CF Act 89अध्याय XIII · Miscellaneous
धारा 89 · नियम बनाने की शक्ति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने के लिए नियम बना सकती है।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने हेतु आवेदन करने का प्रपत्र एवं विधि;
(ख) धारा 6 की उपधारा (1) के खंड (क्यू) के अधीन चिट समझौते में निहित अतिरिक्त विवरण;
(ग) धारा 17 के तहत आयोजित लॉटरी की कार्यवाही के कार्यवृत्त में शामिल की जाने वाली विवरण;
(घ) धारा 20 के तहत सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से अनाज चिट में रजिस्ट्रार द्वारा मूल्यांकन की विधि;
(ई) धारा 20 के तहत फोरमैन द्वारा दी गई सुरक्षा राशि को जारी करने में रजिस्ट्रार द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;
(f) धारा 23 के अधीन फोरमैन द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टर और पुस्तकें तथा वे प्रारूप जिनमें ऐसे रजिस्टर और पुस्तकें रखी जा सकती हैं;
(जी) वह समय सीमा जिसके भीतर किसी चिट व्यवसाय के संबंध में धारा 24 के तहत बैलेंस शीट और लाभ एवं हानि खाता दाखिल किया जाएगा;
(h) धारा 28 के तहत चूक करने वाले ग्राहक द्वारा चूक की गई किश्तों पर देय ब्याज की दर;
(i) धारा 49 के तहत चिटों के समापन के लिए आवेदन में शामिल की जा सकने वाली विवरण;
(j) अध्याय X के अंतर्गत चिटों के समापन के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;
(k) धारा 63 के अधीन देय शुल्क;
(एल) चिट कारोबार की बैलेंस शीट और लाभ-हानि खातों का ऑडिट करना और ऑडिट प्रमाणपत्र जारी करना;
(m) धारा 64 के अधीन विवाद को रजिस्ट्रार के पास भेजने का प्रपत्र एवं तरीका;
(n) धारा 64 के अंतर्गत रजिस्ट्रार या उसके नामित व्यक्ति द्वारा उसे सौंपे गए विवादों के निपटारे के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;
(ओ) धारा 67 की उपधारा (1) के खंड (एफ) में निर्दिष्ट मामले;
(पी) वे शर्तें और वह राशि जिसके भुगतान पर धारा 81 के तहत अपराधों का निपटारा किया जा सकता है;
(q) इस अधिनियम के अंतर्गत अपील दायर करने का प्रपत्र और तरीका तथा ऐसी अपील के लिए देय शुल्क;
(r) इस अधिनियम के तहत नोटिस या अन्य प्रक्रिया जारी करना और उसकी तामील करना;
(एस) इस अधिनियम के अधीन देय किसी राशि को प्राप्त करने की प्रक्रिया एवं विधि;
(टी) कोई अन्य मामला जिसे निर्धारित करना आवश्यक है या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के बाद यथाशीघ्र रखा जाएगा, यदि राज्य विधानमंडल में दो सदन हों, तो प्रत्येक सदन के समक्ष, या यदि विधानमंडल में एक सदन हो, तो उस सदन के समक्ष।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने हेतु आवेदन करने का प्रपत्र एवं विधि;
(ख) धारा 6 की उपधारा (1) के खंड (क्यू) के अधीन चिट समझौते में निहित अतिरिक्त विवरण;
(ग) धारा 17 के तहत आयोजित लॉटरी की कार्यवाही के कार्यवृत्त में शामिल की जाने वाली विवरण;
(घ) धारा 20 के तहत सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से अनाज चिट में रजिस्ट्रार द्वारा मूल्यांकन की विधि;
(ई) धारा 20 के तहत फोरमैन द्वारा दी गई सुरक्षा राशि को जारी करने में रजिस्ट्रार द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;
(f) धारा 23 के अधीन फोरमैन द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टर और पुस्तकें तथा वे प्रारूप जिनमें ऐसे रजिस्टर और पुस्तकें रखी जा सकती हैं;
(जी) वह समय सीमा जिसके भीतर किसी चिट व्यवसाय के संबंध में धारा 24 के तहत बैलेंस शीट और लाभ एवं हानि खाता दाखिल किया जाएगा;
(h) धारा 28 के तहत चूक करने वाले ग्राहक द्वारा चूक की गई किश्तों पर देय ब्याज की दर;
(i) धारा 49 के तहत चिटों के समापन के लिए आवेदन में शामिल की जा सकने वाली विवरण;
(j) अध्याय X के अंतर्गत चिटों के समापन के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;
(k) धारा 63 के अधीन देय शुल्क;
(एल) चिट कारोबार की बैलेंस शीट और लाभ-हानि खातों का ऑडिट करना और ऑडिट प्रमाणपत्र जारी करना;
(m) धारा 64 के अधीन विवाद को रजिस्ट्रार के पास भेजने का प्रपत्र एवं तरीका;
(n) धारा 64 के अंतर्गत रजिस्ट्रार या उसके नामित व्यक्ति द्वारा उसे सौंपे गए विवादों के निपटारे के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;
(ओ) धारा 67 की उपधारा (1) के खंड (एफ) में निर्दिष्ट मामले;
(पी) वे शर्तें और वह राशि जिसके भुगतान पर धारा 81 के तहत अपराधों का निपटारा किया जा सकता है;
(q) इस अधिनियम के अंतर्गत अपील दायर करने का प्रपत्र और तरीका तथा ऐसी अपील के लिए देय शुल्क;
(r) इस अधिनियम के तहत नोटिस या अन्य प्रक्रिया जारी करना और उसकी तामील करना;
(एस) इस अधिनियम के अधीन देय किसी राशि को प्राप्त करने की प्रक्रिया एवं विधि;
(टी) कोई अन्य मामला जिसे निर्धारित करना आवश्यक है या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के बाद यथाशीघ्र रखा जाएगा, यदि राज्य विधानमंडल में दो सदन हों, तो प्रत्येक सदन के समक्ष, या यदि विधानमंडल में एक सदन हो, तो उस सदन के समक्ष।
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