PSS Act 23अध्याय V · Rights and Duties of a System Provider
धारा 23 · निपटान और जाल बिछाना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) सिस्टम प्रतिभागियों के बीच भुगतान दायित्व और निपटान निर्देश, भुगतान प्रणाली 1 को प्राधिकरण जारी करते समय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित सकल या नेटिंग प्रक्रिया के अनुसार निर्धारित किए जाएंगे [धारा 7 के तहत, या, इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के तहत इसके द्वारा अनुमोदित ऐसी सकल या नेटिंग प्रक्रिया के अनुसार]।
(2) जहां भुगतान प्रणाली के संचालन के लिए निर्धारित नियमों में प्रणाली प्रतिभागियों और भुगतान प्रणाली के बीच हानियों के वितरण की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है, तो ऐसी प्रक्रिया किसी अन्य कानून में इसके विपरीत किसी भी प्रावधान के बावजूद प्रभावी होगी।
(3) ऐसी प्रक्रिया के तहत किया गया समझौता अंतिम और अपरिवर्तनीय होगा।
2 [(4) जहाँ, किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के आदेश द्वारा--
(क) किसी प्रणाली भागीदार को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है या उसे भंग कर दिया जाता है या उसका परिसमापन कर दिया जाता है; या
(ख) किसी प्रणाली भागीदार के दिवालियापन, विघटन या समापन से संबंधित कार्यवाही में किसी परिसमापक या रिसीवर या असाइनी (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए), चाहे वह अस्थायी हो या अन्यथा, की नियुक्ति की जाती है।
तब, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) 3 [या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016] या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, ऐसा आदेश किसी भी ऐसे निपटान को प्रभावित नहीं करेगा जो ऐसे आदेश से पहले या उसके तुरंत बाद अंतिम और अपरिवर्तनीय हो गया हो, और सिस्टम प्रदाता का सिस्टम प्रतिभागियों द्वारा अपने निपटान या अन्य दायित्वों के लिए नियमों, विनियमों या उप-नियमों के अनुसार सिस्टम प्रदाता से संबंधित किसी भी संपार्श्विक को विनियोजित करने का अधिकार बना रहेगा।
4 [(5) जहां उप-धारा (4) में निर्दिष्ट आदेश किसी केंद्रीय प्रतिपक्ष के संबंध में दिया जाता है, तो ऐसे आदेश या बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2015) 3 [या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016] या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, केंद्रीय प्रतिपक्ष और सिस्टम प्रतिभागियों के बीच भुगतान दायित्व और निपटान निर्देश, जिनमें भविष्य की तिथि पर निपटान के लिए स्वीकृत लेनदेन से उत्पन्न होने वाले भी शामिल हैं, ऐसे केंद्रीय प्रतिपक्ष द्वारा सकल या नेटिंग प्रक्रिया के अनुसार, जैसा भी मामला हो, तत्काल निर्धारित किए जाएंगे, जिसे रिजर्व बैंक द्वारा प्राधिकरण जारी करते समय या इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के तहत अनुमोदित किया गया हो, और ऐसा निर्धारण अंतिम और अपरिवर्तनीय होगा।
(6) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) 3 [या दिवालियापन और दिवालिया संहिता, 2016] या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, केंद्रीय प्रतिपक्ष का परिसमापक या रिसीवर या असाइनी (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए), चाहे अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया हो या अन्यथा, निम्नलिखित कार्य करेगा--
(क) किसी ऐसे निर्णय को पुनः न खोलें जो अंतिम और अपरिवर्तनीय हो चुका हो;
(ख) केंद्रीय प्रतिपक्ष के नियमों, विनियमों या उपनियमों के अनुसार, प्रणाली प्रतिभागियों द्वारा अपने निपटान या अन्य दायित्वों के लिए प्रदान की गई संपार्श्विक संपत्तियों का विनियोजन करने के बाद, अतिरिक्त रखी गई संपार्श्विक संपत्तियों को संबंधित प्रणाली प्रतिभागियों को लौटा दें।]
5 [स्पष्टीकरण 1].-- संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस खंड में संदर्भित निपटान, चाहे सकल हो या शुद्ध, अंतिम और अपरिवर्तनीय है जैसे ही ऐसे निपटान के परिणामस्वरूप देय धन, प्रतिभूतियां, विदेशी मुद्रा या डेरिवेटिव या अन्य लेनदेन निर्धारित हो जाते हैं, चाहे ऐसा धन, प्रतिभूतियां या विदेशी मुद्रा या डेरिवेटिव या अन्य लेनदेन वास्तव में भुगतान किया गया हो या नहीं।
6 [ स्पष्टीकरण 2].--इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "केंद्रीय प्रतिपक्ष" अभिव्यक्ति का अर्थ एक प्रणाली प्रदाता है जो निपटान के लिए स्वीकृत लेन-देन में प्रणाली प्रतिभागियों के बीच नवीकरण के माध्यम से मध्यस्थता करता है, जिससे वह प्रत्येक विक्रेता का क्रेता और प्रत्येक क्रेता का विक्रेता बन जाता है, ताकि उनके लेन-देन का निपटान किया जा सके।]
(2) जहां भुगतान प्रणाली के संचालन के लिए निर्धारित नियमों में प्रणाली प्रतिभागियों और भुगतान प्रणाली के बीच हानियों के वितरण की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है, तो ऐसी प्रक्रिया किसी अन्य कानून में इसके विपरीत किसी भी प्रावधान के बावजूद प्रभावी होगी।
(3) ऐसी प्रक्रिया के तहत किया गया समझौता अंतिम और अपरिवर्तनीय होगा।
2 [(4) जहाँ, किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के आदेश द्वारा--
(क) किसी प्रणाली भागीदार को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है या उसे भंग कर दिया जाता है या उसका परिसमापन कर दिया जाता है; या
(ख) किसी प्रणाली भागीदार के दिवालियापन, विघटन या समापन से संबंधित कार्यवाही में किसी परिसमापक या रिसीवर या असाइनी (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए), चाहे वह अस्थायी हो या अन्यथा, की नियुक्ति की जाती है।
तब, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) 3 [या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016] या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, ऐसा आदेश किसी भी ऐसे निपटान को प्रभावित नहीं करेगा जो ऐसे आदेश से पहले या उसके तुरंत बाद अंतिम और अपरिवर्तनीय हो गया हो, और सिस्टम प्रदाता का सिस्टम प्रतिभागियों द्वारा अपने निपटान या अन्य दायित्वों के लिए नियमों, विनियमों या उप-नियमों के अनुसार सिस्टम प्रदाता से संबंधित किसी भी संपार्श्विक को विनियोजित करने का अधिकार बना रहेगा।
4 [(5) जहां उप-धारा (4) में निर्दिष्ट आदेश किसी केंद्रीय प्रतिपक्ष के संबंध में दिया जाता है, तो ऐसे आदेश या बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2015) 3 [या दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016] या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, केंद्रीय प्रतिपक्ष और सिस्टम प्रतिभागियों के बीच भुगतान दायित्व और निपटान निर्देश, जिनमें भविष्य की तिथि पर निपटान के लिए स्वीकृत लेनदेन से उत्पन्न होने वाले भी शामिल हैं, ऐसे केंद्रीय प्रतिपक्ष द्वारा सकल या नेटिंग प्रक्रिया के अनुसार, जैसा भी मामला हो, तत्काल निर्धारित किए जाएंगे, जिसे रिजर्व बैंक द्वारा प्राधिकरण जारी करते समय या इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के तहत अनुमोदित किया गया हो, और ऐसा निर्धारण अंतिम और अपरिवर्तनीय होगा।
(6) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) या कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) 3 [या दिवालियापन और दिवालिया संहिता, 2016] या उस समय लागू किसी अन्य कानून में निहित किसी भी बात के बावजूद, केंद्रीय प्रतिपक्ष का परिसमापक या रिसीवर या असाइनी (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए), चाहे अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया हो या अन्यथा, निम्नलिखित कार्य करेगा--
(क) किसी ऐसे निर्णय को पुनः न खोलें जो अंतिम और अपरिवर्तनीय हो चुका हो;
(ख) केंद्रीय प्रतिपक्ष के नियमों, विनियमों या उपनियमों के अनुसार, प्रणाली प्रतिभागियों द्वारा अपने निपटान या अन्य दायित्वों के लिए प्रदान की गई संपार्श्विक संपत्तियों का विनियोजन करने के बाद, अतिरिक्त रखी गई संपार्श्विक संपत्तियों को संबंधित प्रणाली प्रतिभागियों को लौटा दें।]
5 [स्पष्टीकरण 1].-- संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस खंड में संदर्भित निपटान, चाहे सकल हो या शुद्ध, अंतिम और अपरिवर्तनीय है जैसे ही ऐसे निपटान के परिणामस्वरूप देय धन, प्रतिभूतियां, विदेशी मुद्रा या डेरिवेटिव या अन्य लेनदेन निर्धारित हो जाते हैं, चाहे ऐसा धन, प्रतिभूतियां या विदेशी मुद्रा या डेरिवेटिव या अन्य लेनदेन वास्तव में भुगतान किया गया हो या नहीं।
6 [ स्पष्टीकरण 2].--इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "केंद्रीय प्रतिपक्ष" अभिव्यक्ति का अर्थ एक प्रणाली प्रदाता है जो निपटान के लिए स्वीकृत लेन-देन में प्रणाली प्रतिभागियों के बीच नवीकरण के माध्यम से मध्यस्थता करता है, जिससे वह प्रत्येक विक्रेता का क्रेता और प्रत्येक क्रेता का विक्रेता बन जाता है, ताकि उनके लेन-देन का निपटान किया जा सके।]
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