CF Act 67अध्याय XII · Disputes and Arbitration
धारा 67 · विवादों के निपटारे की प्रक्रिया और रजिस्ट्रार या उनके नामित व्यक्ति के अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 66 के तहत किसी विवाद की सुनवाई करने वाले रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति को उस धारा के तहत प्रदत्त शक्तियों के अतिरिक्त, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के तहत किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय सिविल न्यायालय को प्राप्त शक्तियों के अतिरिक्त निम्नलिखित मामलों के संबंध में भी शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात्:--
(क) व्यक्तियों को बुलाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उनसे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और निरीक्षण की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रतियां मंगवाना;
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(2) रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति की अनुमति के बिना, किसी विवाद की सुनवाई में किसी पक्ष का प्रतिनिधित्व किसी कानूनी व्यवसायी द्वारा नहीं किया जाएगा।
(3) (क) यदि रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति संतुष्ट हो कि किसी व्यक्ति ने, चाहे वह ग्राहक हो या न हो, किसी विवाद में पक्षकार व्यक्ति की संपत्ति में कोई हित प्राप्त कर लिया है, तो वह आदेश दे सकता है कि संपत्ति में हित प्राप्त करने वाले व्यक्ति को विवाद में पक्षकार के रूप में शामिल किया जाए, और विवाद पर रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति द्वारा दिया गया कोई भी निर्णय उस पक्षकार पर बाध्यकारी होगा, मानो वह विवाद का मूल पक्षकार हो।
(ख) यदि कोई विवाद किसी गलत व्यक्ति के नाम पर संदर्भित किया गया हो, या यदि सभी आवश्यक पक्षकारों को शामिल नहीं किया गया हो, तो रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति, यदि वह संतुष्ट हो कि यह वास्तविक त्रुटि के कारण हुआ है, तो विवाद की सुनवाई के किसी भी चरण में किसी अन्य व्यक्ति को विवाद के पक्षकार के रूप में प्रतिस्थापित या जोड़ा जा सकता है, ऐसी शर्तों पर जैसा वह उचित समझे।
(ग) रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति कार्यवाही के किसी भी चरण में, किसी भी पक्ष के आवेदन पर या उसके बिना, और ऐसी शर्तों पर जो रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति को उचित प्रतीत हों, यह आदेश दे सकता है कि अनुचित रूप से शामिल किए गए किसी भी पक्ष का नाम हटा दिया जाए।
(घ) विवाद में शामिल कोई भी व्यक्ति, जो एक ही कारण से संबंधित एक से अधिक राहत पाने का हकदार है, ऐसी सभी या कोई भी राहत प्राप्त करने का दावा कर सकता है, लेकिन यदि वह ऐसी किसी राहत का दावा करने से चूक जाता है, तो वह रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति की अनुमति के बिना उस राहत का दावा करने का हकदार नहीं होगा।
(क) व्यक्तियों को बुलाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उनसे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और निरीक्षण की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रतियां मंगवाना;
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(2) रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति की अनुमति के बिना, किसी विवाद की सुनवाई में किसी पक्ष का प्रतिनिधित्व किसी कानूनी व्यवसायी द्वारा नहीं किया जाएगा।
(3) (क) यदि रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति संतुष्ट हो कि किसी व्यक्ति ने, चाहे वह ग्राहक हो या न हो, किसी विवाद में पक्षकार व्यक्ति की संपत्ति में कोई हित प्राप्त कर लिया है, तो वह आदेश दे सकता है कि संपत्ति में हित प्राप्त करने वाले व्यक्ति को विवाद में पक्षकार के रूप में शामिल किया जाए, और विवाद पर रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति द्वारा दिया गया कोई भी निर्णय उस पक्षकार पर बाध्यकारी होगा, मानो वह विवाद का मूल पक्षकार हो।
(ख) यदि कोई विवाद किसी गलत व्यक्ति के नाम पर संदर्भित किया गया हो, या यदि सभी आवश्यक पक्षकारों को शामिल नहीं किया गया हो, तो रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति, यदि वह संतुष्ट हो कि यह वास्तविक त्रुटि के कारण हुआ है, तो विवाद की सुनवाई के किसी भी चरण में किसी अन्य व्यक्ति को विवाद के पक्षकार के रूप में प्रतिस्थापित या जोड़ा जा सकता है, ऐसी शर्तों पर जैसा वह उचित समझे।
(ग) रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति कार्यवाही के किसी भी चरण में, किसी भी पक्ष के आवेदन पर या उसके बिना, और ऐसी शर्तों पर जो रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति को उचित प्रतीत हों, यह आदेश दे सकता है कि अनुचित रूप से शामिल किए गए किसी भी पक्ष का नाम हटा दिया जाए।
(घ) विवाद में शामिल कोई भी व्यक्ति, जो एक ही कारण से संबंधित एक से अधिक राहत पाने का हकदार है, ऐसी सभी या कोई भी राहत प्राप्त करने का दावा कर सकता है, लेकिन यदि वह ऐसी किसी राहत का दावा करने से चूक जाता है, तो वह रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति की अनुमति के बिना उस राहत का दावा करने का हकदार नहीं होगा।
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