SRFAESI Act 30Dअध्याय V · Offences and Penalties
धारा 30D · जुर्माने की वसूली।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [ 30D. जुर्माने की वसूली। --(1) धारा 30A के तहत लगाया गया कोई भी जुर्माना "वसूली योग्य राशि" के रूप में वसूल किया जाएगा और वसूली योग्य राशि के भुगतान की मांग करने वाला नोटिस दोषी व्यक्ति को दिए जाने की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर देय होगा और यदि ऐसा व्यक्ति इस अवधि के भीतर भुगतान करने में विफल रहता है, तो रिजर्व बैंक वसूली के उद्देश्य से,--
(क) रिजर्व बैंक में चूक करने वाले व्यक्ति के चालू खाते (यदि कोई हो) से धनराशि डेबिट करना या रिजर्व बैंक की पुस्तकों में ऐसे व्यक्ति के खाते में रखी गई प्रतिभूतियों (यदि कोई हो) का परिसमापन करना;
(ख) चूककर्ता व्यक्ति को जिस व्यक्ति से कोई राशि देय है, उसे नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें उस व्यक्ति को चूककर्ता व्यक्ति को देय राशि में से वसूली योग्य राशि के बराबर राशि की कटौती करने और उस राशि का भुगतान रिजर्व बैंक को करने के लिए कहा जाएगा।
(2) उपधारा (4) में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, उपधारा (1) के खंड (ख) के तहत जारी की गई सूचना प्रत्येक व्यक्ति पर बाध्यकारी होगी जिसे यह जारी की गई है, और जहां ऐसी सूचना डाकघर, बैंक या बीमा कंपनी को जारी की जाती है, वहां भुगतान करने से पहले किसी प्रविष्टि या पृष्ठांकन के उद्देश्य से कोई पासबुक, जमा रसीद, पॉलिसी या कोई अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा, भले ही इसके विपरीत कोई नियम, प्रथा या आवश्यकता हो।
(3) उपधारा (1) के तहत नोटिस जारी करने की तिथि के बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी राशि के संबंध में कोई भी दावा, ऐसे नोटिस में निहित मांग के विरुद्ध शून्य होगा।
(4) यदि कोई व्यक्ति, जिसे उपधारा (1) के अधीन सूचना भेजी गई है, शपथपूर्वक यह कहकर सूचना पर आपत्ति करता है कि मांगी गई राशि या उसका कोई भाग चूककर्ता व्यक्ति को देय नहीं है, या उसके पास चूककर्ता व्यक्ति के लिए या उसके खाते में कोई धन नहीं है, तो इस धारा में निहित कोई बात ऐसे व्यक्ति को ऐसी राशि या उसके भाग का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं करेगी।
(5) यदि यह पाया जाता है कि उपधारा (4) के अंतर्गत किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया कथन सारगर्भित विवरण में असत्य है, तो ऐसा व्यक्ति सूचना की तिथि को चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति अपनी स्वयं की देयता की सीमा तक या चूक करने वाले व्यक्ति द्वारा रिजर्व बैंक को देय वसूली योग्य राशि की सीमा तक, जो भी कम हो, रिजर्व बैंक के प्रति व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा।
(6) रिजर्व बैंक किसी भी समय उप-धारा (1) के तहत जारी किसी भी नोटिस में संशोधन कर सकता है या उसे रद्द कर सकता है या ऐसे नोटिस के अनुसरण में भुगतान करने के लिए समय बढ़ा सकता है।
(7) रिजर्व बैंक इस धारा के तहत जारी नोटिस के अनुपालन में उसे भुगतान की गई किसी भी राशि के लिए रसीद जारी करेगा और इस प्रकार भुगतान करने वाला व्यक्ति भुगतान की गई राशि की सीमा तक चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति अपने दायित्व से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।
(8) इस धारा के तहत नोटिस प्राप्त होने के बाद चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति किसी भी दायित्व का निर्वहन करने वाला कोई भी व्यक्ति रिजर्व बैंक के प्रति व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा--
(क) चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति अपनी स्वयं की देयता की सीमा तक, जिसका निर्वहन इस प्रकार किया गया है; या
(ख) चूककर्ता व्यक्ति द्वारा रिज़र्व बैंक को देय वसूली योग्य राशि की सीमा तक, इनमें से जो भी कम हो।
(9) यदि इस धारा के अंतर्गत जिस व्यक्ति को नोटिस भेजा गया है, वह रिज़र्व बैंक को उसके अनुसार भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे नोटिस में निर्दिष्ट राशि के संबंध में चूक करने वाला व्यक्ति माना जाएगा और इस धारा में दिए गए तरीके से राशि की वसूली के लिए उसके विरुद्ध कार्रवाई या कार्यवाही की जा सकती है।
(10) रिजर्व बैंक, उस क्षेत्र में अधिकार क्षेत्र रखने वाले प्रधान सिविल न्यायालय के माध्यम से वसूली योग्य राशि की वसूली लागू कर सकता है जहां पंजीकृत कार्यालय या प्रधान कार्यालय या चूक करने वाले व्यक्ति का मुख्य व्यवसाय स्थल या ऐसे व्यक्ति का सामान्य निवास स्थान स्थित है, मानो रिजर्व बैंक द्वारा जारी नोटिस न्यायालय का निर्णय हो।
(11) उपधारा (10) के तहत कोई भी वसूली तब तक लागू नहीं की जाएगी, जब तक कि इस संबंध में अधिकृत रिजर्व बैंक के किसी अधिकारी द्वारा प्रधान सिविल न्यायालय में आवेदन न किया जाए, जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि दोषी व्यक्ति वसूली योग्य राशि का भुगतान करने में विफल रहा है।]
(क) रिजर्व बैंक में चूक करने वाले व्यक्ति के चालू खाते (यदि कोई हो) से धनराशि डेबिट करना या रिजर्व बैंक की पुस्तकों में ऐसे व्यक्ति के खाते में रखी गई प्रतिभूतियों (यदि कोई हो) का परिसमापन करना;
(ख) चूककर्ता व्यक्ति को जिस व्यक्ति से कोई राशि देय है, उसे नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें उस व्यक्ति को चूककर्ता व्यक्ति को देय राशि में से वसूली योग्य राशि के बराबर राशि की कटौती करने और उस राशि का भुगतान रिजर्व बैंक को करने के लिए कहा जाएगा।
(2) उपधारा (4) में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, उपधारा (1) के खंड (ख) के तहत जारी की गई सूचना प्रत्येक व्यक्ति पर बाध्यकारी होगी जिसे यह जारी की गई है, और जहां ऐसी सूचना डाकघर, बैंक या बीमा कंपनी को जारी की जाती है, वहां भुगतान करने से पहले किसी प्रविष्टि या पृष्ठांकन के उद्देश्य से कोई पासबुक, जमा रसीद, पॉलिसी या कोई अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा, भले ही इसके विपरीत कोई नियम, प्रथा या आवश्यकता हो।
(3) उपधारा (1) के तहत नोटिस जारी करने की तिथि के बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी राशि के संबंध में कोई भी दावा, ऐसे नोटिस में निहित मांग के विरुद्ध शून्य होगा।
(4) यदि कोई व्यक्ति, जिसे उपधारा (1) के अधीन सूचना भेजी गई है, शपथपूर्वक यह कहकर सूचना पर आपत्ति करता है कि मांगी गई राशि या उसका कोई भाग चूककर्ता व्यक्ति को देय नहीं है, या उसके पास चूककर्ता व्यक्ति के लिए या उसके खाते में कोई धन नहीं है, तो इस धारा में निहित कोई बात ऐसे व्यक्ति को ऐसी राशि या उसके भाग का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं करेगी।
(5) यदि यह पाया जाता है कि उपधारा (4) के अंतर्गत किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया कथन सारगर्भित विवरण में असत्य है, तो ऐसा व्यक्ति सूचना की तिथि को चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति अपनी स्वयं की देयता की सीमा तक या चूक करने वाले व्यक्ति द्वारा रिजर्व बैंक को देय वसूली योग्य राशि की सीमा तक, जो भी कम हो, रिजर्व बैंक के प्रति व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा।
(6) रिजर्व बैंक किसी भी समय उप-धारा (1) के तहत जारी किसी भी नोटिस में संशोधन कर सकता है या उसे रद्द कर सकता है या ऐसे नोटिस के अनुसरण में भुगतान करने के लिए समय बढ़ा सकता है।
(7) रिजर्व बैंक इस धारा के तहत जारी नोटिस के अनुपालन में उसे भुगतान की गई किसी भी राशि के लिए रसीद जारी करेगा और इस प्रकार भुगतान करने वाला व्यक्ति भुगतान की गई राशि की सीमा तक चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति अपने दायित्व से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।
(8) इस धारा के तहत नोटिस प्राप्त होने के बाद चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति किसी भी दायित्व का निर्वहन करने वाला कोई भी व्यक्ति रिजर्व बैंक के प्रति व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा--
(क) चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति अपनी स्वयं की देयता की सीमा तक, जिसका निर्वहन इस प्रकार किया गया है; या
(ख) चूककर्ता व्यक्ति द्वारा रिज़र्व बैंक को देय वसूली योग्य राशि की सीमा तक, इनमें से जो भी कम हो।
(9) यदि इस धारा के अंतर्गत जिस व्यक्ति को नोटिस भेजा गया है, वह रिज़र्व बैंक को उसके अनुसार भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे नोटिस में निर्दिष्ट राशि के संबंध में चूक करने वाला व्यक्ति माना जाएगा और इस धारा में दिए गए तरीके से राशि की वसूली के लिए उसके विरुद्ध कार्रवाई या कार्यवाही की जा सकती है।
(10) रिजर्व बैंक, उस क्षेत्र में अधिकार क्षेत्र रखने वाले प्रधान सिविल न्यायालय के माध्यम से वसूली योग्य राशि की वसूली लागू कर सकता है जहां पंजीकृत कार्यालय या प्रधान कार्यालय या चूक करने वाले व्यक्ति का मुख्य व्यवसाय स्थल या ऐसे व्यक्ति का सामान्य निवास स्थान स्थित है, मानो रिजर्व बैंक द्वारा जारी नोटिस न्यायालय का निर्णय हो।
(11) उपधारा (10) के तहत कोई भी वसूली तब तक लागू नहीं की जाएगी, जब तक कि इस संबंध में अधिकृत रिजर्व बैंक के किसी अधिकारी द्वारा प्रधान सिविल न्यायालय में आवेदन न किया जाए, जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि दोषी व्यक्ति वसूली योग्य राशि का भुगतान करने में विफल रहा है।]
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