Limitation Act 30अध्याय V · Miscellaneous
धारा 30 · उन मुकदमों आदि के लिए प्रावधान, जिनके लिए निर्धारित अवधि भारतीय सीमा अधिनियम, 1908 द्वारा निर्धारित अवधि से कम है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी,--
(क) कोई भी मुकदमा जिसके लिए परिसीमा अवधि भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) द्वारा निर्धारित परिसीमा अवधि से कम है, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद [अगले सात वर्ष] की अवधि के भीतर या भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) द्वारा ऐसे मुकदमे के लिए निर्धारित अवधि के भीतर, जो भी अवधि पहले समाप्त हो, दायर किया जा सकता है:
2. बशर्ते कि यदि किसी ऐसे वाद के संबंध में, उक्त सात वर्ष की अवधि भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) के तहत उसके लिए निर्धारित परिसीमा अवधि से पहले समाप्त हो जाती है, और उक्त सात वर्ष की अवधि, भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) के तहत ऐसे वाद के संबंध में परिसीमा अवधि के उस हिस्से सहित, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले ही समाप्त हो चुका है, इस अधिनियम के तहत ऐसे वाद के लिए निर्धारित अवधि से कम है, तो वाद इस अधिनियम के तहत उसके लिए निर्धारित परिसीमा अवधि के भीतर दायर किया जा सकता है;]
(ख) कोई भी अपील या आवेदन जिसके लिए परिसीमा अवधि भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) द्वारा निर्धारित परिसीमा अवधि से कम है, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद अगले नब्बे दिनों की अवधि के भीतर या भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 द्वारा ऐसी अपील या आवेदन के लिए निर्धारित अवधि के भीतर प्रस्तुत या किया जा सकता है, जो भी अवधि पहले समाप्त हो।
राज्य संशोधन
जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश)।--
धारा 30ए का सम्मिलन।-- धारा 30 के स्थान पर निम्नलिखित धारा सम्मिलित की जाए, अर्थात्:--
30ए. उन मुकदमों आदि के लिए प्रावधान, जिनके लिए निर्धारित अवधि संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा निर्धारित अवधि से कम है।-- इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी,--
(क) कोई भी मुकदमा जिसके लिए परिसीमा अवधि संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा निर्धारित परिसीमा अवधि से कम है, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रारंभ होने के बाद एक वर्ष की अवधि के भीतर या संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा ऐसे मुकदमे के लिए निर्धारित अवधि के भीतर, जो भी अवधि पहले समाप्त हो, दायर किया जा सकता है:
बशर्ते कि यदि किसी ऐसे मुकदमे के संबंध में, उक्त एक वर्ष की अवधि, संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम (अब निरस्त) के तहत उसके लिए निर्धारित परिसीमा अवधि से पहले समाप्त हो जाती है, और उक्त एक वर्ष की अवधि, उक्त अधिनियम के तहत ऐसे मुकदमे के संबंध में परिसीमा अवधि के उस हिस्से सहित, जो जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रारंभ होने से पहले ही समाप्त हो चुका है, परिसीमा अधिनियम, 1963 के तहत ऐसे मुकदमे के लिए निर्धारित अवधि से कम है, तो मुकदमा परिसीमा अधिनियम, 1963 के तहत उसके लिए निर्धारित परिसीमा अवधि के भीतर दायर किया जा सकता है;
(ख) कोई भी अपील या आवेदन जिसके लिए परिसीमा अवधि संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा निर्धारित परिसीमा अवधि से कम है, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रारंभ होने के बाद अगले नब्बे दिनों की अवधि के भीतर या संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा ऐसी अपील या आवेदन के लिए निर्धारित अवधि के भीतर, जो भी अवधि पहले समाप्त हो, प्रस्तुत या किया जा सकता है।
[ जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकूलन) आदेश, 2020, अधिसूचना संख्या एसओ 1123(ई) दिनांक (18-3-2020) और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकूलन) आदेश, 2020, अधिसूचना संख्या एसओ 3774(ई), दिनांक (23-10-2020) के अनुसार।]
(क) कोई भी मुकदमा जिसके लिए परिसीमा अवधि भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) द्वारा निर्धारित परिसीमा अवधि से कम है, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद [अगले सात वर्ष] की अवधि के भीतर या भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) द्वारा ऐसे मुकदमे के लिए निर्धारित अवधि के भीतर, जो भी अवधि पहले समाप्त हो, दायर किया जा सकता है:
2. बशर्ते कि यदि किसी ऐसे वाद के संबंध में, उक्त सात वर्ष की अवधि भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) के तहत उसके लिए निर्धारित परिसीमा अवधि से पहले समाप्त हो जाती है, और उक्त सात वर्ष की अवधि, भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) के तहत ऐसे वाद के संबंध में परिसीमा अवधि के उस हिस्से सहित, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले ही समाप्त हो चुका है, इस अधिनियम के तहत ऐसे वाद के लिए निर्धारित अवधि से कम है, तो वाद इस अधिनियम के तहत उसके लिए निर्धारित परिसीमा अवधि के भीतर दायर किया जा सकता है;]
(ख) कोई भी अपील या आवेदन जिसके लिए परिसीमा अवधि भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 (1908 का 9) द्वारा निर्धारित परिसीमा अवधि से कम है, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के बाद अगले नब्बे दिनों की अवधि के भीतर या भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1908 द्वारा ऐसी अपील या आवेदन के लिए निर्धारित अवधि के भीतर प्रस्तुत या किया जा सकता है, जो भी अवधि पहले समाप्त हो।
राज्य संशोधन
जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश)।--
धारा 30ए का सम्मिलन।-- धारा 30 के स्थान पर निम्नलिखित धारा सम्मिलित की जाए, अर्थात्:--
30ए. उन मुकदमों आदि के लिए प्रावधान, जिनके लिए निर्धारित अवधि संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा निर्धारित अवधि से कम है।-- इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी,--
(क) कोई भी मुकदमा जिसके लिए परिसीमा अवधि संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा निर्धारित परिसीमा अवधि से कम है, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रारंभ होने के बाद एक वर्ष की अवधि के भीतर या संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा ऐसे मुकदमे के लिए निर्धारित अवधि के भीतर, जो भी अवधि पहले समाप्त हो, दायर किया जा सकता है:
बशर्ते कि यदि किसी ऐसे मुकदमे के संबंध में, उक्त एक वर्ष की अवधि, संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम (अब निरस्त) के तहत उसके लिए निर्धारित परिसीमा अवधि से पहले समाप्त हो जाती है, और उक्त एक वर्ष की अवधि, उक्त अधिनियम के तहत ऐसे मुकदमे के संबंध में परिसीमा अवधि के उस हिस्से सहित, जो जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रारंभ होने से पहले ही समाप्त हो चुका है, परिसीमा अधिनियम, 1963 के तहत ऐसे मुकदमे के लिए निर्धारित अवधि से कम है, तो मुकदमा परिसीमा अधिनियम, 1963 के तहत उसके लिए निर्धारित परिसीमा अवधि के भीतर दायर किया जा सकता है;
(ख) कोई भी अपील या आवेदन जिसके लिए परिसीमा अवधि संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा निर्धारित परिसीमा अवधि से कम है, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रारंभ होने के बाद अगले नब्बे दिनों की अवधि के भीतर या संवत 1995 के परिसीमा अधिनियम द्वारा ऐसी अपील या आवेदन के लिए निर्धारित अवधि के भीतर, जो भी अवधि पहले समाप्त हो, प्रस्तुत या किया जा सकता है।
[ जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकूलन) आदेश, 2020, अधिसूचना संख्या एसओ 1123(ई) दिनांक (18-3-2020) और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकूलन) आदेश, 2020, अधिसूचना संख्या एसओ 3774(ई), दिनांक (23-10-2020) के अनुसार।]
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