CF Act 8अध्याय II · Registration of Chits, Commencement and Conduct of Chit Business
धारा 8 · किसी कंपनी द्वारा चिट फंड शुरू करने आदि के लिए न्यूनतम पूंजी आवश्यकताएं और आरक्षित निधि का निर्माण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) में किसी बात के होते हुए भी, लेकिन इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कोई कंपनी चिट कारोबार शुरू या जारी नहीं रखेगी जब तक कि उसकी चुकता पूंजी एक लाख रुपये से कम न हो।
(2) इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर एक लाख रुपये से कम की चुकता पूंजी वाली और चिट कारोबार करने वाली प्रत्येक कंपनी, प्रारंभ होने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होने से पहले, अपनी चुकता पूंजी में कम से कम एक लाख रुपये की वृद्धि करेगी:
बशर्ते कि राज्य सरकार, यदि वह जनहित में या किसी कठिनाई से बचने के लिए आवश्यक समझे, तो किसी कंपनी के संबंध में उक्त तीन वर्ष की अवधि को अधिकतम दो वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकती है:
इसके अलावा, कोई भी ऐसी कंपनी कोई नई चिट शुरू नहीं करेगी जिसकी अवधि उक्त तीन वर्ष की अवधि या प्रथम परंतुक के तहत विस्तारित अवधि या अवधियों से आगे बढ़ जाए, जब तक कि वह अपनी चुकता पूंजी को कम से कम एक लाख रुपये तक न बढ़ा दे।
(3) चिट कारोबार करने वाली प्रत्येक कंपनी एक आरक्षित निधि बनाएगी और उसका रखरखाव करेगी तथा अपने लाभ-हानि खाते में प्रकट किए गए प्रत्येक वर्ष के लाभ के शेष में से तथा अपने शेयरों पर किसी भी [छूट का हिस्सा] घोषित किए जाने से पहले, ऐसी आरक्षित निधि में ऐसे लाभ के दस प्रतिशत से कम राशि हस्तांतरित नहीं करेगी।
(4) कोई भी कंपनी रजिस्ट्रार की पूर्व स्वीकृति के बिना आरक्षित निधि से कोई राशि या राशियाँ विनियोजित नहीं करेगी और ऐसी स्वीकृति प्राप्त करने के उद्देश्य से, वह रजिस्ट्रार को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करेगी जिसमें ऐसे विनियोजन से संबंधित परिस्थितियों की व्याख्या की जाएगी।
(2) इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर एक लाख रुपये से कम की चुकता पूंजी वाली और चिट कारोबार करने वाली प्रत्येक कंपनी, प्रारंभ होने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होने से पहले, अपनी चुकता पूंजी में कम से कम एक लाख रुपये की वृद्धि करेगी:
बशर्ते कि राज्य सरकार, यदि वह जनहित में या किसी कठिनाई से बचने के लिए आवश्यक समझे, तो किसी कंपनी के संबंध में उक्त तीन वर्ष की अवधि को अधिकतम दो वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकती है:
इसके अलावा, कोई भी ऐसी कंपनी कोई नई चिट शुरू नहीं करेगी जिसकी अवधि उक्त तीन वर्ष की अवधि या प्रथम परंतुक के तहत विस्तारित अवधि या अवधियों से आगे बढ़ जाए, जब तक कि वह अपनी चुकता पूंजी को कम से कम एक लाख रुपये तक न बढ़ा दे।
(3) चिट कारोबार करने वाली प्रत्येक कंपनी एक आरक्षित निधि बनाएगी और उसका रखरखाव करेगी तथा अपने लाभ-हानि खाते में प्रकट किए गए प्रत्येक वर्ष के लाभ के शेष में से तथा अपने शेयरों पर किसी भी [छूट का हिस्सा] घोषित किए जाने से पहले, ऐसी आरक्षित निधि में ऐसे लाभ के दस प्रतिशत से कम राशि हस्तांतरित नहीं करेगी।
(4) कोई भी कंपनी रजिस्ट्रार की पूर्व स्वीकृति के बिना आरक्षित निधि से कोई राशि या राशियाँ विनियोजित नहीं करेगी और ऐसी स्वीकृति प्राप्त करने के उद्देश्य से, वह रजिस्ट्रार को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करेगी जिसमें ऐसे विनियोजन से संबंधित परिस्थितियों की व्याख्या की जाएगी।
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