DPDP Act 28अध्याय VI · Powers, Functions and Procedure to Be Followed by Board
धारा 28 · बोर्ड द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) बोर्ड एक स्वतंत्र निकाय के रूप में कार्य करेगा और जहाँ तक संभव हो, एक डिजिटल कार्यालय के रूप में कार्य करेगा, जिसमें शिकायतों की प्राप्ति और उनके संबंध में निर्णयों का आवंटन, सुनवाई और घोषणा डिजिटल रूप से होगी, और ऐसे तकनीकी-कानूनी उपाय अपनाएगा जो निर्धारित किए जा सकते हैं।
(2) बोर्ड, धारा 27 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट सूचना, शिकायत, संदर्भ या निर्देशों की प्राप्ति पर, इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।
(3) बोर्ड यह निर्धारित करेगा कि जांच आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं।
(4) यदि बोर्ड यह निर्धारित करता है कि अपर्याप्त आधार हैं, तो वह लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर कार्यवाही बंद कर सकता है।
(5) यदि बोर्ड यह निर्धारित करता है कि जांच करने के लिए पर्याप्त आधार हैं, तो वह लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, किसी व्यक्ति के मामलों की जांच कर सकता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन कर रहा है या कर चुका है।
(6) बोर्ड प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए ऐसी जांच करेगा तथा ऐसी जांच के दौरान अपने कार्यों के कारणों को दर्ज करेगा।
(7) इस अधिनियम के तहत अपने कार्यों के निर्वहन के प्रयोजनों के लिए, बोर्ड को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के तहत सिविल न्यायालय में निहित वही शक्तियां प्राप्त होंगी, जो निम्नलिखित मामलों से संबंधित हैं---
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति को लागू करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता वाले हलफनामे के साक्ष्य प्राप्त करना;
(ग) किसी भी डेटा, बही, दस्तावेज, रजिस्टर, लेखा बही या किसी अन्य दस्तावेज का निरीक्षण करना; और
(घ) ऐसे अन्य मामले जो निर्धारित किए जा सकें।
(8) बोर्ड या उसके अधिकारी किसी भी परिसर में प्रवेश को नहीं रोकेंगे या किसी भी उपकरण या किसी भी वस्तु को हिरासत में नहीं लेंगे जो किसी व्यक्ति के दिन-प्रतिदिन के कामकाज को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है।
(9) बोर्ड इस धारा के प्रयोजनों के लिए किसी पुलिस अधिकारी या केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी अधिकारी की सेवाओं की मांग कर सकता है और ऐसे प्रत्येक अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी मांग का पालन करे।
(10) जांच के दौरान, यदि बोर्ड आवश्यक समझे, तो वह लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद अंतरिम आदेश जारी कर सकता है।
(11) जांच पूरी होने पर और संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद, बोर्ड लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से या तो कार्यवाही बंद कर सकता है या धारा 33 के अनुसार आगे बढ़ सकता है।
(12) शिकायत प्राप्त होने के बाद किसी भी चरण में, यदि बोर्ड की राय है कि शिकायत झूठी या तुच्छ है, तो वह शिकायतकर्ता को चेतावनी जारी कर सकता है या उस पर जुर्माना लगा सकता है।
(2) बोर्ड, धारा 27 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट सूचना, शिकायत, संदर्भ या निर्देशों की प्राप्ति पर, इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।
(3) बोर्ड यह निर्धारित करेगा कि जांच आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं।
(4) यदि बोर्ड यह निर्धारित करता है कि अपर्याप्त आधार हैं, तो वह लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर कार्यवाही बंद कर सकता है।
(5) यदि बोर्ड यह निर्धारित करता है कि जांच करने के लिए पर्याप्त आधार हैं, तो वह लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, किसी व्यक्ति के मामलों की जांच कर सकता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन कर रहा है या कर चुका है।
(6) बोर्ड प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए ऐसी जांच करेगा तथा ऐसी जांच के दौरान अपने कार्यों के कारणों को दर्ज करेगा।
(7) इस अधिनियम के तहत अपने कार्यों के निर्वहन के प्रयोजनों के लिए, बोर्ड को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के तहत सिविल न्यायालय में निहित वही शक्तियां प्राप्त होंगी, जो निम्नलिखित मामलों से संबंधित हैं---
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति को लागू करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता वाले हलफनामे के साक्ष्य प्राप्त करना;
(ग) किसी भी डेटा, बही, दस्तावेज, रजिस्टर, लेखा बही या किसी अन्य दस्तावेज का निरीक्षण करना; और
(घ) ऐसे अन्य मामले जो निर्धारित किए जा सकें।
(8) बोर्ड या उसके अधिकारी किसी भी परिसर में प्रवेश को नहीं रोकेंगे या किसी भी उपकरण या किसी भी वस्तु को हिरासत में नहीं लेंगे जो किसी व्यक्ति के दिन-प्रतिदिन के कामकाज को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है।
(9) बोर्ड इस धारा के प्रयोजनों के लिए किसी पुलिस अधिकारी या केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी अधिकारी की सेवाओं की मांग कर सकता है और ऐसे प्रत्येक अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी मांग का पालन करे।
(10) जांच के दौरान, यदि बोर्ड आवश्यक समझे, तो वह लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद अंतरिम आदेश जारी कर सकता है।
(11) जांच पूरी होने पर और संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद, बोर्ड लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से या तो कार्यवाही बंद कर सकता है या धारा 33 के अनुसार आगे बढ़ सकता है।
(12) शिकायत प्राप्त होने के बाद किसी भी चरण में, यदि बोर्ड की राय है कि शिकायत झूठी या तुच्छ है, तो वह शिकायतकर्ता को चेतावनी जारी कर सकता है या उस पर जुर्माना लगा सकता है।
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