धारा 142 · सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहने पर कारावास में बंद व्यक्तियों को रिहा करने का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब भी जिला मजिस्ट्रेट, धारा 136 के तहत कार्यपालिका मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी अन्य मामले में, इस राय का हो कि इस अध्याय के तहत जमानत देने में विफल रहने के लिए कैद किसी व्यक्ति को समुदाय या किसी अन्य व्यक्ति को खतरे में डाले बिना रिहा किया जा सकता है, तो वह ऐसे व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दे सकता है।
(2) जब भी किसी व्यक्ति को इस अध्याय के अधीन ज़मानत देने में विफल रहने पर कारावास दिया गया हो, तो उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय, या जहाँ आदेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा दिया गया हो, धारा 136 के तहत कार्यपालिका मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में जिला मजिस्ट्रेट, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ज़मानत की राशि या ज़मानतदारों की संख्या या ज़मानत की मांग की अवधि को कम करने का आदेश दे सकता है।
(3) उपधारा (1) के तहत आदेश ऐसे व्यक्ति को बिना शर्त या ऐसी किसी शर्त पर मुक्त करने का निर्देश दे सकता है जिसे वह व्यक्ति स्वीकार करता है:
बशर्ते कि लगाई गई कोई भी शर्त उस अवधि के समाप्त होने पर प्रभावी नहीं रहेगी जिसके लिए ऐसे व्यक्ति को सुरक्षा देने का आदेश दिया गया था।
(4) राज्य सरकार नियमों द्वारा वे शर्तें निर्धारित कर सकती है जिन पर सशर्त रिहाई की जा सकती है।
(5) यदि किसी व्यक्ति को जिस शर्त पर सेवामुक्त किया गया है, वह शर्त जिला मजिस्ट्रेट की राय में, धारा 136 के तहत कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा किसी अन्य मामले में, जिसके द्वारा सेवामुक्ति का आदेश दिया गया था, या उसके उत्तराधिकारी द्वारा, पूरी नहीं की गई है, तो वह उसे रद्द कर सकता है।
(6) जब उपधारा (5) के तहत सशर्त रिहाई का आदेश रद्द कर दिया गया हो, तो ऐसे व्यक्ति को किसी पुलिस अधिकारी द्वारा बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है, और उसके बाद उसे जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा, यदि आदेश धारा 136 के तहत किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया गया हो, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष।
(7) जब तक ऐसा व्यक्ति मूल आदेश की शर्तों के अनुसार उस अवधि के शेष भाग के लिए ज़मानत नहीं देता जिसके लिए उसे पहली बार हिरासत में लिया गया था या हिरासत में रखने का आदेश दिया गया था (ऐसा भाग रिहाई की शर्तों के उल्लंघन की तारीख और उस तारीख के बीच की अवधि के बराबर माना जाएगा जिस पर, ऐसी सशर्त रिहाई को छोड़कर, वह रिहाई का हकदार होता), जिला मजिस्ट्रेट, धारा 136 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी अन्य मामले में, ऐसे व्यक्ति को शेष भाग की अवधि पूरी करने के लिए कारागार में भेज सकता है।
(8) उपधारा (7) के अधीन कारावास में भेजा गया व्यक्ति, धारा 141 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उक्त आदेश के शेष भाग के लिए मूल आदेश की शर्तों के अनुसार जमानत देने पर किसी भी समय उस न्यायालय या मजिस्ट्रेट को, जिसने ऐसा आदेश दिया था, या उसके उत्तराधिकारी को, रिहा किया जाएगा।
(9) उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय किसी भी समय, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले पर्याप्त कारणों से, इस अध्याय के अंतर्गत निष्पादित शांति बनाए रखने या अच्छे व्यवहार के लिए किसी भी बांड को अपने किसी आदेश द्वारा रद्द कर सकता है, और जिला मजिस्ट्रेट, धारा 136 के अंतर्गत किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी अन्य मामले में ऐसा रद्द कर सकता है, जहां ऐसा बांड उसके आदेश के अंतर्गत या उसके जिले के किसी अन्य न्यायालय के आदेश के अंतर्गत निष्पादित किया गया हो।
(10) इस अध्याय के अंतर्गत बांड निष्पादित करने का आदेश दिए गए किसी अन्य व्यक्ति के शांतिपूर्ण आचरण या अच्छे व्यवहार के लिए कोई ज़मानतदार किसी भी समय ऐसे आदेश देने वाले न्यायालय में बांड रद्द करने के लिए आवेदन कर सकता है और ऐसा आवेदन किए जाने पर, न्यायालय उचित समझे जाने वाला सम्मन या वारंट जारी करेगा, जिसमें उस व्यक्ति को, जिसके लिए ऐसा ज़मानतदार बाध्य है, उपस्थित होने या उसके समक्ष लाए जाने का निर्देश दिया जाएगा।
(2) जब भी किसी व्यक्ति को इस अध्याय के अधीन ज़मानत देने में विफल रहने पर कारावास दिया गया हो, तो उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय, या जहाँ आदेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा दिया गया हो, धारा 136 के तहत कार्यपालिका मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में जिला मजिस्ट्रेट, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ज़मानत की राशि या ज़मानतदारों की संख्या या ज़मानत की मांग की अवधि को कम करने का आदेश दे सकता है।
(3) उपधारा (1) के तहत आदेश ऐसे व्यक्ति को बिना शर्त या ऐसी किसी शर्त पर मुक्त करने का निर्देश दे सकता है जिसे वह व्यक्ति स्वीकार करता है:
बशर्ते कि लगाई गई कोई भी शर्त उस अवधि के समाप्त होने पर प्रभावी नहीं रहेगी जिसके लिए ऐसे व्यक्ति को सुरक्षा देने का आदेश दिया गया था।
(4) राज्य सरकार नियमों द्वारा वे शर्तें निर्धारित कर सकती है जिन पर सशर्त रिहाई की जा सकती है।
(5) यदि किसी व्यक्ति को जिस शर्त पर सेवामुक्त किया गया है, वह शर्त जिला मजिस्ट्रेट की राय में, धारा 136 के तहत कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा किसी अन्य मामले में, जिसके द्वारा सेवामुक्ति का आदेश दिया गया था, या उसके उत्तराधिकारी द्वारा, पूरी नहीं की गई है, तो वह उसे रद्द कर सकता है।
(6) जब उपधारा (5) के तहत सशर्त रिहाई का आदेश रद्द कर दिया गया हो, तो ऐसे व्यक्ति को किसी पुलिस अधिकारी द्वारा बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है, और उसके बाद उसे जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा, यदि आदेश धारा 136 के तहत किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया गया हो, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष।
(7) जब तक ऐसा व्यक्ति मूल आदेश की शर्तों के अनुसार उस अवधि के शेष भाग के लिए ज़मानत नहीं देता जिसके लिए उसे पहली बार हिरासत में लिया गया था या हिरासत में रखने का आदेश दिया गया था (ऐसा भाग रिहाई की शर्तों के उल्लंघन की तारीख और उस तारीख के बीच की अवधि के बराबर माना जाएगा जिस पर, ऐसी सशर्त रिहाई को छोड़कर, वह रिहाई का हकदार होता), जिला मजिस्ट्रेट, धारा 136 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी अन्य मामले में, ऐसे व्यक्ति को शेष भाग की अवधि पूरी करने के लिए कारागार में भेज सकता है।
(8) उपधारा (7) के अधीन कारावास में भेजा गया व्यक्ति, धारा 141 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उक्त आदेश के शेष भाग के लिए मूल आदेश की शर्तों के अनुसार जमानत देने पर किसी भी समय उस न्यायालय या मजिस्ट्रेट को, जिसने ऐसा आदेश दिया था, या उसके उत्तराधिकारी को, रिहा किया जाएगा।
(9) उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय किसी भी समय, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले पर्याप्त कारणों से, इस अध्याय के अंतर्गत निष्पादित शांति बनाए रखने या अच्छे व्यवहार के लिए किसी भी बांड को अपने किसी आदेश द्वारा रद्द कर सकता है, और जिला मजिस्ट्रेट, धारा 136 के अंतर्गत किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी अन्य मामले में ऐसा रद्द कर सकता है, जहां ऐसा बांड उसके आदेश के अंतर्गत या उसके जिले के किसी अन्य न्यायालय के आदेश के अंतर्गत निष्पादित किया गया हो।
(10) इस अध्याय के अंतर्गत बांड निष्पादित करने का आदेश दिए गए किसी अन्य व्यक्ति के शांतिपूर्ण आचरण या अच्छे व्यवहार के लिए कोई ज़मानतदार किसी भी समय ऐसे आदेश देने वाले न्यायालय में बांड रद्द करने के लिए आवेदन कर सकता है और ऐसा आवेदन किए जाने पर, न्यायालय उचित समझे जाने वाला सम्मन या वारंट जारी करेगा, जिसमें उस व्यक्ति को, जिसके लिए ऐसा ज़मानतदार बाध्य है, उपस्थित होने या उसके समक्ष लाए जाने का निर्देश दिया जाएगा।
पुराने कानून में
BNSS 142CRPC 123
123.Power to release persons imprisoned for failing to give security.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

