ESI Act 46अध्याय V · Benefits
धारा 46 · प्रसुविधाएं
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(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए यह है कि [यथास्थिति, बीमाकृत व्यक्ति, उनके आश्रित या इसके पश्चात् वर्णित व्यक्ति] निम्नलिखित प्रसुविधाओं के हकदार होंगे, अर्थात्ः-
(क) “किसी भी बीमाकृत व्यक्ति को कालिक संदाय (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् बीमारी-प्रसुविधा कहा गया है), उसकी ऐसी बीमारी की दशा में जिसे सम्यक् रूप से नियुक्त किसी चिकित्सा व्यवसायी ने [या किसी अन्य व्यक्ति ने, जो ऐसी अर्हताएं और अनुभव रखता हो, जैसे निगम विनियमों द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे] प्रमाणित किया हो;
[(ख) प्रसवावस्था की या गर्भपात की या गर्भावस्था, प्रसवावस्था, समयपूर्व शिशु-जन्म या गर्भपात से उद्भूत बीमारी की दशा में किसी ऐसी बीमाकृत स्त्री को कालिक संदाय (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् प्रसूति-प्रसुविधा कहा गया है), जिसे विनियमों द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किए गए प्राधिकारी ने ऐसे संदायों के लिए पात्र प्रमाणित किया हो;]
(ग) किसी ऐसे बीमाकृत व्यक्ति को कालिक संदाय (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् निःशक्तता-प्रसुविधा कहा गया है), जो इस अधिनियम के अधीन कर्मचारी के रूप में उसे हुई किसी नियोजन क्षति के परिणामस्वरूप हुई निःशक्तता से ग्रस्त है और जिसे विनियमों द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किए गए प्राधिकारी ने ऐसे संदायों के लिए पात्र प्रमाणित किया हो;
(घ) किसी ऐसे बीमाकृत व्यक्ति के, जो इस अधिनियम के अधीन के कर्मचारी के रूप में उसे हुई किसी नियोजन-क्षति के परिणामस्वरूप मर जाता है, ऐसे आश्रितों को कालिक संदाय (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् आश्रित-प्रसुविधा कहा गया है), जो इस अधिनियम के अधीन प्रतिकर के हकदार है; ***
(ङ) बीमाकृत व्यक्तियों के लिए चिकित्सीय उपचार और परिचर्या (जिसे इसमें इसके पश्चात् चिकित्सा-प्रसविधा कहा गया है); 1[तथा]
1[(च) मृत बीमाकृत व्यक्ति की अंत्येष्टि पर व्यय के लिए ऐसे बीमाकृत व्यक्ति के, जो मर गया है, कुटुम्ब के ज्येष्ठतम उत्तरजीवी सदस्य को, या जहां बीमाकृत व्यक्ति का कोई कुटुम्ब नहीं था या वह अपनी मृत्यु के समय अपने कुटुम्ब के साथ नहीं रह रहा था वहां उस व्यक्ति को, जो मृत बीमाकृत व्यक्ति की अंत्येष्टि पर वस्तुतः व्यय उपगत करता है, संदाय (जिसे [अंत्येष्टि व्यय] के रूप में जाना जाएगा) :]
परन्तु ऐसे संदाय की रकम [सौ रुपए] से अधिक नहीं होगी और ऐसे संदाय के लिए दावा बीमाकृत व्यक्ति की मृत्यु के तीन मास के भीतर, या ऐसी विस्तारित कालावधि के भीतर, जिसे निगम या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी या प्राधिकारी अनुज्ञात करे, किया जाएगा ।
(2) निगम, समुचित सरकार की प्रार्थना पर और ऐसी शर्तों पर, जो विनियमों में अधिकथित की जाएं, चिकित्सा-प्रसुविधा बीमाकृत व्यक्ति के कुटुम्ब के लिए भी विस्तारित कर सकेगा ।
(क) “किसी भी बीमाकृत व्यक्ति को कालिक संदाय (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् बीमारी-प्रसुविधा कहा गया है), उसकी ऐसी बीमारी की दशा में जिसे सम्यक् रूप से नियुक्त किसी चिकित्सा व्यवसायी ने [या किसी अन्य व्यक्ति ने, जो ऐसी अर्हताएं और अनुभव रखता हो, जैसे निगम विनियमों द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे] प्रमाणित किया हो;
[(ख) प्रसवावस्था की या गर्भपात की या गर्भावस्था, प्रसवावस्था, समयपूर्व शिशु-जन्म या गर्भपात से उद्भूत बीमारी की दशा में किसी ऐसी बीमाकृत स्त्री को कालिक संदाय (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् प्रसूति-प्रसुविधा कहा गया है), जिसे विनियमों द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किए गए प्राधिकारी ने ऐसे संदायों के लिए पात्र प्रमाणित किया हो;]
(ग) किसी ऐसे बीमाकृत व्यक्ति को कालिक संदाय (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् निःशक्तता-प्रसुविधा कहा गया है), जो इस अधिनियम के अधीन कर्मचारी के रूप में उसे हुई किसी नियोजन क्षति के परिणामस्वरूप हुई निःशक्तता से ग्रस्त है और जिसे विनियमों द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किए गए प्राधिकारी ने ऐसे संदायों के लिए पात्र प्रमाणित किया हो;
(घ) किसी ऐसे बीमाकृत व्यक्ति के, जो इस अधिनियम के अधीन के कर्मचारी के रूप में उसे हुई किसी नियोजन-क्षति के परिणामस्वरूप मर जाता है, ऐसे आश्रितों को कालिक संदाय (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् आश्रित-प्रसुविधा कहा गया है), जो इस अधिनियम के अधीन प्रतिकर के हकदार है; ***
(ङ) बीमाकृत व्यक्तियों के लिए चिकित्सीय उपचार और परिचर्या (जिसे इसमें इसके पश्चात् चिकित्सा-प्रसविधा कहा गया है); 1[तथा]
1[(च) मृत बीमाकृत व्यक्ति की अंत्येष्टि पर व्यय के लिए ऐसे बीमाकृत व्यक्ति के, जो मर गया है, कुटुम्ब के ज्येष्ठतम उत्तरजीवी सदस्य को, या जहां बीमाकृत व्यक्ति का कोई कुटुम्ब नहीं था या वह अपनी मृत्यु के समय अपने कुटुम्ब के साथ नहीं रह रहा था वहां उस व्यक्ति को, जो मृत बीमाकृत व्यक्ति की अंत्येष्टि पर वस्तुतः व्यय उपगत करता है, संदाय (जिसे [अंत्येष्टि व्यय] के रूप में जाना जाएगा) :]
परन्तु ऐसे संदाय की रकम [सौ रुपए] से अधिक नहीं होगी और ऐसे संदाय के लिए दावा बीमाकृत व्यक्ति की मृत्यु के तीन मास के भीतर, या ऐसी विस्तारित कालावधि के भीतर, जिसे निगम या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी या प्राधिकारी अनुज्ञात करे, किया जाएगा ।
(2) निगम, समुचित सरकार की प्रार्थना पर और ऐसी शर्तों पर, जो विनियमों में अधिकथित की जाएं, चिकित्सा-प्रसुविधा बीमाकृत व्यक्ति के कुटुम्ब के लिए भी विस्तारित कर सकेगा ।
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