NHB Act 36Fअध्याय VA · Other Provisions Relating to Housing Finance Institutions
धारा 36F · धारा 36ई के तहत आवेदन के संबंध में प्रक्रिया।
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1 [ 36F. धारा 36E के तहत आवेदन के संबंध में प्रक्रिया। --(1) धारा 36E के तहत आवेदन प्राप्त होने पर, यदि वसूली अधिकारी की राय है कि उधारकर्ता किसी समझौते के तहत किसी अनुमोदित संस्था के प्रति उत्तरदायी है, या उसने सहायता या उसकी किसी किस्त के पुनर्भुगतान में चूक की है, या अन्यथा उक्त समझौते की शर्तों का पालन करने में विफल रहा है, तो वह उधारकर्ता को निर्धारित प्रारूप में मांग की लिखित सूचना तामील करवाएगा, जिसमें उसे तामील की तारीख से नब्बे दिनों की अवधि के भीतर सूचना में निर्दिष्ट राशि का भुगतान करने या यह कारण बताने के लिए कहा जाएगा कि मांगी गई राहत क्यों नहीं दी जानी चाहिए।
(2) वसूली अधिकारी आवेदक और उधारकर्ता को सुनवाई का अवसर देने के बाद, न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए, आवेदन पर ऐसा अंतरिम या अंतिम आदेश पारित कर सकता है, जिसमें उस तिथि से ब्याज के भुगतान का आदेश भी शामिल है, जिस तिथि को या उससे पहले भुगतान की गई राशि का भुगतान वसूली या वास्तविक भुगतान की तिथि तक किया जाएगा।
(3) वसूली अधिकारी उधारकर्ता द्वारा अनुमोदित संस्था या व्यक्ति के विरुद्ध स्थापित किए गए किसी भी सेट-ऑफ या प्रतिदावे पर विचार कर सकता है और यदि संतुष्ट हो तो उसे स्वीकार कर सकता है।
(4) वसूली अधिकारी अपने द्वारा पारित प्रत्येक आदेश की एक प्रति अनुमोदित संस्था और उधारकर्ता को उपलब्ध कराएगा।
(5) वसूली अधिकारी, उधारकर्ता के विरुद्ध अंतरिम आदेश (निषेध या रोक या कुर्की के माध्यम से) जारी कर सकता है ताकि उसे किसी भी ऐसी संपत्ति के हस्तांतरण, विक्रय या अन्यथा व्यवहार करने या निपटान करने से रोका जा सके, जो बकाया राशि के लिए सुरक्षा के रूप में अनुमोदित संस्था को गिरवी रखी गई हो, बंधक रखी गई हो, बंधक रखी गई हो या सौंपी गई हो।
(6) धारा 36ई के तहत वसूली अधिकारी को दिए गए आवेदन पर वह यथाशीघ्र कार्रवाई करेगा और आवेदन प्राप्त होने की तिथि से छह महीने के भीतर उसका अंतिम निपटारा करने का प्रयास करेगा।]
(2) वसूली अधिकारी आवेदक और उधारकर्ता को सुनवाई का अवसर देने के बाद, न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए, आवेदन पर ऐसा अंतरिम या अंतिम आदेश पारित कर सकता है, जिसमें उस तिथि से ब्याज के भुगतान का आदेश भी शामिल है, जिस तिथि को या उससे पहले भुगतान की गई राशि का भुगतान वसूली या वास्तविक भुगतान की तिथि तक किया जाएगा।
(3) वसूली अधिकारी उधारकर्ता द्वारा अनुमोदित संस्था या व्यक्ति के विरुद्ध स्थापित किए गए किसी भी सेट-ऑफ या प्रतिदावे पर विचार कर सकता है और यदि संतुष्ट हो तो उसे स्वीकार कर सकता है।
(4) वसूली अधिकारी अपने द्वारा पारित प्रत्येक आदेश की एक प्रति अनुमोदित संस्था और उधारकर्ता को उपलब्ध कराएगा।
(5) वसूली अधिकारी, उधारकर्ता के विरुद्ध अंतरिम आदेश (निषेध या रोक या कुर्की के माध्यम से) जारी कर सकता है ताकि उसे किसी भी ऐसी संपत्ति के हस्तांतरण, विक्रय या अन्यथा व्यवहार करने या निपटान करने से रोका जा सके, जो बकाया राशि के लिए सुरक्षा के रूप में अनुमोदित संस्था को गिरवी रखी गई हो, बंधक रखी गई हो, बंधक रखी गई हो या सौंपी गई हो।
(6) धारा 36ई के तहत वसूली अधिकारी को दिए गए आवेदन पर वह यथाशीघ्र कार्रवाई करेगा और आवेदन प्राप्त होने की तिथि से छह महीने के भीतर उसका अंतिम निपटारा करने का प्रयास करेगा।]
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