Electricity Act 153अध्याय XV · Special Courts
धारा 153 · विशेष न्यायालयों का गठन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य सरकार, धारा 135 से 140 और धारा 150 में निर्दिष्ट अपराधों के शीघ्र निपटारे के प्रयोजन से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों के लिए, जैसा कि अधिसूचना में निर्दिष्ट किया जाए, उतने विशेष न्यायालयों का गठन कर सकती है।
(2) विशेष न्यायालय में एक एकल न्यायाधीश होगा जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय की सहमति से की जाएगी।
(3) कोई व्यक्ति विशेष न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए योग्य नहीं होगा, जब तक कि वह ऐसी नियुक्ति से ठीक पहले अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न रहा हो।
(4) यदि किसी विशेष न्यायालय के न्यायाधीश का पद रिक्त हो, या ऐसा न्यायाधीश उस विशेष न्यायालय के सामान्य बैठक स्थल से अनुपस्थित हो, या वह बीमारी या किसी अन्य कारण से अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ हो, तो विशेष न्यायालय में किसी भी अत्यावश्यक कार्य का निपटारा इस प्रकार किया जाएगा--
(क) विशेष न्यायालय में अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने वाले किसी न्यायाधीश द्वारा;
(ख) जहां ऐसा कोई अन्य न्यायाधीश उपलब्ध न हो, उपधारा (1) के तहत अधिसूचित विशेष न्यायालय के सामान्य बैठक स्थल पर अधिकार क्षेत्र रखने वाले जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देशानुसार।
राज्य संशोधन
महाराष्ट्र.--
अधिनियम (36 ऑफ 2003) की धारा 153 का संशोधन।-- मुख्य अधिनियम की धारा 153 में उपधारा (4) के बाद निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:--
(5) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी क्षेत्र या क्षेत्रों के लिए कोई विशेष न्यायालय गठित नहीं किया गया है, वहां उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों के लिए नामित एक या एक से अधिक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश इस अधिनियम के अधीन विशेष न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करेंगे और इस प्रकार नामित कोई भी न्यायाधीश इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए विशेष न्यायालय माना जाएगा।
[महाराष्ट्र अधिनियम 36, 2005, धारा 3 देखें ]
(2) विशेष न्यायालय में एक एकल न्यायाधीश होगा जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय की सहमति से की जाएगी।
(3) कोई व्यक्ति विशेष न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए योग्य नहीं होगा, जब तक कि वह ऐसी नियुक्ति से ठीक पहले अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न रहा हो।
(4) यदि किसी विशेष न्यायालय के न्यायाधीश का पद रिक्त हो, या ऐसा न्यायाधीश उस विशेष न्यायालय के सामान्य बैठक स्थल से अनुपस्थित हो, या वह बीमारी या किसी अन्य कारण से अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ हो, तो विशेष न्यायालय में किसी भी अत्यावश्यक कार्य का निपटारा इस प्रकार किया जाएगा--
(क) विशेष न्यायालय में अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने वाले किसी न्यायाधीश द्वारा;
(ख) जहां ऐसा कोई अन्य न्यायाधीश उपलब्ध न हो, उपधारा (1) के तहत अधिसूचित विशेष न्यायालय के सामान्य बैठक स्थल पर अधिकार क्षेत्र रखने वाले जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देशानुसार।
राज्य संशोधन
महाराष्ट्र.--
अधिनियम (36 ऑफ 2003) की धारा 153 का संशोधन।-- मुख्य अधिनियम की धारा 153 में उपधारा (4) के बाद निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:--
(5) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी क्षेत्र या क्षेत्रों के लिए कोई विशेष न्यायालय गठित नहीं किया गया है, वहां उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों के लिए नामित एक या एक से अधिक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश इस अधिनियम के अधीन विशेष न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करेंगे और इस प्रकार नामित कोई भी न्यायाधीश इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए विशेष न्यायालय माना जाएगा।
[महाराष्ट्र अधिनियम 36, 2005, धारा 3 देखें ]
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