IC Act 23अध्याय II · Of Contracts, Voidable Contracts and Void Agreements
धारा 23 · किन बातों और उद्देश्यों को वैध माना जा सकता है और किनको नहीं।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
किसी समझौते का प्रतिफल या उद्देश्य वैध होता है, जब तक कि—
यह कानून द्वारा निषिद्ध है 1 ; या
इस प्रकार का है कि यदि इसकी अनुमति दी गई तो यह किसी भी कानून के प्रावधानों को विफल कर देगा; या
धोखाधड़ी है; या
इसमें किसी अन्य व्यक्ति या उसकी संपत्ति को चोट पहुंचाना शामिल है या निहित है; या
न्यायालय इसे अनैतिक या सार्वजनिक नीति के विरुद्ध मानता है।
इन सभी मामलों में, समझौते का प्रतिफल या उद्देश्य गैरकानूनी माना जाता है। ऐसा प्रत्येक समझौता जिसका उद्देश्य या प्रतिफल गैरकानूनी हो, अमान्य होता है।
रेखांकन
(a) A अपना घर B को 10,000 रुपये में बेचने के लिए सहमत है। यहाँ B द्वारा 10,000 रुपये का भुगतान करने का वादा, A के घर बेचने के वादे का प्रतिफल है, और A द्वारा घर बेचने का वादा, B द्वारा 10,000 रुपये का भुगतान करने के वादे का प्रतिफल है। ये वैध प्रतिफल हैं।
(ख) ए, बी को छह महीने के अंत में 1,000 रुपये का भुगतान करने का वचन देता है, यदि सी, जिस पर बी का यह ऋणी है, भुगतान करने में विफल रहता है। बी, सी को तदनुसार समय देने का वचन देता है। यहाँ, प्रत्येक पक्ष का वचन दूसरे पक्ष के वचन के लिए प्रतिफल है, और ये वैध प्रतिफल हैं।
(ग) A, B द्वारा उसे दी गई एक निश्चित राशि के बदले में, B को उसके जहाज के किसी निश्चित यात्रा के दौरान क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति करने का वचन देता है। यहाँ, A का वचन B के भुगतान का प्रतिफल है और B का भुगतान A के वचन का प्रतिफल है, और ये वैध प्रतिफल हैं।
(घ) ए, बी के बच्चे के भरण-पोषण का वचन देता है, और बी, ए को इसके लिए प्रतिवर्ष 1,000 रुपये देने का वचन देता है। यहाँ, प्रत्येक पक्ष का वचन दूसरे पक्ष के वचन के लिए प्रतिफल है। ये वैध प्रतिफल हैं।
(ई) ए, बी और सी धोखाधड़ी से अर्जित या अर्जित किए जाने वाले लाभों को आपस में विभाजित करने के लिए एक समझौता करते हैं। यह समझौता अमान्य है, क्योंकि इसका उद्देश्य गैरकानूनी है।
(f) ए, बी को लोक सेवा में रोजगार दिलाने का वादा करता है और बी, ए को 1,000 रुपये देने का वादा करता है। यह समझौता शून्य है, क्योंकि इसके लिए दिया गया प्रतिफल गैरकानूनी है।
(g) ए, किसी भूस्वामी का एजेंट होने के नाते, अपने स्वामी की जानकारी के बिना, धन के बदले बी को उसकी भूमि का पट्टा दिलाने का समझौता करता है। ए और बी के बीच का यह समझौता अमान्य है, क्योंकि इसमें ए द्वारा अपने स्वामी के साथ छल द्वारा धोखाधड़ी निहित है।
(h) A, B से वादा करता है कि वह B के विरुद्ध डकैती के लिए दायर किया गया मुकदमा वापस ले लेगा, और B लूटी गई वस्तुओं का मूल्य लौटाने का वादा करता है। यह समझौता अमान्य है, क्योंकि इसका उद्देश्य गैरकानूनी है।
(i) विधायिका के एक अधिनियम के प्रावधानों के तहत राजस्व बकाया के लिए संपत्ति बेची जाती है, जिसके द्वारा डिफ़ॉल्टर को संपत्ति खरीदने से प्रतिबंधित किया गया है। बी, ए के साथ एक समझौते के तहत क्रेता बन जाता है और ए से भुगतान की गई कीमत प्राप्त करने पर संपत्ति ए को हस्तांतरित करने के लिए सहमत होता है। यह समझौता अमान्य है, क्योंकि यह लेन-देन को, वास्तव में, डिफ़ॉल्टर द्वारा खरीद बना देता है और इस प्रकार कानून के उद्देश्य को विफल कर देता है।
(j) ए, जो बी का मुख्तार है, सी के पक्ष में बी पर अपने प्रभाव का प्रयोग करने का वादा करता है, और सी ए को 1,000 रुपये देने का वादा करता है। यह समझौता अनैतिक होने के कारण अमान्य है।
(k) A अपनी बेटी को B के यहाँ रखैल के रूप में रखने के लिए सहमत होती है। यह समझौता अनैतिक होने के कारण अमान्य है, हालाँकि भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) के तहत यह कार्य दंडनीय नहीं हो सकता है।
यह कानून द्वारा निषिद्ध है 1 ; या
इस प्रकार का है कि यदि इसकी अनुमति दी गई तो यह किसी भी कानून के प्रावधानों को विफल कर देगा; या
धोखाधड़ी है; या
इसमें किसी अन्य व्यक्ति या उसकी संपत्ति को चोट पहुंचाना शामिल है या निहित है; या
न्यायालय इसे अनैतिक या सार्वजनिक नीति के विरुद्ध मानता है।
इन सभी मामलों में, समझौते का प्रतिफल या उद्देश्य गैरकानूनी माना जाता है। ऐसा प्रत्येक समझौता जिसका उद्देश्य या प्रतिफल गैरकानूनी हो, अमान्य होता है।
रेखांकन
(a) A अपना घर B को 10,000 रुपये में बेचने के लिए सहमत है। यहाँ B द्वारा 10,000 रुपये का भुगतान करने का वादा, A के घर बेचने के वादे का प्रतिफल है, और A द्वारा घर बेचने का वादा, B द्वारा 10,000 रुपये का भुगतान करने के वादे का प्रतिफल है। ये वैध प्रतिफल हैं।
(ख) ए, बी को छह महीने के अंत में 1,000 रुपये का भुगतान करने का वचन देता है, यदि सी, जिस पर बी का यह ऋणी है, भुगतान करने में विफल रहता है। बी, सी को तदनुसार समय देने का वचन देता है। यहाँ, प्रत्येक पक्ष का वचन दूसरे पक्ष के वचन के लिए प्रतिफल है, और ये वैध प्रतिफल हैं।
(ग) A, B द्वारा उसे दी गई एक निश्चित राशि के बदले में, B को उसके जहाज के किसी निश्चित यात्रा के दौरान क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति करने का वचन देता है। यहाँ, A का वचन B के भुगतान का प्रतिफल है और B का भुगतान A के वचन का प्रतिफल है, और ये वैध प्रतिफल हैं।
(घ) ए, बी के बच्चे के भरण-पोषण का वचन देता है, और बी, ए को इसके लिए प्रतिवर्ष 1,000 रुपये देने का वचन देता है। यहाँ, प्रत्येक पक्ष का वचन दूसरे पक्ष के वचन के लिए प्रतिफल है। ये वैध प्रतिफल हैं।
(ई) ए, बी और सी धोखाधड़ी से अर्जित या अर्जित किए जाने वाले लाभों को आपस में विभाजित करने के लिए एक समझौता करते हैं। यह समझौता अमान्य है, क्योंकि इसका उद्देश्य गैरकानूनी है।
(f) ए, बी को लोक सेवा में रोजगार दिलाने का वादा करता है और बी, ए को 1,000 रुपये देने का वादा करता है। यह समझौता शून्य है, क्योंकि इसके लिए दिया गया प्रतिफल गैरकानूनी है।
(g) ए, किसी भूस्वामी का एजेंट होने के नाते, अपने स्वामी की जानकारी के बिना, धन के बदले बी को उसकी भूमि का पट्टा दिलाने का समझौता करता है। ए और बी के बीच का यह समझौता अमान्य है, क्योंकि इसमें ए द्वारा अपने स्वामी के साथ छल द्वारा धोखाधड़ी निहित है।
(h) A, B से वादा करता है कि वह B के विरुद्ध डकैती के लिए दायर किया गया मुकदमा वापस ले लेगा, और B लूटी गई वस्तुओं का मूल्य लौटाने का वादा करता है। यह समझौता अमान्य है, क्योंकि इसका उद्देश्य गैरकानूनी है।
(i) विधायिका के एक अधिनियम के प्रावधानों के तहत राजस्व बकाया के लिए संपत्ति बेची जाती है, जिसके द्वारा डिफ़ॉल्टर को संपत्ति खरीदने से प्रतिबंधित किया गया है। बी, ए के साथ एक समझौते के तहत क्रेता बन जाता है और ए से भुगतान की गई कीमत प्राप्त करने पर संपत्ति ए को हस्तांतरित करने के लिए सहमत होता है। यह समझौता अमान्य है, क्योंकि यह लेन-देन को, वास्तव में, डिफ़ॉल्टर द्वारा खरीद बना देता है और इस प्रकार कानून के उद्देश्य को विफल कर देता है।
(j) ए, जो बी का मुख्तार है, सी के पक्ष में बी पर अपने प्रभाव का प्रयोग करने का वादा करता है, और सी ए को 1,000 रुपये देने का वादा करता है। यह समझौता अनैतिक होने के कारण अमान्य है।
(k) A अपनी बेटी को B के यहाँ रखैल के रूप में रखने के लिए सहमत होती है। यह समझौता अनैतिक होने के कारण अमान्य है, हालाँकि भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) के तहत यह कार्य दंडनीय नहीं हो सकता है।
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