HUP Act 3अध्याय II · Alteration of Boundaries
धारा 3 · अस्थिर सीमाओं को स्थिर सीमाओं से प्रतिस्थापित करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) निर्धारित तिथि से हरियाणा राज्य के करनाल और सोनीपत जिलों और उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ जिलों के बीच की सीमा तथा हरियाणा राज्य के गुड़गांव जिले और उत्तर प्रदेश राज्य के बुलंदशहर और अलीगढ़ जिलों के बीच की सीमा, जो वर्तमान में यमुना नदी की गहरी धारा है, को निश्चित सीमाओं से परिवर्तित और प्रतिस्थापित किया जाएगा।
(2) उक्त निश्चित सीमाओं का सीमांकन केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में नियुक्त प्राधिकरण द्वारा इस प्रकार किया जाएगा कि वे अनुसूची में वर्णित निश्चित सीमाओं के अनुरूप हों।
(3) ऐसे सीमांकन के प्रयोजनों के लिए,—
(क) अनुसूची में दी गई निश्चित सीमा के विवरण के किसी भाग की व्याख्या से संबंधित किसी मामले पर उक्त प्राधिकारी का निर्णय अंतिम होगा;
(ख) उक्त प्राधिकारी को उन बिंदुओं का स्थान निर्धारित करने का अधिकार होगा जिन पर सीमा स्तंभों का निर्माण किया जाएगा और उस राज्य सरकार को निर्दिष्ट करने का अधिकार होगा जो ऐसे बिंदुओं पर सीमा स्तंभों के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगी, ऐसी विशिष्टताओं के अनुसार जैसा कि वह प्राधिकारी इंगित करे (समान विशिष्टताओं वाले स्तंभों को, जहां तक संभव हो, दोनों राज्य सरकारों के बीच समान रूप से विभाजित किया जाएगा), इन मामलों के संबंध में उक्त प्राधिकारी का निर्णय अंतिम होगा;
(ग) उक्त प्राधिकारी और ऐसे प्राधिकारी द्वारा निर्दिष्ट किसी भी व्यक्ति के लिए अनुसूची में वर्णित किसी भी निश्चित सीमा के निकटवर्ती क्षेत्र में प्रवेश करना और उसका सर्वेक्षण करना तथा अन्य सभी आवश्यक कार्य करना वैध होगा।
(4) उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, निर्धारित सीमाओं के दोनों ओर और उनके आसपास के क्षेत्रों के मानचित्र भी तैयार करेगा, जिनमें निम्नलिखित दर्शाया जाएगा—
(क) वर्तमान गहरी जलधारा रेखा और उससे संबंधित निश्चित सीमा; और
(ख) संबंधित राज्य सरकार द्वारा अपने राजस्व अभिलेखों के संदर्भ में निर्धारित सीमा के दोनों ओर स्थित गांवों के नाम और सीमाएं।
और इसकी प्रमाणित प्रतियां केंद्र सरकार और हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों को भेजें।
(2) उक्त निश्चित सीमाओं का सीमांकन केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में नियुक्त प्राधिकरण द्वारा इस प्रकार किया जाएगा कि वे अनुसूची में वर्णित निश्चित सीमाओं के अनुरूप हों।
(3) ऐसे सीमांकन के प्रयोजनों के लिए,—
(क) अनुसूची में दी गई निश्चित सीमा के विवरण के किसी भाग की व्याख्या से संबंधित किसी मामले पर उक्त प्राधिकारी का निर्णय अंतिम होगा;
(ख) उक्त प्राधिकारी को उन बिंदुओं का स्थान निर्धारित करने का अधिकार होगा जिन पर सीमा स्तंभों का निर्माण किया जाएगा और उस राज्य सरकार को निर्दिष्ट करने का अधिकार होगा जो ऐसे बिंदुओं पर सीमा स्तंभों के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगी, ऐसी विशिष्टताओं के अनुसार जैसा कि वह प्राधिकारी इंगित करे (समान विशिष्टताओं वाले स्तंभों को, जहां तक संभव हो, दोनों राज्य सरकारों के बीच समान रूप से विभाजित किया जाएगा), इन मामलों के संबंध में उक्त प्राधिकारी का निर्णय अंतिम होगा;
(ग) उक्त प्राधिकारी और ऐसे प्राधिकारी द्वारा निर्दिष्ट किसी भी व्यक्ति के लिए अनुसूची में वर्णित किसी भी निश्चित सीमा के निकटवर्ती क्षेत्र में प्रवेश करना और उसका सर्वेक्षण करना तथा अन्य सभी आवश्यक कार्य करना वैध होगा।
(4) उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, निर्धारित सीमाओं के दोनों ओर और उनके आसपास के क्षेत्रों के मानचित्र भी तैयार करेगा, जिनमें निम्नलिखित दर्शाया जाएगा—
(क) वर्तमान गहरी जलधारा रेखा और उससे संबंधित निश्चित सीमा; और
(ख) संबंधित राज्य सरकार द्वारा अपने राजस्व अभिलेखों के संदर्भ में निर्धारित सीमा के दोनों ओर स्थित गांवों के नाम और सीमाएं।
और इसकी प्रमाणित प्रतियां केंद्र सरकार और हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों को भेजें।
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