धारा 461 · जुर्माना वसूलने का वारंट।
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(1) जब किसी अपराधी को जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई गई हो, लेकिन ऐसा कोई भुगतान न किया गया हो, तो सजा सुनाने वाला न्यायालय निम्नलिखित में से किसी एक या दोनों तरीकों से जुर्माने की वसूली के लिए कार्रवाई कर सकता है, अर्थात् वह---
(क) अपराधी की किसी चल संपत्ति की कुर्की और बिक्री द्वारा राशि की वसूली के लिए वारंट जारी करना;
(ख) जिले के कलेक्टर को वारंट जारी करना, जिसमें उसे चूककर्ता की चल या अचल संपत्ति, या दोनों से भू-राजस्व के बकाया के रूप में राशि वसूल करने के लिए अधिकृत किया जाए।
बशर्ते कि, यदि सजा में यह निर्देश दिया गया हो कि जुर्माने का भुगतान न करने पर अपराधी को कारावास दिया जाएगा, और यदि ऐसे अपराधी ने जुर्माने का पूरा भुगतान कर दिया हो, तो कोई भी न्यायालय ऐसा वारंट जारी नहीं करेगा, जब तक कि लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले विशेष कारणों से वह ऐसा करना आवश्यक न समझे, या जब तक कि उसने धारा 395 के तहत जुर्माने में से व्यय या मुआवजे के भुगतान का आदेश न दिया हो।
(2) राज्य सरकार उपधारा (1) के खंड (क) के तहत जारी वारंटों के निष्पादन के तरीके को विनियमित करने और ऐसे वारंट के निष्पादन में कुर्क की गई किसी संपत्ति के संबंध में अपराधी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए किसी भी दावे के त्वरित निर्धारण के लिए नियम बना सकती है।
(3) जहां न्यायालय उपधारा (1) के खंड (ख) के तहत कलेक्टर को वारंट जारी करता है, वहां कलेक्टर भूमि राजस्व के बकाया की वसूली से संबंधित कानून के अनुसार राशि वसूल करेगा, मानो ऐसा वारंट उस कानून के तहत जारी किया गया प्रमाण पत्र हो।
बशर्ते कि ऐसे किसी भी वारंट को अपराधी की गिरफ्तारी या कारावास द्वारा निष्पादित नहीं किया जाएगा।
(क) अपराधी की किसी चल संपत्ति की कुर्की और बिक्री द्वारा राशि की वसूली के लिए वारंट जारी करना;
(ख) जिले के कलेक्टर को वारंट जारी करना, जिसमें उसे चूककर्ता की चल या अचल संपत्ति, या दोनों से भू-राजस्व के बकाया के रूप में राशि वसूल करने के लिए अधिकृत किया जाए।
बशर्ते कि, यदि सजा में यह निर्देश दिया गया हो कि जुर्माने का भुगतान न करने पर अपराधी को कारावास दिया जाएगा, और यदि ऐसे अपराधी ने जुर्माने का पूरा भुगतान कर दिया हो, तो कोई भी न्यायालय ऐसा वारंट जारी नहीं करेगा, जब तक कि लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले विशेष कारणों से वह ऐसा करना आवश्यक न समझे, या जब तक कि उसने धारा 395 के तहत जुर्माने में से व्यय या मुआवजे के भुगतान का आदेश न दिया हो।
(2) राज्य सरकार उपधारा (1) के खंड (क) के तहत जारी वारंटों के निष्पादन के तरीके को विनियमित करने और ऐसे वारंट के निष्पादन में कुर्क की गई किसी संपत्ति के संबंध में अपराधी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए किसी भी दावे के त्वरित निर्धारण के लिए नियम बना सकती है।
(3) जहां न्यायालय उपधारा (1) के खंड (ख) के तहत कलेक्टर को वारंट जारी करता है, वहां कलेक्टर भूमि राजस्व के बकाया की वसूली से संबंधित कानून के अनुसार राशि वसूल करेगा, मानो ऐसा वारंट उस कानून के तहत जारी किया गया प्रमाण पत्र हो।
बशर्ते कि ऐसे किसी भी वारंट को अपराधी की गिरफ्तारी या कारावास द्वारा निष्पादित नहीं किया जाएगा।
पुराने कानून में
BNSS 461CRPC 421
421. Warrant for levy of fine.
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