धारा 3 · धारा 3. निर्देशों का अर्थ लगाना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
3. निर्देशों का अर्थ लगाना
(1) इस संहिता में,—
(क) मजिस्ट्रेट के प्रति किसी ऐसे निर्देश का, जिसके साथ कोई विशेषक शब्द नहीं हैं, यह अर्थ लगाया जाएगा, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, कि वह निर्देश है—
(i) महानगर क्षेत्र से बाहर के किसी क्षेत्र के संबंध में, न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति;
(ii) महानगर क्षेत्र के संबंध में, महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति;
(ख) द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का, महानगर क्षेत्र से बाहर के किसी क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह द्वितीय वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है, और महानगर क्षेत्र के संबंध में, यह कि वह महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(ग) प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का,—
(i) महानगर क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(ii) किसी अन्य क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(घ) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का, महानगर क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है।
(2) इस संहिता में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के प्रति किसी निर्देश का, महानगर क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र के लिए महानगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय के प्रति निर्देश है।
(3) जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस संहिता के प्रारंभ से पहले पारित किसी अधिनियमिति में—
(क) प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(ख) द्वितीय वर्ग या तृतीय वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह द्वितीय वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(ग) प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट या मुख्य प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह क्रमशः महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(घ) किसी ऐसे क्षेत्र के प्रति, जो किसी महानगर क्षेत्र में सम्मिलित है, किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह ऐसे महानगर क्षेत्र के प्रति निर्देश है, और ऐसे क्षेत्र के संबंध में प्रथम वर्ग या द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह ऐसे क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है।
(4) जहां इस संहिता से भिन्न किसी विधि के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य कृत्य ऐसे मामलों से संबंधित हैं—
(क) जिनमें साक्ष्य का मूल्यांकन या छानबीन अंतर्वलित है, या ऐसा विनिश्चय करना अंतर्वलित है जो किसी व्यक्ति को किसी दंड या शास्ति का, अथवा अन्वेषण, जांच या विचारण के लंबित रहने तक अभिरक्षा में निरोध का भागी बनाता है, या जिसका प्रभाव उसे किसी न्यायालय के समक्ष विचारण के लिए भेजना होगा, वहां वे कृत्य, इस संहिता के उपबंधों के अधीन रहते हुए, न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य होंगे; या
(ख) जो प्रकृति में प्रशासनिक या कार्यपालक हैं, जैसे अनुज्ञप्ति देना, अनुज्ञप्ति का निलंबन या रद्दकरण, अभियोजन की मंजूरी देना या अभियोजन वापस लेना, वहां वे कृत्य, यथापूर्वोक्त रूप में अधीन रहते हुए, कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य होंगे।
राज्य संशोधन
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह:
(1) धारा 3 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"3क. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह से संबंधित विशेष उपबंध—(1) इस संहिता में—
(क) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे जिला मजिस्ट्रेट के प्रति, अथवा जहां राज्य सरकार ऐसा निदेश दे वहां अपर जिला मजिस्ट्रेट के प्रति भी, निर्देश हैं;
(ख) मजिस्ट्रेट, या प्रथम वर्ग या द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट, या प्रथम वर्ग या द्वितीय वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश हैं, जिन्हें राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे।
(2) राज्य सरकार, यदि उसकी यह राय है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्ति के लिए पर्याप्त संख्या में व्यक्ति उपलब्ध हैं, तो राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि इस धारा के उपबंध, अधिसूचना में विनिर्दिष्ट दिन से और उसके पश्चात्, प्रवृत्त नहीं रहेंगे, और भिन्न-भिन्न द्वीपों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें विनिर्दिष्ट की जा सकेंगी।
(3) इस धारा के उपबंधों के प्रवर्तन की समाप्ति पर, ऐसी समाप्ति के ठीक पहले जिला मजिस्ट्रेट या अपर जिला मजिस्ट्रेट या किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के, जैसी भी स्थिति हो, समक्ष लंबित हर जांच या विचारण ऐसे न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, अंतरित हो जाएगा और उस प्रक्रम से, जो ऐसी समाप्ति के पहले पहुंचा था, उसके द्वारा निपटाया जाएगा।"
अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम:
उपधारा (4) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी,—
(i) इस संहिता के, जैसे वे अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम संघ राज्यक्षेत्रों को लागू हैं, उपबंधों में नीचे दी गई सारणी के स्तंभ (1) में उल्लिखित न्यायालयों के प्रति किसी निर्देश का, जब तक उक्त संघ राज्यक्षेत्रों में सेशन न्यायालय और न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय गठित नहीं कर दिए जाते, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस सारणी के स्तंभ (2) की तत्संबंधी प्रविष्टि में उल्लिखित मजिस्ट्रेट के न्यायालय के प्रति निर्देश है।
सारणी
स्तंभ (1) — स्तंभ (2)
सेशन न्यायालय या सेशन न्यायाधीश या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट — जिला मजिस्ट्रेट
मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट — कार्यपालक मजिस्ट्रेट
(ii) उपधारा (4) के खंड (क) में उल्लिखित कृत्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य होंगे।"
नागालैंड:
उपधारा (4) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, जो सदैव ऐसे ही अंतःस्थापित की गई समझी जाएगी, अर्थात्:—
"(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी,—
(i) इस संहिता के, जैसे वे नागालैंड राज्य को लागू हैं, उपबंधों में नीचे दी गई सारणी के स्तंभ (1) में उल्लिखित न्यायालय और प्राधिकारी के प्रति किसी निर्देश का, जब तक उक्त क्षेत्रों में सेशन न्यायालय और न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय गठित नहीं कर दिए जाते, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस सारणी के स्तंभ (2) की तत्संबंधी प्रविष्टि में उल्लिखित न्यायालय और प्राधिकारी के प्रति निर्देश है।
सारणी
स्तंभ (1) — स्तंभ (2)
सेशन न्यायालय या सेशन न्यायाधीश या मुख्य मजिस्ट्रेट — जिला मजिस्ट्रेट या अपर न्यायिक जिला मजिस्ट्रेट
मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट — कार्यपालक मजिस्ट्रेट
(ii) उपधारा (3) में उल्लिखित न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देशों का, और उपधारा (4) में उल्लिखित, न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य कृत्यों का, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन नियुक्त उपायुक्त, अपर उपायुक्त और उपायुक्त के सहायक के प्रति निर्देश हैं तथा उनके द्वारा प्रयोक्तव्य हैं:
परन्तु उपायुक्त का सहायक न्यायिक मजिस्ट्रेट की ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जो राज्यपाल द्वारा उसमें निहित की जाएं।"
(1) इस संहिता में,—
(क) मजिस्ट्रेट के प्रति किसी ऐसे निर्देश का, जिसके साथ कोई विशेषक शब्द नहीं हैं, यह अर्थ लगाया जाएगा, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, कि वह निर्देश है—
(i) महानगर क्षेत्र से बाहर के किसी क्षेत्र के संबंध में, न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति;
(ii) महानगर क्षेत्र के संबंध में, महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति;
(ख) द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का, महानगर क्षेत्र से बाहर के किसी क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह द्वितीय वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है, और महानगर क्षेत्र के संबंध में, यह कि वह महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(ग) प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का,—
(i) महानगर क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(ii) किसी अन्य क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(घ) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का, महानगर क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है।
(2) इस संहिता में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के प्रति किसी निर्देश का, महानगर क्षेत्र के संबंध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र के लिए महानगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय के प्रति निर्देश है।
(3) जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस संहिता के प्रारंभ से पहले पारित किसी अधिनियमिति में—
(क) प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(ख) द्वितीय वर्ग या तृतीय वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह द्वितीय वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(ग) प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट या मुख्य प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह क्रमशः महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है;
(घ) किसी ऐसे क्षेत्र के प्रति, जो किसी महानगर क्षेत्र में सम्मिलित है, किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह ऐसे महानगर क्षेत्र के प्रति निर्देश है, और ऐसे क्षेत्र के संबंध में प्रथम वर्ग या द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह ऐसे क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले महानगर मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश है।
(4) जहां इस संहिता से भिन्न किसी विधि के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य कृत्य ऐसे मामलों से संबंधित हैं—
(क) जिनमें साक्ष्य का मूल्यांकन या छानबीन अंतर्वलित है, या ऐसा विनिश्चय करना अंतर्वलित है जो किसी व्यक्ति को किसी दंड या शास्ति का, अथवा अन्वेषण, जांच या विचारण के लंबित रहने तक अभिरक्षा में निरोध का भागी बनाता है, या जिसका प्रभाव उसे किसी न्यायालय के समक्ष विचारण के लिए भेजना होगा, वहां वे कृत्य, इस संहिता के उपबंधों के अधीन रहते हुए, न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य होंगे; या
(ख) जो प्रकृति में प्रशासनिक या कार्यपालक हैं, जैसे अनुज्ञप्ति देना, अनुज्ञप्ति का निलंबन या रद्दकरण, अभियोजन की मंजूरी देना या अभियोजन वापस लेना, वहां वे कृत्य, यथापूर्वोक्त रूप में अधीन रहते हुए, कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य होंगे।
राज्य संशोधन
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह:
(1) धारा 3 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"3क. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह से संबंधित विशेष उपबंध—(1) इस संहिता में—
(क) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे जिला मजिस्ट्रेट के प्रति, अथवा जहां राज्य सरकार ऐसा निदेश दे वहां अपर जिला मजिस्ट्रेट के प्रति भी, निर्देश हैं;
(ख) मजिस्ट्रेट, या प्रथम वर्ग या द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट, या प्रथम वर्ग या द्वितीय वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश हैं, जिन्हें राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे।
(2) राज्य सरकार, यदि उसकी यह राय है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्ति के लिए पर्याप्त संख्या में व्यक्ति उपलब्ध हैं, तो राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि इस धारा के उपबंध, अधिसूचना में विनिर्दिष्ट दिन से और उसके पश्चात्, प्रवृत्त नहीं रहेंगे, और भिन्न-भिन्न द्वीपों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें विनिर्दिष्ट की जा सकेंगी।
(3) इस धारा के उपबंधों के प्रवर्तन की समाप्ति पर, ऐसी समाप्ति के ठीक पहले जिला मजिस्ट्रेट या अपर जिला मजिस्ट्रेट या किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के, जैसी भी स्थिति हो, समक्ष लंबित हर जांच या विचारण ऐसे न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, अंतरित हो जाएगा और उस प्रक्रम से, जो ऐसी समाप्ति के पहले पहुंचा था, उसके द्वारा निपटाया जाएगा।"
अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम:
उपधारा (4) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:—
"(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी,—
(i) इस संहिता के, जैसे वे अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम संघ राज्यक्षेत्रों को लागू हैं, उपबंधों में नीचे दी गई सारणी के स्तंभ (1) में उल्लिखित न्यायालयों के प्रति किसी निर्देश का, जब तक उक्त संघ राज्यक्षेत्रों में सेशन न्यायालय और न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय गठित नहीं कर दिए जाते, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस सारणी के स्तंभ (2) की तत्संबंधी प्रविष्टि में उल्लिखित मजिस्ट्रेट के न्यायालय के प्रति निर्देश है।
सारणी
स्तंभ (1) — स्तंभ (2)
सेशन न्यायालय या सेशन न्यायाधीश या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट — जिला मजिस्ट्रेट
मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट — कार्यपालक मजिस्ट्रेट
(ii) उपधारा (4) के खंड (क) में उल्लिखित कृत्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य होंगे।"
नागालैंड:
उपधारा (4) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, जो सदैव ऐसे ही अंतःस्थापित की गई समझी जाएगी, अर्थात्:—
"(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी,—
(i) इस संहिता के, जैसे वे नागालैंड राज्य को लागू हैं, उपबंधों में नीचे दी गई सारणी के स्तंभ (1) में उल्लिखित न्यायालय और प्राधिकारी के प्रति किसी निर्देश का, जब तक उक्त क्षेत्रों में सेशन न्यायालय और न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय गठित नहीं कर दिए जाते, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस सारणी के स्तंभ (2) की तत्संबंधी प्रविष्टि में उल्लिखित न्यायालय और प्राधिकारी के प्रति निर्देश है।
सारणी
स्तंभ (1) — स्तंभ (2)
सेशन न्यायालय या सेशन न्यायाधीश या मुख्य मजिस्ट्रेट — जिला मजिस्ट्रेट या अपर न्यायिक जिला मजिस्ट्रेट
मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट — कार्यपालक मजिस्ट्रेट
(ii) उपधारा (3) में उल्लिखित न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देशों का, और उपधारा (4) में उल्लिखित, न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोक्तव्य कृत्यों का, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन नियुक्त उपायुक्त, अपर उपायुक्त और उपायुक्त के सहायक के प्रति निर्देश हैं तथा उनके द्वारा प्रयोक्तव्य हैं:
परन्तु उपायुक्त का सहायक न्यायिक मजिस्ट्रेट की ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जो राज्यपाल द्वारा उसमें निहित की जाएं।"
नए कानून में
CrPC 3BNSS 3
3. Construction of references.
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