PMLA 72अध्याय X · Miscellaneous
धारा 72 · मृत्यु या दिवालियापन की स्थिति में कार्यवाही जारी रखना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहाँ--
(क) किसी व्यक्ति की कोई संपत्ति धारा 8 के तहत कुर्क कर ली गई है और ऐसी संपत्ति को कुर्क करने के आदेश के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की गई है; या
(ख) अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष कोई अपील दायर की गई है, और--
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट मामले में, अपील न्यायाधिकरण में अपील करने से पहले ऐसे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है या उसे दिवालिया घोषित कर दिया जाता है; या
(ii) खंड (ख) में निर्दिष्ट मामले में, अपील लंबित रहने के दौरान ऐसे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है या उसे दिवालिया घोषित कर दिया जाता है।
तब, ऐसे व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधियों या आधिकारिक नियुक्त व्यक्ति या आधिकारिक रिसीवर, जैसा भी मामला हो, के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील करना या, जैसा भी मामला हो, ऐसे व्यक्ति के स्थान पर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील जारी रखना वैध होगा और धारा 26 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, ऐसी अपील पर लागू होंगे या लागू होते रहेंगे।
(2) जहाँ--
(क) अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा निर्णय या आदेश पारित किए जाने के बाद, धारा 42 के तहत उच्च न्यायालय में कोई अपील नहीं की गई है; या
(ख) यदि ऐसी कोई अपील उच्च न्यायालय में दायर की गई हो, तो...
तब--
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट मामले में, अपील दायर करने का हकदार व्यक्ति उच्च न्यायालय में अपील दायर करने से पहले मर जाता है या दिवालिया घोषित हो जाता है, या
(ii) खंड (ख) में निर्दिष्ट मामले में, अपील दायर करने वाला व्यक्ति उच्च न्यायालय के समक्ष अपील लंबित रहने के दौरान मर जाता है या दिवालिया घोषित हो जाता है।
तब, ऐसे व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधियों, या आधिकारिक नियुक्त व्यक्ति या आधिकारिक रिसीवर, जैसा भी मामला हो, के लिए उच्च न्यायालय में अपील करना या ऐसे व्यक्ति के स्थान पर उच्च न्यायालय के समक्ष अपील जारी रखना वैध होगा और धारा 42 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, ऐसी अपील पर लागू होंगे, या लागू होते रहेंगे।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन आधिकारिक असाइनी या आधिकारिक रिसीवर की शक्तियों का प्रयोग उसके द्वारा प्रेसिडेंसी-टाउन दिवालियापन अधिनियम, 1909 (3 ऑफ 1909) या प्रांतीय दिवालियापन अधिनियम, 1920 (5 ऑफ 1920) के प्रावधानों के अधीन किया जाएगा, जैसा भी मामला हो।
(क) किसी व्यक्ति की कोई संपत्ति धारा 8 के तहत कुर्क कर ली गई है और ऐसी संपत्ति को कुर्क करने के आदेश के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की गई है; या
(ख) अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष कोई अपील दायर की गई है, और--
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट मामले में, अपील न्यायाधिकरण में अपील करने से पहले ऐसे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है या उसे दिवालिया घोषित कर दिया जाता है; या
(ii) खंड (ख) में निर्दिष्ट मामले में, अपील लंबित रहने के दौरान ऐसे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है या उसे दिवालिया घोषित कर दिया जाता है।
तब, ऐसे व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधियों या आधिकारिक नियुक्त व्यक्ति या आधिकारिक रिसीवर, जैसा भी मामला हो, के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील करना या, जैसा भी मामला हो, ऐसे व्यक्ति के स्थान पर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील जारी रखना वैध होगा और धारा 26 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, ऐसी अपील पर लागू होंगे या लागू होते रहेंगे।
(2) जहाँ--
(क) अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा निर्णय या आदेश पारित किए जाने के बाद, धारा 42 के तहत उच्च न्यायालय में कोई अपील नहीं की गई है; या
(ख) यदि ऐसी कोई अपील उच्च न्यायालय में दायर की गई हो, तो...
तब--
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट मामले में, अपील दायर करने का हकदार व्यक्ति उच्च न्यायालय में अपील दायर करने से पहले मर जाता है या दिवालिया घोषित हो जाता है, या
(ii) खंड (ख) में निर्दिष्ट मामले में, अपील दायर करने वाला व्यक्ति उच्च न्यायालय के समक्ष अपील लंबित रहने के दौरान मर जाता है या दिवालिया घोषित हो जाता है।
तब, ऐसे व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधियों, या आधिकारिक नियुक्त व्यक्ति या आधिकारिक रिसीवर, जैसा भी मामला हो, के लिए उच्च न्यायालय में अपील करना या ऐसे व्यक्ति के स्थान पर उच्च न्यायालय के समक्ष अपील जारी रखना वैध होगा और धारा 42 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, ऐसी अपील पर लागू होंगे, या लागू होते रहेंगे।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन आधिकारिक असाइनी या आधिकारिक रिसीवर की शक्तियों का प्रयोग उसके द्वारा प्रेसिडेंसी-टाउन दिवालियापन अधिनियम, 1909 (3 ऑफ 1909) या प्रांतीय दिवालियापन अधिनियम, 1920 (5 ऑफ 1920) के प्रावधानों के अधीन किया जाएगा, जैसा भी मामला हो।
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