त, लेकिन परिभाषित नहीं किए गए शब्द और अभिव्यक्तियाँ, तथा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) या बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) में परिभाषित किए गए शब्द और अभिव्यक्तियाँ, उन अधिनियमों में क्रमशः उन्हें दिए गए अर्थों के अनुसार होंगी।
(क) "बैंक" से तात्पर्य है,--
(i) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की द्वितीय अनुसूची में शामिल बैंक;
(ii) डाकघर बचत बैंक;
(iii) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 के खंड (सी) में परिभाषित बैंकिंग कंपनी;
(iv) एक सहकारी बैंक जैसा कि धारा 5 के खंड (सीसी) में परिभाषित है, जैसा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 56 द्वारा जोड़ा गया है; और
(v) ऐसा कोई अन्य बैंक जिसे रिजर्व बैंक अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निर्दिष्ट कर सकता है;
(ख) "डेरिवेटिव" से तात्पर्य किसी भविष्य की तिथि पर निपटाने योग्य साधन से है, जिसका मूल्य ब्याज दर, विदेशी मुद्रा दर, क्रेडिट रेटिंग या क्रेडिट सूचकांक, प्रतिभूतियों की कीमत (जिसे "अंतर्निहित" भी कहा जाता है), या किसी अन्य अंतर्निहित या इनमें से एक से अधिक के संयोजन में परिवर्तन से प्राप्त होता है और इसमें ब्याज दर स्वैप, फॉरवर्ड रेट एग्रीमेंट, विदेशी मुद्रा स्वैप, विदेशी मुद्रा रुपया स्वैप, विदेशी मुद्रा विकल्प, विदेशी मुद्रा रुपया विकल्प या कोई अन्य साधन शामिल हैं, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ग) "इलेक्ट्रॉनिक निधि हस्तांतरण" से तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा निर्देश, प्राधिकरण या आदेश के माध्यम से किसी बैंक को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उस बैंक में रखे गए खाते से डेबिट या क्रेडिट करने के लिए किए गए किसी भी निधि हस्तांतरण से है और इसमें प्वाइंट ऑफ सेल ट्रांसफर, स्वचालित टेलर मशीन लेनदेन, निधि का प्रत्यक्ष जमा या निकासी, टेलीफोन, इंटरनेट और कार्ड भुगतान द्वारा शुरू किए गए हस्तांतरण शामिल हैं;
(घ) "सकल निपटान प्रणाली" से तात्पर्य ऐसी भुगतान प्रणाली से है जिसमें निधियों या प्रतिभूतियों का प्रत्येक निपटान अलग-अलग या व्यक्तिगत निर्देशों के आधार पर होता है;
1 [(da) "जारीकर्ता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो समय-समय पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट कानूनी इकाई पहचानकर्ता या ऐसी अन्य विशिष्ट पहचान (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) जारी करता है;
(डीबी) "कानूनी इकाई पहचानकर्ता" से तात्पर्य किसी व्यक्ति को जारीकर्ता द्वारा ऐसे डेरिवेटिव या वित्तीय लेनदेन में उस व्यक्ति की पहचान करने के उद्देश्य से सौंपा गया एक अद्वितीय पहचान कोड है, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है;]
(ई) "नेटिंग" का अर्थ है सिस्टम प्रदाता द्वारा देय या भुगतान योग्य या सुपुर्दगी योग्य धनराशि या प्रतिभूतियों की राशि का निर्धारण, सिस्टम प्रतिभागियों के बीच भुगतान दायित्वों या सुपुर्दगी दायित्वों को समायोजित करने या समायोजित करने के परिणामस्वरूप, जिसमें सिस्टम प्रदाता द्वारा किसी सिस्टम प्रतिभागी की दिवालियापन या विघटन या समापन या ऐसी अन्य परिस्थितियों से उत्पन्न होने वाले दावे और दायित्व शामिल हैं, जिन्हें सिस्टम प्रदाता अपने नियमों या विनियमों या उप-नियमों (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) में निर्दिष्ट कर सकता है, भविष्य की तिथि पर निपटान के लिए स्वीकृत लेनदेन के संबंध में, ताकि केवल शुद्ध दावा मांगा जाए या शुद्ध दायित्व ही माना जाए;
(f) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है;
(g) "भुगतान निर्देश" से तात्पर्य किसी भी रूप में, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों सहित, भुगतान करने हेतु जारी किए गए किसी भी उपकरण, प्राधिकरण या आदेश से है,--
(i) किसी व्यक्ति द्वारा किसी सिस्टम प्रतिभागी को; या
(ii) एक सिस्टम प्रतिभागी द्वारा दूसरे सिस्टम प्रतिभागी को;
(h) "भुगतान दायित्व" से तात्पर्य एक प्रणाली प्रतिभागी द्वारा दूसरे प्रणाली प्रतिभागी को निधियों, प्रतिभूतियों या विदेशी मुद्रा या डेरिवेटिव या अन्य लेनदेन से संबंधित एक या अधिक भुगतान निर्देशों के समाशोधन या निपटान के परिणामस्वरूप देय ऋण से है;
(i) "भुगतान प्रणाली" से तात्पर्य ऐसी प्रणाली से है जो भुगतानकर्ता और लाभार्थी के बीच भुगतान को प्रभावी बनाने में सक्षम बनाती है, जिसमें समाशोधन, भुगतान या निपटान सेवा या ये सभी शामिल हैं, लेकिन इसमें स्टॉक एक्सचेंज शामिल नहीं है।
स्पष्टीकरण .--इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "भुगतान प्रणाली" में क्रेडिट कार्ड संचालन, डेबिट कार्ड संचालन, स्मार्ट कार्ड संचालन, धन हस्तांतरण संचालन या इसी तरह के संचालन को सक्षम करने वाली प्रणालियाँ शामिल हैं;
(j) "निर्धारित" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों द्वारा निर्धारित से है;
(k) "विनियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाया गया विनियम है;
(एल) "रिजर्व बैंक" से तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का अधिनियम 2) के तहत गठित भारतीय रिजर्व बैंक से है;
(m) "प्रतिभूतियाँ" से तात्पर्य लोक ऋण अधिनियम, 1944 (18 ऑफ 1944) में परिभाषित सरकारी प्रतिभूतियों से है, या ऐसी अन्य प्रतिभूतियों से है जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर उस अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित किया जा सकता है;
(n) "निपटान" का अर्थ है भुगतान निर्देशों का निपटान और इसमें प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा या डेरिवेटिव या अन्य लेनदेन का निपटान शामिल है जिसमें भुगतान दायित्व शामिल होते हैं;
(o) "प्रणालीगत जोखिम" से तात्पर्य निम्नलिखित से उत्पन्न होने वाले जोखिम से है--
(i) भुगतान प्रणाली के अंतर्गत किसी प्रणाली प्रतिभागी द्वारा अपने भुगतान दायित्वों को समय पर पूरा करने में असमर्थता; या
(ii) प्रणाली में कोई व्यवधान,
जिसके कारण अन्य प्रतिभागी समय पर अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल हो सकते हैं और इससे प्रणाली की स्थिरता पर प्रभाव पड़ने की संभावना है:
बशर्ते कि यदि किसी विशेष जोखिम से प्रणाली की स्थिरता पर प्रभाव पड़ने की संभावना के संबंध में कोई संदेह या मतभेद उत्पन्न होता है, तो रिजर्व बैंक का निर्णय अंतिम होगा;
(पी) "सिस्टम प्रतिभागी" से तात्पर्य किसी भुगतान प्रणाली में भाग लेने वाले बैंक या किसी अन्य व्यक्ति से है और इसमें सिस्टम प्रदाता भी शामिल है;
(q) "सिस्टम प्रदाता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो अधिकृत भुगतान प्रणाली का संचालन करता है;
3 [(आर) "व्यापार भंडार" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो समय-समय पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट किए गए ऐसे डेरिवेटिव या वित्तीय लेनदेन से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों या डेटा को एकत्र करने, संकलित करने, संग्रहीत करने, बनाए रखने, संसाधित करने या प्रसारित करने के व्यवसाय में संलग्न है।]
(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त, लेकिन परिभाषित नहीं किए गए शब्द और अभिव्यक्तियाँ, तथा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) या बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) में परिभाषित किए गए शब्द और अभिव्यक्तियाँ, उन अधिनियमों में क्रमशः उन्हें दिए गए अर्थों के अनुसार होंगी।
इस धारा पर आपका निजी नोट
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