IT Act 77Aअध्याय XI · Offences
धारा 77A · अपराधों का शमन
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) सक्षम अधिकारिता वाला न्यायालय, उन अपराधों से भिन्न अपराधों का शमन कर सकेगा, जिनके लिए इस अधिनियम के अधीन आजीवन या तीन वर्ष से अधिक के कारावास के दंड का उपबंध किया गया है :
परंतु न्यायालय, ऐसे अपराध का वहां शमन नहीं करेगा, जहां अपराधी, उसकी पूर्व दोषसिद्धि के कारण या तो वर्धित दंड का या भिन्न प्रकार के किसी दंड के लिए दायी है :परंतु यह और कि न्यायालय ऐसे किसी अपराध का शमन नहीं करेगा, जहां ऐसा अपराध देश की समाजिक-आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डालता है या अठारह वर्ष की आयु से कम आयु के किसी बालक या किसी स्त्री के संबंध में किया गया है ।
(2) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त व्यक्ति उस न्यायालय में, जिसमें अपराध विचारण के लिए दंडित है, शमन के लिए आवेदन फाइल कर सकेगा और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 265ख और धारा 265ग के उपबंध लागू होंगे ।
परंतु न्यायालय, ऐसे अपराध का वहां शमन नहीं करेगा, जहां अपराधी, उसकी पूर्व दोषसिद्धि के कारण या तो वर्धित दंड का या भिन्न प्रकार के किसी दंड के लिए दायी है :परंतु यह और कि न्यायालय ऐसे किसी अपराध का शमन नहीं करेगा, जहां ऐसा अपराध देश की समाजिक-आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डालता है या अठारह वर्ष की आयु से कम आयु के किसी बालक या किसी स्त्री के संबंध में किया गया है ।
(2) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त व्यक्ति उस न्यायालय में, जिसमें अपराध विचारण के लिए दंडित है, शमन के लिए आवेदन फाइल कर सकेगा और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 265ख और धारा 265ग के उपबंध लागू होंगे ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- आजीवन कारावास
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
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