ESI Act 10अध्याय · Corporation, Standing Committee and Medical Benefit Council
धारा 10 · चिकित्सा प्रसुविधा परिषद्
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केन्द्रीय सरकार एक चिकित्सा प्रसुविधा परिषद् गठित करेगी जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगीः-
(क) कर्मचारी राज्य बीमा निगम का महानिदेशक, पदेन, अध्यक्ष;
(ख) स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, पदेन, सह-अध्यक्ष;
(ग) निगम का चिकित्सा आयुक्त, पदेन;
(घ) [ [(संघ राज्यक्षेत्रों से भिन्न) जिन राज्यों] में यह अधिनियम प्रवृत्त है] उनमें से हर एक का प्रतिनिधित्व करने वाला एक-एक सदस्य, जिसे सम्पृक्त राज्य सरकार [नियुक्त] करेगी;
(ङ) नियोजकों का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन सदस्य, जिन्हें केन्द्रीय सरकार नियोजकों के ऐसे संगठनों से परामर्श करके, जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए मान्यता दी जाए, नामनिर्देशित करेगी;
(च) कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन सदस्य, जिन्हें केन्द्रीय सरकार कर्मचारियों के ऐसे संगठनों से परामर्श करके जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा उस प्रयोजन के लिए मान्यता दी जाए, 3[नियुक्त] करेगी; तथा
(छ) चिकित्सा वृत्ति का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन सदस्य, जिनमें कम से कम एक स्त्री होगी, जिन्हें केन्द्रीय सरकार चिकित्सा व्यवसायियों के ऐसे संगठनों से, जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा उस प्रयोजन के लिए मान्यता दी जाए, परामर्श करके 3[नियुक्त] करेगी ।
(2) इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, चिकित्सा प्रसुविधा परिषद् के उस सदस्य की, जो उपधारा (1) के खंड (क) से (घ) तक में से किसी में भी निर्दिष्ट सदस्य से भिन्न है, पदावधि उस तारीख से चार वर्ष की होगी, जिस तारीख को 3[उसकी नियुक्ति] अधिसूचित किया जाएः
परन्तु चिकित्सा प्रसुविधा परिषद् का सदस्य चार वर्ष की उक्त कालावधि का अवसान हो जाने पर भी तब तक पद धारण किए रहेगा जब तक उसके उत्तरवर्ती 3[की नियुक्ति] अधिसूचित नहीं कर दी जाती ।
(3) चिकित्सा-प्रसुविधा परिषद् का उपधारा (1) के खंड (ख) और खण्ड (घ) में निर्दिष्ट सदस्य, उसे 3[नियुक्त] करने वाली सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।
(क) कर्मचारी राज्य बीमा निगम का महानिदेशक, पदेन, अध्यक्ष;
(ख) स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, पदेन, सह-अध्यक्ष;
(ग) निगम का चिकित्सा आयुक्त, पदेन;
(घ) [ [(संघ राज्यक्षेत्रों से भिन्न) जिन राज्यों] में यह अधिनियम प्रवृत्त है] उनमें से हर एक का प्रतिनिधित्व करने वाला एक-एक सदस्य, जिसे सम्पृक्त राज्य सरकार [नियुक्त] करेगी;
(ङ) नियोजकों का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन सदस्य, जिन्हें केन्द्रीय सरकार नियोजकों के ऐसे संगठनों से परामर्श करके, जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए मान्यता दी जाए, नामनिर्देशित करेगी;
(च) कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन सदस्य, जिन्हें केन्द्रीय सरकार कर्मचारियों के ऐसे संगठनों से परामर्श करके जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा उस प्रयोजन के लिए मान्यता दी जाए, 3[नियुक्त] करेगी; तथा
(छ) चिकित्सा वृत्ति का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन सदस्य, जिनमें कम से कम एक स्त्री होगी, जिन्हें केन्द्रीय सरकार चिकित्सा व्यवसायियों के ऐसे संगठनों से, जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा उस प्रयोजन के लिए मान्यता दी जाए, परामर्श करके 3[नियुक्त] करेगी ।
(2) इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, चिकित्सा प्रसुविधा परिषद् के उस सदस्य की, जो उपधारा (1) के खंड (क) से (घ) तक में से किसी में भी निर्दिष्ट सदस्य से भिन्न है, पदावधि उस तारीख से चार वर्ष की होगी, जिस तारीख को 3[उसकी नियुक्ति] अधिसूचित किया जाएः
परन्तु चिकित्सा प्रसुविधा परिषद् का सदस्य चार वर्ष की उक्त कालावधि का अवसान हो जाने पर भी तब तक पद धारण किए रहेगा जब तक उसके उत्तरवर्ती 3[की नियुक्ति] अधिसूचित नहीं कर दी जाती ।
(3) चिकित्सा-प्रसुविधा परिषद् का उपधारा (1) के खंड (ख) और खण्ड (घ) में निर्दिष्ट सदस्य, उसे 3[नियुक्त] करने वाली सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।
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