PSS Act 26अध्याय VII · Offences and Penalties
धारा 26 · दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि कोई व्यक्ति धारा 4 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है या धारा 7 के अधीन जारी किए गए प्राधिकरण की शर्तों और नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे कम से कम एक माह से दस वर्ष तक के कारावास या एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा, और उल्लंघन या अनुपालन में विफलता जारी रहने वाले प्रत्येक दिन के लिए एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जाएगा।
(2) जो कोई भी प्राधिकरण हेतु किसी आवेदन में, या किसी प्रतिपूर्ति या अन्य दस्तावेज में, या इस अधिनियम के किसी प्रावधान के तहत, या उसके प्रयोजन के लिए, प्रस्तुत की जाने वाली किसी सूचना में जानबूझकर कोई ऐसा कथन करता है जो किसी महत्वपूर्ण विवरण में असत्य हो, यह जानते हुए कि वह असत्य है, या जानबूझकर कोई महत्वपूर्ण कथन करने से चूक जाता है, तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर कम से कम दस लाख रुपये और अधिकतम पचास लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
(3) यदि कोई व्यक्ति कोई विवरण, सूचना, प्रतिफल या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहता है, या कोई विवरण, सूचना, प्रतिफल या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहता है, जिसे धारा 12 या धारा 13 के तहत प्रस्तुत करना उसका कर्तव्य है, या भुगतान प्रणाली के संचालन से संबंधित किसी प्रश्न का उत्तर देने में विफल रहता है, जिसकी आवश्यकता धारा 14 के तहत निरीक्षण करने वाले अधिकारी को होती है, तो वह धारा 30 के प्रावधानों के अनुसार लगाए जाने वाले दंड का भागी होगा।
(4) यदि कोई व्यक्ति ऐसी कोई सूचना प्रकट करता है, जिसका प्रकटीकरण धारा 22 के अधीन निषिद्ध है, तो उसे छह माह तक के कारावास या पाँच लाख रुपये तक के जुर्माने या ऐसे प्रकटीकरण के कृत्य से हुए नुकसान की राशि के दोगुने के बराबर राशि, जो भी अधिक हो, से दंडित किया जाएगा।
(5) यदि इस अधिनियम के अंतर्गत जारी किसी निर्देश का अनुपालन रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर नहीं किया जाता है, या यदि ऐसी कोई अवधि निर्धारित नहीं है, तो उचित समय के भीतर नहीं किया जाता है, या यदि धारा 30 के अंतर्गत रिजर्व बैंक द्वारा लगाया गया जुर्माना आदेश की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर अदा नहीं किया जाता है, तो निर्देश का अनुपालन करने या जुर्माना अदा करने में विफल रहने वाले सिस्टम प्रदाता या सिस्टम भागीदार को कम से कम एक माह से लेकर दस वर्ष तक के कारावास या एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा, और यदि निर्देश का अनुपालन न करना जारी रहता है, तो उल्लंघन जारी रहने वाले प्रत्येक दिन के लिए एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।
(6) यदि इस अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन किया जाता है, या इस अधिनियम की किसी अन्य आवश्यकता, या इसके अंतर्गत बनाए गए या दिए गए किसी नियम, आदेश या निर्देश, या लगाई गई किसी शर्त का पालन करने में चूक की जाती है, जिसके संबंध में कोई दंड निर्दिष्ट नहीं किया गया है, तो ऐसे उल्लंघन या चूक का दोषी व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, धारा 30 के प्रावधानों के अनुसार लगाए जाने वाले दंड के लिए उत्तरदायी होगा।
(2) जो कोई भी प्राधिकरण हेतु किसी आवेदन में, या किसी प्रतिपूर्ति या अन्य दस्तावेज में, या इस अधिनियम के किसी प्रावधान के तहत, या उसके प्रयोजन के लिए, प्रस्तुत की जाने वाली किसी सूचना में जानबूझकर कोई ऐसा कथन करता है जो किसी महत्वपूर्ण विवरण में असत्य हो, यह जानते हुए कि वह असत्य है, या जानबूझकर कोई महत्वपूर्ण कथन करने से चूक जाता है, तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर कम से कम दस लाख रुपये और अधिकतम पचास लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
(3) यदि कोई व्यक्ति कोई विवरण, सूचना, प्रतिफल या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहता है, या कोई विवरण, सूचना, प्रतिफल या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहता है, जिसे धारा 12 या धारा 13 के तहत प्रस्तुत करना उसका कर्तव्य है, या भुगतान प्रणाली के संचालन से संबंधित किसी प्रश्न का उत्तर देने में विफल रहता है, जिसकी आवश्यकता धारा 14 के तहत निरीक्षण करने वाले अधिकारी को होती है, तो वह धारा 30 के प्रावधानों के अनुसार लगाए जाने वाले दंड का भागी होगा।
(4) यदि कोई व्यक्ति ऐसी कोई सूचना प्रकट करता है, जिसका प्रकटीकरण धारा 22 के अधीन निषिद्ध है, तो उसे छह माह तक के कारावास या पाँच लाख रुपये तक के जुर्माने या ऐसे प्रकटीकरण के कृत्य से हुए नुकसान की राशि के दोगुने के बराबर राशि, जो भी अधिक हो, से दंडित किया जाएगा।
(5) यदि इस अधिनियम के अंतर्गत जारी किसी निर्देश का अनुपालन रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर नहीं किया जाता है, या यदि ऐसी कोई अवधि निर्धारित नहीं है, तो उचित समय के भीतर नहीं किया जाता है, या यदि धारा 30 के अंतर्गत रिजर्व बैंक द्वारा लगाया गया जुर्माना आदेश की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर अदा नहीं किया जाता है, तो निर्देश का अनुपालन करने या जुर्माना अदा करने में विफल रहने वाले सिस्टम प्रदाता या सिस्टम भागीदार को कम से कम एक माह से लेकर दस वर्ष तक के कारावास या एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा, और यदि निर्देश का अनुपालन न करना जारी रहता है, तो उल्लंघन जारी रहने वाले प्रत्येक दिन के लिए एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।
(6) यदि इस अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन किया जाता है, या इस अधिनियम की किसी अन्य आवश्यकता, या इसके अंतर्गत बनाए गए या दिए गए किसी नियम, आदेश या निर्देश, या लगाई गई किसी शर्त का पालन करने में चूक की जाती है, जिसके संबंध में कोई दंड निर्दिष्ट नहीं किया गया है, तो ऐसे उल्लंघन या चूक का दोषी व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, धारा 30 के प्रावधानों के अनुसार लगाए जाने वाले दंड के लिए उत्तरदायी होगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 10 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 1 माह
- जुर्माना
- ₹1,00,00,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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