PSS Act 23Aअध्याय V · Rights and Duties of a System Provider
धारा 23A · ग्राहकों से एकत्रित धन की सुरक्षा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [ 23ए.--ग्राहकों से एकत्रित निधियों का संरक्षण। (1) भारतीय रिज़र्व बैंक, जनहित में या निर्दिष्ट भुगतान प्रणालियों के ग्राहकों के हित में या ऐसी निर्दिष्ट भुगतान प्रणाली के कार्यों को उसके ग्राहकों के हितों के प्रतिकूल तरीके से संचालित होने से रोकने के लिए, ऐसी भुगतान प्रणाली के प्रणाली प्रदाता से यह अपेक्षा कर सकता है कि--
(क) अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में रखे गए एक अलग खाते या खातों में जमा करना और जमा रखना; या
(ख) समय-समय पर निर्दिष्ट तरीके और स्वरूप में तरल परिसंपत्तियों का रखरखाव करना।
निर्दिष्ट भुगतान प्रणाली के प्रदाता द्वारा अपने ग्राहकों से एकत्रित की गई और बकाया राशि के ऐसे प्रतिशत के बराबर राशि, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है:
बशर्ते कि रिजर्व बैंक विभिन्न श्रेणियों की निर्दिष्ट भुगतान प्रणालियों के लिए अलग-अलग प्रतिशत और तरीके तथा प्रपत्र निर्दिष्ट कर सकता है।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट खाते या खातों में रखी शेष राशि का उपयोग ग्राहकों द्वारा भुगतान सेवा के उपयोग के कारण उत्पन्न होने वाले दायित्वों के निर्वहन या ग्राहकों को पुनर्भुगतान करने या ऐसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(3) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949), या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) 2 [या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016] या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, उप-धारा (2) के तहत भुगतान प्राप्त करने के हकदार व्यक्तियों को उस खाते में रखी शेष राशि पर प्रथम और सर्वोपरि प्रभार होगा और नामित भुगतान प्रणाली के सिस्टम प्रदाता या संबंधित अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक का परिसमापक या रिसीवर या असाइनी (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए), चाहे अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया हो या अन्यथा, उक्त शेष राशि का उपयोग किसी अन्य प्रयोजन के लिए तब तक नहीं करेगा जब तक कि ऐसे सभी व्यक्तियों को पूर्ण भुगतान नहीं कर दिया जाता या उसके लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं कर दिया जाता।
स्पष्टीकरण .--इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्तियाँ--
(क) "निर्दिष्ट भुगतान प्रणाली" से तात्पर्य भुगतान प्रणाली या भुगतान प्रणाली के वर्ग से है, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है, जो भुगतान सेवा प्रदान करने के लिए अपने ग्राहकों से धन संग्रह करने में लगी हो;
(ख) "अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक" से तात्पर्य "बैंकिंग कंपनी", "संवादित नया बैंक", "भारतीय स्टेट बैंक" और "सहायक बैंक" से है, जैसा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 में परिभाषित है और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की दूसरी अनुसूची में शामिल है।]
(क) अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में रखे गए एक अलग खाते या खातों में जमा करना और जमा रखना; या
(ख) समय-समय पर निर्दिष्ट तरीके और स्वरूप में तरल परिसंपत्तियों का रखरखाव करना।
निर्दिष्ट भुगतान प्रणाली के प्रदाता द्वारा अपने ग्राहकों से एकत्रित की गई और बकाया राशि के ऐसे प्रतिशत के बराबर राशि, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है:
बशर्ते कि रिजर्व बैंक विभिन्न श्रेणियों की निर्दिष्ट भुगतान प्रणालियों के लिए अलग-अलग प्रतिशत और तरीके तथा प्रपत्र निर्दिष्ट कर सकता है।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट खाते या खातों में रखी शेष राशि का उपयोग ग्राहकों द्वारा भुगतान सेवा के उपयोग के कारण उत्पन्न होने वाले दायित्वों के निर्वहन या ग्राहकों को पुनर्भुगतान करने या ऐसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(3) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949), या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) 2 [या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016] या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, उप-धारा (2) के तहत भुगतान प्राप्त करने के हकदार व्यक्तियों को उस खाते में रखी शेष राशि पर प्रथम और सर्वोपरि प्रभार होगा और नामित भुगतान प्रणाली के सिस्टम प्रदाता या संबंधित अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक का परिसमापक या रिसीवर या असाइनी (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए), चाहे अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया हो या अन्यथा, उक्त शेष राशि का उपयोग किसी अन्य प्रयोजन के लिए तब तक नहीं करेगा जब तक कि ऐसे सभी व्यक्तियों को पूर्ण भुगतान नहीं कर दिया जाता या उसके लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं कर दिया जाता।
स्पष्टीकरण .--इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्तियाँ--
(क) "निर्दिष्ट भुगतान प्रणाली" से तात्पर्य भुगतान प्रणाली या भुगतान प्रणाली के वर्ग से है, जैसा कि रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है, जो भुगतान सेवा प्रदान करने के लिए अपने ग्राहकों से धन संग्रह करने में लगी हो;
(ख) "अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक" से तात्पर्य "बैंकिंग कंपनी", "संवादित नया बैंक", "भारतीय स्टेट बैंक" और "सहायक बैंक" से है, जैसा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) की धारा 5 में परिभाषित है और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की दूसरी अनुसूची में शामिल है।]
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