IC Act 2अध्याय 0 · Preliminary
धारा 2 · व्याख्या-खंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में निम्नलिखित शब्दों और अभिव्यक्तियों का प्रयोग निम्नलिखित अर्थों में किया गया है, जब तक कि संदर्भ से विपरीत आशय स्पष्ट न हो:—
(क) जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को किसी कार्य को करने या न करने की अपनी इच्छा व्यक्त करता है, ताकि उस दूसरे व्यक्ति की सहमति प्राप्त हो सके, तो उसे प्रस्ताव करना कहा जाता है;
(ख) जब प्रस्ताव रखने वाला व्यक्ति उस पर अपनी सहमति व्यक्त करता है, तो प्रस्ताव स्वीकृत माना जाता है। स्वीकृत होने पर प्रस्ताव एक वादा बन जाता है;
(ग) प्रस्ताव रखने वाले व्यक्ति को "प्रस्तावक" कहा जाता है, और प्रस्ताव स्वीकार करने वाले व्यक्ति को "प्रस्तावक" कहा जाता है;
(घ) जब वचनदाता की इच्छा पर, वचनग्राही या कोई अन्य व्यक्ति कुछ करता है या करने से परहेज करता है, या करता है या करने से परहेज करता है, या करने या करने से परहेज करने का वचन देता है, तो ऐसा कार्य या परहेज या वचन वचन के लिए प्रतिफल कहलाता है;
(ई) प्रत्येक प्रतिज्ञा और प्रतिज्ञाओं का प्रत्येक समूह, जो एक दूसरे के लिए प्रतिफल का निर्माण करते हैं, एक समझौता है;
(f) वे प्रतिज्ञाएँ जो एक दूसरे के लिए प्रतिफल या प्रतिफल का हिस्सा बनती हैं, पारस्परिक प्रतिज्ञाएँ कहलाती हैं;
(जी) कानून द्वारा लागू न किया जा सकने वाला समझौता शून्य कहलाता है;
(h) कानून द्वारा लागू करने योग्य समझौता एक अनुबंध है;
(i) ऐसा समझौता जो किसी एक या अधिक पक्षकारों के विकल्प पर कानून द्वारा लागू करने योग्य हो, लेकिन दूसरे या अन्य पक्षकारों के विकल्प पर नहीं, वह निरस्त करने योग्य अनुबंध है;
(j) कोई अनुबंध जो कानून द्वारा लागू करने योग्य नहीं रह जाता है, वह लागू करने योग्य न रहने पर शून्य हो जाता है।
(क) जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को किसी कार्य को करने या न करने की अपनी इच्छा व्यक्त करता है, ताकि उस दूसरे व्यक्ति की सहमति प्राप्त हो सके, तो उसे प्रस्ताव करना कहा जाता है;
(ख) जब प्रस्ताव रखने वाला व्यक्ति उस पर अपनी सहमति व्यक्त करता है, तो प्रस्ताव स्वीकृत माना जाता है। स्वीकृत होने पर प्रस्ताव एक वादा बन जाता है;
(ग) प्रस्ताव रखने वाले व्यक्ति को "प्रस्तावक" कहा जाता है, और प्रस्ताव स्वीकार करने वाले व्यक्ति को "प्रस्तावक" कहा जाता है;
(घ) जब वचनदाता की इच्छा पर, वचनग्राही या कोई अन्य व्यक्ति कुछ करता है या करने से परहेज करता है, या करता है या करने से परहेज करता है, या करने या करने से परहेज करने का वचन देता है, तो ऐसा कार्य या परहेज या वचन वचन के लिए प्रतिफल कहलाता है;
(ई) प्रत्येक प्रतिज्ञा और प्रतिज्ञाओं का प्रत्येक समूह, जो एक दूसरे के लिए प्रतिफल का निर्माण करते हैं, एक समझौता है;
(f) वे प्रतिज्ञाएँ जो एक दूसरे के लिए प्रतिफल या प्रतिफल का हिस्सा बनती हैं, पारस्परिक प्रतिज्ञाएँ कहलाती हैं;
(जी) कानून द्वारा लागू न किया जा सकने वाला समझौता शून्य कहलाता है;
(h) कानून द्वारा लागू करने योग्य समझौता एक अनुबंध है;
(i) ऐसा समझौता जो किसी एक या अधिक पक्षकारों के विकल्प पर कानून द्वारा लागू करने योग्य हो, लेकिन दूसरे या अन्य पक्षकारों के विकल्प पर नहीं, वह निरस्त करने योग्य अनुबंध है;
(j) कोई अनुबंध जो कानून द्वारा लागू करने योग्य नहीं रह जाता है, वह लागू करने योग्य न रहने पर शून्य हो जाता है।
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