NHB Act 30Aअध्याय V · Provisions Relating to Housing Finance Institutions Receiving Deposits
धारा 30A · नीति निर्धारण करने और निर्देश जारी करने का अधिकार रिजर्व बैंक के पास है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [30ए. नीति निर्धारण और निर्देश जारी करने की रिजर्व बैंक की शक्ति -- (1) यदि रिजर्व बैंक संतुष्ट है कि जनहित में या देश की आवास वित्त प्रणाली को उसके लाभ के लिए विनियमित करने के लिए या किसी आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, के कार्यों को जमाकर्ताओं के हित के प्रतिकूल या ऐसी आवास वित्त संस्थाओं के हित के प्रतिकूल तरीके से संचालित होने से रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक या उचित है, तो वह आय की पहचान, लेखा मानकों, अशोध्य और संदिग्ध ऋणों के लिए उचित प्रावधान करने, परिसंपत्तियों के लिए जोखिम भार और असंतुलन-पत्र मदों के लिए ऋण रूपांतरण कारकों के आधार पर पूंजी पर्याप्तता और किसी आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, या ऐसे आवास वित्त संस्थाओं के समूह या आवास वित्त संस्थाओं, जो कंपनियां हैं, द्वारा निधियों के उपयोग से संबंधित नीति निर्धारित कर सकता है और सभी या किसी भी आवास वित्त संस्था, जो एक कंपनी है, को निर्देश दे सकता है, जैसा भी मामला हो, और ऐसी आवास वित्त संस्थाएं इस प्रकार निर्धारित नीति और जारी किए गए निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होंगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, रिजर्व बैंक सामान्यतः कंपनियों के रूप में आवास वित्त संस्थानों को, या ऐसे आवास वित्त संस्थानों के समूह को, या विशेष रूप से किसी कंपनी के रूप में आवास वित्त संस्थान को निम्नलिखित संबंध में निर्देश दे सकता है:
(क) वह उद्देश्य जिसके लिए अग्रिम या अन्य निधि-आधारित या गैर-निधि-आधारित सहायता प्रदान नहीं की जा सकती; और
(ख) अग्रिम राशि या अन्य वित्तीय सहायता या शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों में निवेश की अधिकतम राशि, जो आवास वित्त संस्था की चुकता पूंजी, भंडार और जमा राशि तथा अन्य प्रासंगिक विचारों को ध्यान में रखते हुए, उस आवास वित्त संस्था द्वारा किसी व्यक्ति या कंपनी या कंपनियों के समूह को दी जा सकती है।
(3) यदि भारतीय रिज़र्व बैंक जनहित में ऐसा करना आवश्यक समझे, तो वह धारा 31 में निर्दिष्ट जमा स्वीकार करने वाली कंपनियों के रूप में आवास वित्त संस्थानों को, सामान्यतः या जमा स्वीकार करने वाले ऐसे आवास वित्त संस्थानों के किसी समूह को, तथा विशेष रूप से, जमा प्राप्ति से संबंधित किसी भी मामले के संबंध में निर्देश जारी कर सकता है, जिसमें जमा स्वीकार करने वाली कंपनी के रूप में आवास वित्त संस्थान की साख, ऐसे जमा पर देय ब्याज दरें और जमा प्राप्त करने की अवधि शामिल है।
(4) यदि कोई आवास वित्त संस्था, जो जमा स्वीकार करने वाली कंपनी है, उप-धारा (3) के तहत जारी किसी निर्देश का पालन करने में विफल रहती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक आदेश द्वारा उस आवास वित्त संस्था द्वारा जमा स्वीकार करने पर रोक लगा सकता है।]
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, रिजर्व बैंक सामान्यतः कंपनियों के रूप में आवास वित्त संस्थानों को, या ऐसे आवास वित्त संस्थानों के समूह को, या विशेष रूप से किसी कंपनी के रूप में आवास वित्त संस्थान को निम्नलिखित संबंध में निर्देश दे सकता है:
(क) वह उद्देश्य जिसके लिए अग्रिम या अन्य निधि-आधारित या गैर-निधि-आधारित सहायता प्रदान नहीं की जा सकती; और
(ख) अग्रिम राशि या अन्य वित्तीय सहायता या शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों में निवेश की अधिकतम राशि, जो आवास वित्त संस्था की चुकता पूंजी, भंडार और जमा राशि तथा अन्य प्रासंगिक विचारों को ध्यान में रखते हुए, उस आवास वित्त संस्था द्वारा किसी व्यक्ति या कंपनी या कंपनियों के समूह को दी जा सकती है।
(3) यदि भारतीय रिज़र्व बैंक जनहित में ऐसा करना आवश्यक समझे, तो वह धारा 31 में निर्दिष्ट जमा स्वीकार करने वाली कंपनियों के रूप में आवास वित्त संस्थानों को, सामान्यतः या जमा स्वीकार करने वाले ऐसे आवास वित्त संस्थानों के किसी समूह को, तथा विशेष रूप से, जमा प्राप्ति से संबंधित किसी भी मामले के संबंध में निर्देश जारी कर सकता है, जिसमें जमा स्वीकार करने वाली कंपनी के रूप में आवास वित्त संस्थान की साख, ऐसे जमा पर देय ब्याज दरें और जमा प्राप्त करने की अवधि शामिल है।
(4) यदि कोई आवास वित्त संस्था, जो जमा स्वीकार करने वाली कंपनी है, उप-धारा (3) के तहत जारी किसी निर्देश का पालन करने में विफल रहती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक आदेश द्वारा उस आवास वित्त संस्था द्वारा जमा स्वीकार करने पर रोक लगा सकता है।]
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