AICTE Act 4अध्याय II · Establishment of the Council
धारा 4 · सदस्यों का कार्यकाल।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) परिषद के प्रथम गठन पर पदेन सदस्य के अतिरिक्त किसी सदस्य का कार्यकाल पाँच वर्ष होगा और उसके बाद तीन वर्ष होगा।
(2) यदि अध्यक्ष के पद में आकस्मिक रिक्ति उत्पन्न हो जाती है, चाहे उनकी मृत्यु, त्यागपत्र या बीमारी या अन्य अक्षमता के कारण अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थता के कारण, तो उस समय उपाध्यक्ष के पद पर आसीन उपाध्यक्ष अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा और जब तक कि किसी अन्य व्यक्ति को पहले से अध्यक्ष नियुक्त न किया जाए, वह उस व्यक्ति के शेष कार्यकाल के लिए अध्यक्ष का पद धारण करेगा जिसके स्थान पर वह कार्य कर रहा है।
(3) यदि उपाध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य के पद में आकस्मिक रिक्ति उत्पन्न हो जाती है, चाहे उनकी मृत्यु, त्यागपत्र या बीमारी या अन्य अक्षमता के कारण अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थता के कारण, तो ऐसी रिक्ति को केंद्र सरकार द्वारा नई नियुक्ति करके भरा जाएगा और इस प्रकार नियुक्त सदस्य उस व्यक्ति के कार्यकाल के शेष समय के लिए पद धारण करेगा जिसके स्थान पर उसे नियुक्त किया गया है।
(4) उपाध्यक्ष समय-समय पर अध्यक्ष द्वारा सौंपे गए ऐसे कार्यों का निष्पादन करेगा।
(5) सदस्यों द्वारा अपने कार्यों के निर्वहन में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी जैसी निर्धारित की जाए।
(2) यदि अध्यक्ष के पद में आकस्मिक रिक्ति उत्पन्न हो जाती है, चाहे उनकी मृत्यु, त्यागपत्र या बीमारी या अन्य अक्षमता के कारण अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थता के कारण, तो उस समय उपाध्यक्ष के पद पर आसीन उपाध्यक्ष अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा और जब तक कि किसी अन्य व्यक्ति को पहले से अध्यक्ष नियुक्त न किया जाए, वह उस व्यक्ति के शेष कार्यकाल के लिए अध्यक्ष का पद धारण करेगा जिसके स्थान पर वह कार्य कर रहा है।
(3) यदि उपाध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य के पद में आकस्मिक रिक्ति उत्पन्न हो जाती है, चाहे उनकी मृत्यु, त्यागपत्र या बीमारी या अन्य अक्षमता के कारण अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थता के कारण, तो ऐसी रिक्ति को केंद्र सरकार द्वारा नई नियुक्ति करके भरा जाएगा और इस प्रकार नियुक्त सदस्य उस व्यक्ति के कार्यकाल के शेष समय के लिए पद धारण करेगा जिसके स्थान पर उसे नियुक्त किया गया है।
(4) उपाध्यक्ष समय-समय पर अध्यक्ष द्वारा सौंपे गए ऐसे कार्यों का निष्पादन करेगा।
(5) सदस्यों द्वारा अपने कार्यों के निर्वहन में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी जैसी निर्धारित की जाए।
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