CGST Act 112अध्याय XVIII · Appeals and Revision
धारा 112 · अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम की धारा 107 या धारा 108 या राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के तहत उसके विरुद्ध पारित किसी आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति, अपील किए जाने वाले आदेश की सूचना अपीलकर्ता को दिए जाने की तिथि से तीन महीने के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील कर सकता है [ ; या वह तिथि, जो परिषद की अनुशंसाओं पर सरकार द्वारा इस अधिनियम के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील दाखिल करने के लिए अधिसूचित की जाए, इनमें से जो भी बाद में हो।]
(2) अपीलीय न्यायाधिकरण अपने विवेक से ऐसी किसी अपील को स्वीकार करने से इनकार कर सकता है, जहाँ कर या इनपुट कर क्रेडिट या कर या इनपुट कर क्रेडिट में अंतर या ऐसे आदेश द्वारा निर्धारित जुर्माना, शुल्क या दंड की राशि पचास हजार रुपये से अधिक न हो।
(3) आयुक्त, स्वयं या राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त के अनुरोध पर, इस अधिनियम या राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के तहत अपीलीय प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश के अभिलेख को मंगवाकर उसकी वैधता या औचित्य की जाँच कर सकता है, और आदेश द्वारा अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को उक्त आदेश पारित होने की तिथि से छह माह के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण में आवेदन करने का निर्देश दे सकता है [ या वह तिथि, जो परिषद की अनुशंसाओं पर सरकार द्वारा इस अधिनियम के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष आवेदन दाखिल करने के उद्देश्य से अधिसूचित की जाए, जो भी बाद में हो], ताकि उक्त आदेश से उत्पन्न होने वाले ऐसे बिंदुओं का निर्धारण किया जा सके, जिन्हें आयुक्त अपने आदेश में निर्दिष्ट करे।
(4) जहां उपधारा (3) के तहत किसी आदेश के अनुसरण में अधिकृत अधिकारी अपीलीय न्यायाधिकरण को आवेदन करता है, तो ऐसे आवेदन पर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा इस प्रकार विचार किया जाएगा मानो वह धारा 107 की उपधारा (11) या धारा 108 की उपधारा (1) के तहत आदेश के विरुद्ध अपील हो, और इस अधिनियम के प्रावधान ऐसे आवेदन पर लागू होंगे, जैसे वे उपधारा (1) के तहत दायर अपीलों के संबंध में लागू होते हैं।
(5) इस धारा के अंतर्गत अपील किए जाने की सूचना प्राप्त होने पर, जिस पक्ष के विरुद्ध अपील की गई है, वह, यद्यपि उसने ऐसे आदेश या उसके किसी भाग के विरुद्ध अपील न की हो, सूचना प्राप्त होने के पैंतालीस दिनों के भीतर, निर्धारित विधि से सत्यापित प्रति-आपत्तियों का ज्ञापन, अपील किए गए आदेश के किसी भाग के विरुद्ध, प्रस्तुत कर सकता है और ऐसे ज्ञापन का निपटारा अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा इस प्रकार किया जाएगा मानो वह उपधारा (1) में निर्दिष्ट समय के भीतर प्रस्तुत की गई अपील हो।
(6) अपीलीय न्यायाधिकरण उपधारा (1) 2 में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के तीन महीने के भीतर अपील स्वीकार कर सकता है [या उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के तीन महीने के भीतर आवेदन दाखिल करने की अनुमति दे सकता है], या उपधारा ( 5 ) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पैंतालीस दिनों के भीतर प्रति-आपत्तियों का ज्ञापन दाखिल करने की अनुमति दे सकता है, यदि वह संतुष्ट है कि उस अवधि के भीतर इसे प्रस्तुत न करने का पर्याप्त कारण था।
(7) अपीलीय न्यायाधिकरण को अपील ऐसे प्रपत्र में होगी, ऐसे तरीके से सत्यापित होगी और उसके साथ ऐसा शुल्क होगा, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(8) उपधारा (1) के अंतर्गत कोई अपील तब तक दायर नहीं की जाएगी, जब तक अपीलकर्ता ने भुगतान न कर दिया हो--
(क) कर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क और दंड की राशि का वह भाग, जो विवादित आदेश से उत्पन्न हुआ है, पूर्ण रूप से, जैसा कि उसने स्वीकार किया है; और
(ख) विवादित कर की शेष राशि के 3 [दस प्रतिशत] के बराबर राशि, उक्त आदेश से उत्पन्न धारा 107 की उपधारा (6) के तहत भुगतान की गई राशि के अतिरिक्त, 4 [अधिकतम 5 [बीस करोड़ रुपये] के अधीन], जिसके संबंध में अपील दायर की गई है।
(9) जहां अपीलकर्ता ने उपधारा (8) के अनुसार राशि का भुगतान कर दिया है, वहां शेष राशि की वसूली की कार्यवाही अपील के निपटारे तक स्थगित मानी जाएगी।
(10) अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष किया गया प्रत्येक आवेदन,---
(क) त्रुटि के सुधार के लिए अपील में या किसी अन्य उद्देश्य के लिए; या
(ख) अपील या आवेदन की बहाली के लिए,
इसके साथ निर्धारित शुल्क भी देना होगा।
(2) अपीलीय न्यायाधिकरण अपने विवेक से ऐसी किसी अपील को स्वीकार करने से इनकार कर सकता है, जहाँ कर या इनपुट कर क्रेडिट या कर या इनपुट कर क्रेडिट में अंतर या ऐसे आदेश द्वारा निर्धारित जुर्माना, शुल्क या दंड की राशि पचास हजार रुपये से अधिक न हो।
(3) आयुक्त, स्वयं या राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त के अनुरोध पर, इस अधिनियम या राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के तहत अपीलीय प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश के अभिलेख को मंगवाकर उसकी वैधता या औचित्य की जाँच कर सकता है, और आदेश द्वारा अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को उक्त आदेश पारित होने की तिथि से छह माह के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण में आवेदन करने का निर्देश दे सकता है [ या वह तिथि, जो परिषद की अनुशंसाओं पर सरकार द्वारा इस अधिनियम के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष आवेदन दाखिल करने के उद्देश्य से अधिसूचित की जाए, जो भी बाद में हो], ताकि उक्त आदेश से उत्पन्न होने वाले ऐसे बिंदुओं का निर्धारण किया जा सके, जिन्हें आयुक्त अपने आदेश में निर्दिष्ट करे।
(4) जहां उपधारा (3) के तहत किसी आदेश के अनुसरण में अधिकृत अधिकारी अपीलीय न्यायाधिकरण को आवेदन करता है, तो ऐसे आवेदन पर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा इस प्रकार विचार किया जाएगा मानो वह धारा 107 की उपधारा (11) या धारा 108 की उपधारा (1) के तहत आदेश के विरुद्ध अपील हो, और इस अधिनियम के प्रावधान ऐसे आवेदन पर लागू होंगे, जैसे वे उपधारा (1) के तहत दायर अपीलों के संबंध में लागू होते हैं।
(5) इस धारा के अंतर्गत अपील किए जाने की सूचना प्राप्त होने पर, जिस पक्ष के विरुद्ध अपील की गई है, वह, यद्यपि उसने ऐसे आदेश या उसके किसी भाग के विरुद्ध अपील न की हो, सूचना प्राप्त होने के पैंतालीस दिनों के भीतर, निर्धारित विधि से सत्यापित प्रति-आपत्तियों का ज्ञापन, अपील किए गए आदेश के किसी भाग के विरुद्ध, प्रस्तुत कर सकता है और ऐसे ज्ञापन का निपटारा अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा इस प्रकार किया जाएगा मानो वह उपधारा (1) में निर्दिष्ट समय के भीतर प्रस्तुत की गई अपील हो।
(6) अपीलीय न्यायाधिकरण उपधारा (1) 2 में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के तीन महीने के भीतर अपील स्वीकार कर सकता है [या उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के तीन महीने के भीतर आवेदन दाखिल करने की अनुमति दे सकता है], या उपधारा ( 5 ) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पैंतालीस दिनों के भीतर प्रति-आपत्तियों का ज्ञापन दाखिल करने की अनुमति दे सकता है, यदि वह संतुष्ट है कि उस अवधि के भीतर इसे प्रस्तुत न करने का पर्याप्त कारण था।
(7) अपीलीय न्यायाधिकरण को अपील ऐसे प्रपत्र में होगी, ऐसे तरीके से सत्यापित होगी और उसके साथ ऐसा शुल्क होगा, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(8) उपधारा (1) के अंतर्गत कोई अपील तब तक दायर नहीं की जाएगी, जब तक अपीलकर्ता ने भुगतान न कर दिया हो--
(क) कर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क और दंड की राशि का वह भाग, जो विवादित आदेश से उत्पन्न हुआ है, पूर्ण रूप से, जैसा कि उसने स्वीकार किया है; और
(ख) विवादित कर की शेष राशि के 3 [दस प्रतिशत] के बराबर राशि, उक्त आदेश से उत्पन्न धारा 107 की उपधारा (6) के तहत भुगतान की गई राशि के अतिरिक्त, 4 [अधिकतम 5 [बीस करोड़ रुपये] के अधीन], जिसके संबंध में अपील दायर की गई है।
(9) जहां अपीलकर्ता ने उपधारा (8) के अनुसार राशि का भुगतान कर दिया है, वहां शेष राशि की वसूली की कार्यवाही अपील के निपटारे तक स्थगित मानी जाएगी।
(10) अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष किया गया प्रत्येक आवेदन,---
(क) त्रुटि के सुधार के लिए अपील में या किसी अन्य उद्देश्य के लिए; या
(ख) अपील या आवेदन की बहाली के लिए,
इसके साथ निर्धारित शुल्क भी देना होगा।
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