Copyright Act 52अध्याय XI · Infringement of Copyright
धारा 52 · कतिपय कार्यों का प्रतिलिप्यधिकार का अतिलंघन न होना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) निम्नलिखित कार्य प्रतिलिप्यधिकार का अतिलंघन गठित नहीं करेंगे, अर्थात्:-
(क) किसी ऐसी कृति का, जो कंप्यूटर प्रोग्राम नहीं है, निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए उचित उपयोग-
(i) निजी या वैयक्तिक उपयोग, जिसके अंतर्गत अनुसंधान है;
(ii) उस कृति की या किसी अन्य कृति की समालोचना या पुनर्विलोकन;
(iii) सामयिक घटनाओं और सामयिक क्रियाकलापों की रिपोर्टिंग, जिसके अंतर्गत सार्वजनिक रूप से दिए गए किसी व्याख्यान की रिपोर्टिंग है ।
स्पष्टीकरण-इस खंड में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए किसी कृति का किसी इलैक्ट्रानिक माध्यम में भंडारण, जिसके अंतर्गत ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम का आनुषंगिक भंडारण भी है जो स्वयं उक्त प्रयोजनों के लिए अतिलंघनकारी प्रति नहीं है, प्रतिलिप्यधिकार का अतिलंघन गठित नहीं करेगा ।
(कक) किसी कंप्यूटर प्रोग्राम की प्रति के विधिपूर्ण कब्जे वाले व्यक्ति द्वारा ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम की प्रति से प्रतियां या अनुकूलन बनाया जाना,-
(i) जिससे कि उस कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग उस प्रयोजन के लिए किया जा सके जिसके लिए वह प्रदाय किया गया था; या
(ii) प्रतिस्थापक प्रति बनाना, जिससे कि उस कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग केवल उस प्रयोजन के लिए किया जा सके जिसके लिए वह प्रदाय किया गया था, हानि, नाश या क्षति के विरुद्ध एकमात्र अस्थायी संरक्षण के रूप में;
(कख) ऐसा कोई कार्य करना जो उस कंप्यूटर प्रोग्राम के विधिपूर्ण कब्जे वाले किसी व्यक्ति द्वारा स्वतंत्र रूप से सृजित कंप्यूटर प्रोग्राम की अन्य प्रोग्रामों के साथ अंतःप्रचालनीयता का प्रचालन करने के लिए आवश्यक सूचना अभिप्राप्त करने के लिए आवश्यक है, परंतु यह कि ऐसी सूचना अन्यथा सहज उपलब्ध न हो;
(कग) किसी कंप्यूटर प्रोग्राम के कार्यकरण का ऐसे प्रकार्यों को करते समय, जो उन प्रयोजनों के लिए आवश्यक हैं जिनके लिए वह कंप्यूटर प्रोग्राम प्रदाय किया गया था, अवलोकन, अध्ययन या परीक्षण करना, ताकि उन विचारों और सिद्धांतों का अवधारण किया जा सके जो उस प्रोग्राम के किन्हीं तत्वों को लागू हो सकते हैं;
(कघ) विधिपूर्वक अभिप्राप्त प्रति से किसी कंप्यूटर प्रोग्राम की प्रतियां या अनुकूलन अवाणिज्यिक वैयक्तिक उपयोग के लिए बनाना;
(ख) किसी कृति या प्रस्तुतीकरण का, इलैक्ट्रानिक पारेषण की या जनता को संसूचना की विशुद्धतः तकनीकी प्रक्रिया के रूप में, अस्थायी या आनुषंगिक भंडारण;
(ग) ऐसे स्थानों में, जहां अधिकारधारी द्वारा इलैक्ट्रानिक कड़ियों, अभिगम या समेकन का अभिव्यक्त रूप से प्रतिषेध नहीं किया गया है, ऐसी कड़ियां, अभिगम या समेकन उपलब्ध कराने के प्रयोजन के लिए किसी कृति या प्रस्तुतीकरण का अस्थायी या आनुषंगिक भंडारण, जब तक कि उसके लिए उत्तरदायी व्यक्ति को यह ज्ञात न हो या यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार न हों कि ऐसा भंडारण किसी अतिलंघनकारी प्रति का है:
परंतु यदि प्रति के भंडारण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को उस कृति के प्रतिलिप्यधिकार के स्वामी से यह अभिकथन करते हुए लिखित परिवाद प्राप्त होता है कि ऐसा अस्थायी या आनुषंगिक भंडारण अतिलंघनकारी है, तो भंडारण के लिए उत्तरदायी ऐसा व्यक्ति इक्कीस दिन की अवधि तक या जब तक उसे किसी सक्षम न्यायालय से ऐसा आदेश प्राप्त नहीं हो जाता जो उसे ऐसा अभिगम सुकर बनाने से अवरुद्ध करता है, ऐसा अभिगम सुकर बनाने से विरत रहेगा, और यदि इक्कीस दिन की ऐसी अवधि के अवसान से पूर्व ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं होता है तो वह ऐसा अभिगम सुकर बनाना जारी रख सकेगा;
(घ) किसी न्यायिक कार्यवाही के प्रयोजन के लिए या किसी न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्ट के प्रयोजन के लिए किसी कृति का पुनरुत्पादन;
(ङ) किसी विधान-मंडल के सचिवालय द्वारा अथवा जहां विधान-मंडल के दो सदन हैं वहां विधान-मंडल के किसी एक सदन के सचिवालय द्वारा, उस विधान-मंडल के सदस्यों के अनन्य उपयोग के लिए तैयार की गई किसी कृति का पुनरुत्पादन या प्रकाशन;
(च) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अनुसार तैयार की गई या प्रदाय की गई किसी प्रमाणित प्रति में किसी कृति का पुनरुत्पादन;
(छ) किसी प्रकाशित साहित्यिक या नाट्य कृति के समुचित उद्धरणों का जनता के समक्ष पठन या सस्वर पाठ;
(ज) साहित्यिक या नाट्य कृतियों से, जो स्वयं ऐसे उपयोग के लिए प्रकाशित नहीं की गई हैं और जिनमें प्रतिलिप्यधिकार अस्तित्वशील है, लघु उद्धरणों का ऐसे संकलन में प्रकाशन जो मुख्यतः प्रतिलिप्यधिकाररहित सामग्री से मिलकर बना है और जो सद्भावपूर्वक शैक्षिक उपयोग के लिए आशयित है तथा जिसे शीर्षक में और प्रकाशक द्वारा या उसकी ओर से जारी किए गए किसी विज्ञापन में इस प्रकार वर्णित किया गया है:
परंतु उसी रचयिता की कृतियों से ऐसे दो से अधिक उद्धरण उसी प्रकाशक द्वारा पांच वर्ष की किसी अवधि के दौरान प्रकाशित नहीं किए जाएंगे ।
स्पष्टीकरण-संयुक्त रचयिताधिकार की कृति की दशा में, इस खंड में कृतियों से उद्धरणों के प्रति निर्देशों के अंतर्गत उन उद्धरणों के रचयिताओं में से एक या अधिक की कृतियों से अथवा उन रचयिताओं में से एक या अधिक द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के सहयोग से रचित कृतियों से उद्धरणों के प्रति निर्देश भी होंगे;
(झ) किसी कृति का पुनरुत्पादन-
(i) किसी अध्यापक या विद्यार्थी द्वारा प्रशिक्षण के अनुक्रम में; या
(ii) ऐसा पुनरुत्पादन जो किसी परीक्षा में उत्तर दिए जाने वाले प्रश्नों का भाग है; या
(iii) ऐसे प्रश्नों के उत्तरों में पुनरुत्पादन;
(ञ) किसी शैक्षिक संस्था के क्रियाकलापों के अनुक्रम में, उस संस्था के कर्मचारिवृंद और विद्यार्थियों द्वारा किसी साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति का अथवा किसी चलचित्र फिल्म या किसी ध्वनि अभिलेखन का प्रस्तुतीकरण, यदि श्रोतागण ऐसे कर्मचारिवृंद और विद्यार्थियों, विद्यार्थियों के माता-पिता और संरक्षकों तथा उस संस्था के कार्यकलापों से संबद्ध व्यक्तियों तक ही सीमित हैं, अथवा ऐसे श्रोतागण को किसी चलचित्र फिल्म या ध्वनि अभिलेखन की संसूचना;
(न) ध्वनि अभिलेखन का, उसके निम्नलिखित उपयोग द्वारा,-
(i) ऐसे आवासीय परिसर में (जो कोई होटल या वैसा ही वाणिज्यिक स्थापन नहीं है) उसके निवासियों के सामान्य उपयोग के लिए आशयित किसी बंद कमरे या हॉल में, उसके निवासियों के लिए अनन्य रूप से या मुख्यतः उपलब्ध कराई गई सुख-सुविधाओं के भाग के रूप में सार्वजनिक रूप से सुना जाना, या
(ii) किसी ऐसे क्लब या वैसे ही संगठन के क्रियाकलापों के भाग के रूप में, जो लाभ के लिए स्थापित या प्रचालित नहीं है;
(ठ) किसी शौकिया क्लब या सोसाइटी द्वारा किसी साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति का प्रस्तुतीकरण, यदि ऐसा प्रस्तुतीकरण ऐसे श्रोतागण के समक्ष दिया जाता है जो उसके लिए संदाय नहीं करते या यदि वह किसी धार्मिक संस्था के फायदे के लिए दिया जाता है;
(ड) किसी समाचारपत्र, पत्रिका या अन्य आवधिक पत्र में सामयिक, आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक विषयों पर किसी लेख का पुनरुत्पादन, जब तक कि ऐसे लेख के रचयिता ने ऐसे पुनरुत्पादन का अधिकार अभिव्यक्त रूप से अपने पास आरक्षित न रखा हो;
(घ) किसी अवाणिज्यिक लोक पुस्तकालय द्वारा परिरक्षण के लिए इलैक्ट्रानिक साधनों द्वारा किसी माध्यम में किसी कृति का भंडारण, यदि उस पुस्तकालय के पास उस कृति की कोई गैर-डिजिटल प्रति पहले से है;
(ण) किसी अवाणिज्यिक लोक पुस्तकालय के भारसाधक व्यक्ति द्वारा या उसके निदेश के अधीन, उस पुस्तकालय के उपयोग के लिए किसी पुस्तक (जिसके अंतर्गत कोई पुस्तिका, संगीत पत्रक, मानचित्र, चार्ट या रेखांकन है) की तीन से अनधिक प्रतियां बनाया जाना, यदि ऐसी पुस्तक भारत में विक्रय के लिए उपलब्ध नहीं है;
(त) किसी पुस्तकालय, संग्रहालय या अन्य संस्था में, जिस तक जनता की पहुंच है, रखी गई किसी अप्रकाशित साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति का, अनुसंधान या निजी अध्ययन के प्रयोजन के लिए या प्रकाशन की दृष्टि से, पुनरुत्पादन:
परंतु जहां किसी ऐसी कृति के रचयिता की, या संयुक्त रचयिताओं द्वारा रचित कृति की दशा में उनमें से किसी रचयिता की, वास्तविक पहचान, यथास्थिति, उस पुस्तकालय, संग्रहालय या अन्य संस्था को ज्ञात है, वहां इस खंड के उपबंध केवल तभी लागू होंगे जब ऐसा पुनरुत्पादन रचयिता की मृत्यु की तारीख से, या संयुक्त रचयिताओं द्वारा रचित कृति की दशा में उस रचयिता की, जिसकी वास्तविक पहचान ज्ञात है, अथवा यदि एक से अधिक रचयिताओं की पहचान ज्ञात है तो उस रचयिता की, जिसकी मृत्यु सबसे बाद में होती है, मृत्यु की तारीख से साठ वर्ष के पश्चात् किसी समय किया जाता है;
(थ) निम्नलिखित का पुनरुत्पादन या प्रकाशन-
(i) किसी विधान-मंडल के अधिनियम से भिन्न कोई ऐसी बात, जो किसी शासकीय राजपत्र में प्रकाशित की गई है;
(ii) किसी विधान-मंडल का कोई अधिनियम, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि ऐसा अधिनियम उस पर की किसी टीका-टिप्पणी या किसी अन्य सारवान् बात के साथ पुनरुत्पादित या प्रकाशित किया जाता है;
(iii) सरकार द्वारा नियुक्त किसी समिति, आयोग, परिषद्, बोर्ड या अन्य वैसे ही निकाय की रिपोर्ट, यदि ऐसी रिपोर्ट विधान-मंडल के समक्ष रखी जा चुकी है, जब तक कि ऐसी रिपोर्ट के पुनरुत्पादन या प्रकाशन का सरकार द्वारा प्रतिषेध न किया गया हो;
(iv) किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य न्यायिक प्राधिकारी का कोई विनिश्चय या आदेश, जब तक कि ऐसे विनिश्चय या आदेश के पुनरुत्पादन या प्रकाशन का, यथास्थिति, ऐसे न्यायालय, अधिकरण या अन्य न्यायिक प्राधिकारी द्वारा प्रतिषेध न किया गया हो;
(घ) किसी विधान-मंडल के अधिनियम का और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या आदेशों का किसी भारतीय भाषा में अनुवाद तैयार किया जाना या प्रकाशित किया जाना-
(i) यदि ऐसा अधिनियम या नियम या आदेश अथवा उस भाषा में कोई अनुवाद सरकार द्वारा पूर्व में तैयार या प्रकाशित नहीं किया गया है; या
(ii) जहां ऐसे अधिनियम या नियमों या आदेशों का उस भाषा में अनुवाद सरकार द्वारा तैयार या प्रकाशित किया गया है, वहां यदि ऐसा अनुवाद जनता को विक्रय के लिए उपलब्ध नहीं है;
परंतु ऐसे अनुवाद में किसी सुस्पष्ट स्थान पर यह कथन अंतर्विष्ट होगा कि वह अनुवाद सरकार द्वारा प्रामाणिक रूप में प्राधिकृत या अनुमोदित नहीं है;
(ध) किसी वास्तुकला संबंधी कृति की चित्रकारी, रेखाचित्र, उत्कीर्णन या फोटोचित्र बनाना या प्रकाशित करना अथवा किसी वास्तुकला संबंधी कृति का प्रदर्शन करना;
(न) धारा 2 के खंड (ग) के उपखंड (iii) के अधीन आने वाले किसी मूर्तिशिल्प या अन्य कलात्मक कृति की चित्रकारी, रेखाचित्र, उत्कीर्णन या फोटोचित्र बनाना या प्रकाशित करना, यदि ऐसी कृति किसी लोक स्थान में या ऐसे किसी परिसर में, जिस तक जनता की पहुंच है, स्थायी रूप से स्थित है;
(प) किसी चलचित्र फिल्म में-
(i) ऐसी किसी कलात्मक कृति का सम्मिलित किया जाना जो किसी लोक स्थान में या किसी अन्य ऐसे परिसर में, जिस तक जनता की पहुंच है, स्थायी रूप से स्थित है; या
(ii) किसी अन्य कला कृति का सम्मिलित किया जाना, यदि ऐसा सम्मिलित किया जाना केवल पृष्ठभूमि के रूप में है या फिल्म में दर्शाए गए मुख्य विषयों के प्रति अन्यथा आनुषंगिक है;
(फ) किसी कला कृति के रचयिता द्वारा, जहां ऐसी कृति का रचयिता उसमें के प्रतिलिप्यधिकार का स्वामी नहीं है, उस कृति के प्रयोजन के लिए उसके द्वारा बनाए गए किसी सांचे, ढांचे, रेखाचित्र, आरेखण, प्रतिरूप या अभ्यास-कृति का उपयोग:
परंतु वह उसके द्वारा उस कृति के मुख्य अभिकल्प का पुनरुत्पादन या अनुकरण न करे;
(ख) किसी द्विविमीय कला कृति से, जैसे किसी तकनीकी रेखांकन से, किसी उपयोगी युक्ति के किसी पूर्णतः प्रकार्यात्मक भाग के औद्योगिक अनुप्रयोग के प्रयोजनों के लिए त्रिविमीय वस्तु का सृजन;
(भ) किसी भवन या संरचना का उन रेखांकनों या योजनाओं के अनुसार पुनर्निर्माण जिनके अनुसार वह भवन या संरचना मूल रूप से निर्मित की गई थी:
परंतु मूल निर्माण ऐसे रेखांकनों और योजनाओं में के प्रतिलिप्यधिकार के स्वामी की सम्मति या अनुज्ञा से किया गया था;
(म) किसी चलचित्र फिल्म में अभिलिखित या पुनरुत्पादित किसी साहित्यिक, नाट्य, कलात्मक या संगीतात्मक कृति के संबंध में, उसमें के प्रतिलिप्यधिकार की अवधि के अवसान के पश्चात् ऐसी फिल्म का प्रदर्शन:
परंतु खंड (क) के उपखंड (ii), खंड (ख) के उपखंड (i) तथा खंड (घ), (छ), (ज), (ड) और (त) के उपबंध किसी कृति के संबंध में तब तक लागू नहीं होंगे जब तक उस कृति के साथ ऐसी अभिस्वीकृति न हो जो-
(i) उस कृति की उसके शीर्षक या अन्य वर्णन द्वारा पहचान कराती हो; और
(ii) रचयिता की पहचान कराती हो, सिवाय उस दशा के जहां वह कृति अनाम है या उस कृति के रचयिता ने पूर्व में यह सहमति दी है या अपेक्षा की है कि उसका नाम अभिस्वीकृत न किया जाए;
(य) किसी प्रसारण संगठन द्वारा, अपने स्वयं के प्रसारण के लिए अपनी सुविधाओं का उपयोग करते हुए, ऐसी कृति का, जिसे प्रसारित करने का उसे अधिकार है, बनाया गया क्षणिक ध्वनि अभिलेखन, तथा ऐसे ध्वनि अभिलेखन का, उसके अपवादात्मक अभिलेखीय स्वरूप के कारण, पुरातत्वीय प्रयोजनों के लिए प्रतिधारण;
(यक) किसी सद्भाविक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अथवा केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा आयोजित किसी सरकारी समारोह के दौरान किसी साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति का प्रस्तुतीकरण अथवा ऐसी कृति की या किसी ध्वनि अभिलेखन की जनता को संसूचना;
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए, धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत विवाह जुलूस और विवाह से संबद्ध अन्य सामाजिक उत्सव हैं;
(यख) (i) किसी व्यक्ति द्वारा निःशक्त व्यक्तियों की कृतियों तक पहुंच सुकर बनाने के लिए, जिसके अंतर्गत निजी या वैयक्तिक उपयोग, शैक्षिक प्रयोजन या अनुसंधान के लिए ऐसे सुगम्य प्ररूप में किसी निःशक्त व्यक्ति की भागीदारी है; या
(ii) निःशक्त व्यक्तियों के फायदे के लिए काम करने वाले किसी संगठन द्वारा, यदि सामान्य विधान ऐसे व्यक्तियों द्वारा ऐसी कृतियों का उपयोग निवारित करता है,
किसी कृति का किसी सुगम्य रूप में अनुकूलन, पुनरुत्पादन, उसकी प्रतियां उपलब्ध कराना या उसकी जनता को संसूचना करना:
परंतु यह और कि वह संगठन यह सुनिश्चित करेगा कि उन कृतियों की प्रतियां ऐसे सुगम्य रूप में केवल निःशक्त व्यक्तियों द्वारा ही उपयोग में लाई जाएं तथा उनके कारबार के मामूली अनुक्रम में प्रवेश का निवारण करने के लिए युक्तियुक्त उपाय किए जाएं:
परंतु जब कृतियों की प्रतियां निःशक्त व्यक्तियों को ऐसे सुगम्य रूप में अलाभकारी आधार पर उपलब्ध कराई जाती हैं, तब उनसे उत्पादन लागत वसूल की जाती है ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “संगठन” के अंतर्गत ऐसा निकाय है जो आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 45) की धारा 12क के अधीन सरकार द्वारा रजिस्ट्रीकृत है और निःशक्त व्यक्तियों के फायदे के लिए काम कर रहा है, अथवा जो निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1956 का 1) के अध्याय 10 के अधीन मान्यताप्राप्त है, अथवा जिसे निःशक्त व्यक्तियों की पहुंच सुकर बनाने के लिए सरकार से अनुदान प्राप्त है; प्राप्तकर्ता भी कोई संगठन या सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त कोई शैक्षिक संस्था अथवा कोई पुस्तकालय या अभिलेखागार है;
(यग) किसी साहित्यिक या कलात्मक कृति की प्रतियों का आयात, जैसे लेबल, कंपनी लोगो या संवर्धनात्मक या व्याख्यात्मक सामग्री, जो विधिपूर्वक आयात किए जा रहे अन्य माल या उत्पादों के प्रति पूर्णतः आनुषंगिक है ।
(2) उपधारा (1) के उपबंध किसी साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति के अनुवाद अथवा किसी साहित्यिक, नाट्य, संगीतात्मक या कलात्मक कृति के अनुकूलन के संबंध में किए गए किसी कार्य को उसी प्रकार लागू होंगे मानो वे उस कृति के संबंध में ही लागू होते हों ।
(क) किसी ऐसी कृति का, जो कंप्यूटर प्रोग्राम नहीं है, निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए उचित उपयोग-
(i) निजी या वैयक्तिक उपयोग, जिसके अंतर्गत अनुसंधान है;
(ii) उस कृति की या किसी अन्य कृति की समालोचना या पुनर्विलोकन;
(iii) सामयिक घटनाओं और सामयिक क्रियाकलापों की रिपोर्टिंग, जिसके अंतर्गत सार्वजनिक रूप से दिए गए किसी व्याख्यान की रिपोर्टिंग है ।
स्पष्टीकरण-इस खंड में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए किसी कृति का किसी इलैक्ट्रानिक माध्यम में भंडारण, जिसके अंतर्गत ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम का आनुषंगिक भंडारण भी है जो स्वयं उक्त प्रयोजनों के लिए अतिलंघनकारी प्रति नहीं है, प्रतिलिप्यधिकार का अतिलंघन गठित नहीं करेगा ।
(कक) किसी कंप्यूटर प्रोग्राम की प्रति के विधिपूर्ण कब्जे वाले व्यक्ति द्वारा ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम की प्रति से प्रतियां या अनुकूलन बनाया जाना,-
(i) जिससे कि उस कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग उस प्रयोजन के लिए किया जा सके जिसके लिए वह प्रदाय किया गया था; या
(ii) प्रतिस्थापक प्रति बनाना, जिससे कि उस कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग केवल उस प्रयोजन के लिए किया जा सके जिसके लिए वह प्रदाय किया गया था, हानि, नाश या क्षति के विरुद्ध एकमात्र अस्थायी संरक्षण के रूप में;
(कख) ऐसा कोई कार्य करना जो उस कंप्यूटर प्रोग्राम के विधिपूर्ण कब्जे वाले किसी व्यक्ति द्वारा स्वतंत्र रूप से सृजित कंप्यूटर प्रोग्राम की अन्य प्रोग्रामों के साथ अंतःप्रचालनीयता का प्रचालन करने के लिए आवश्यक सूचना अभिप्राप्त करने के लिए आवश्यक है, परंतु यह कि ऐसी सूचना अन्यथा सहज उपलब्ध न हो;
(कग) किसी कंप्यूटर प्रोग्राम के कार्यकरण का ऐसे प्रकार्यों को करते समय, जो उन प्रयोजनों के लिए आवश्यक हैं जिनके लिए वह कंप्यूटर प्रोग्राम प्रदाय किया गया था, अवलोकन, अध्ययन या परीक्षण करना, ताकि उन विचारों और सिद्धांतों का अवधारण किया जा सके जो उस प्रोग्राम के किन्हीं तत्वों को लागू हो सकते हैं;
(कघ) विधिपूर्वक अभिप्राप्त प्रति से किसी कंप्यूटर प्रोग्राम की प्रतियां या अनुकूलन अवाणिज्यिक वैयक्तिक उपयोग के लिए बनाना;
(ख) किसी कृति या प्रस्तुतीकरण का, इलैक्ट्रानिक पारेषण की या जनता को संसूचना की विशुद्धतः तकनीकी प्रक्रिया के रूप में, अस्थायी या आनुषंगिक भंडारण;
(ग) ऐसे स्थानों में, जहां अधिकारधारी द्वारा इलैक्ट्रानिक कड़ियों, अभिगम या समेकन का अभिव्यक्त रूप से प्रतिषेध नहीं किया गया है, ऐसी कड़ियां, अभिगम या समेकन उपलब्ध कराने के प्रयोजन के लिए किसी कृति या प्रस्तुतीकरण का अस्थायी या आनुषंगिक भंडारण, जब तक कि उसके लिए उत्तरदायी व्यक्ति को यह ज्ञात न हो या यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार न हों कि ऐसा भंडारण किसी अतिलंघनकारी प्रति का है:
परंतु यदि प्रति के भंडारण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को उस कृति के प्रतिलिप्यधिकार के स्वामी से यह अभिकथन करते हुए लिखित परिवाद प्राप्त होता है कि ऐसा अस्थायी या आनुषंगिक भंडारण अतिलंघनकारी है, तो भंडारण के लिए उत्तरदायी ऐसा व्यक्ति इक्कीस दिन की अवधि तक या जब तक उसे किसी सक्षम न्यायालय से ऐसा आदेश प्राप्त नहीं हो जाता जो उसे ऐसा अभिगम सुकर बनाने से अवरुद्ध करता है, ऐसा अभिगम सुकर बनाने से विरत रहेगा, और यदि इक्कीस दिन की ऐसी अवधि के अवसान से पूर्व ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं होता है तो वह ऐसा अभिगम सुकर बनाना जारी रख सकेगा;
(घ) किसी न्यायिक कार्यवाही के प्रयोजन के लिए या किसी न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्ट के प्रयोजन के लिए किसी कृति का पुनरुत्पादन;
(ङ) किसी विधान-मंडल के सचिवालय द्वारा अथवा जहां विधान-मंडल के दो सदन हैं वहां विधान-मंडल के किसी एक सदन के सचिवालय द्वारा, उस विधान-मंडल के सदस्यों के अनन्य उपयोग के लिए तैयार की गई किसी कृति का पुनरुत्पादन या प्रकाशन;
(च) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अनुसार तैयार की गई या प्रदाय की गई किसी प्रमाणित प्रति में किसी कृति का पुनरुत्पादन;
(छ) किसी प्रकाशित साहित्यिक या नाट्य कृति के समुचित उद्धरणों का जनता के समक्ष पठन या सस्वर पाठ;
(ज) साहित्यिक या नाट्य कृतियों से, जो स्वयं ऐसे उपयोग के लिए प्रकाशित नहीं की गई हैं और जिनमें प्रतिलिप्यधिकार अस्तित्वशील है, लघु उद्धरणों का ऐसे संकलन में प्रकाशन जो मुख्यतः प्रतिलिप्यधिकाररहित सामग्री से मिलकर बना है और जो सद्भावपूर्वक शैक्षिक उपयोग के लिए आशयित है तथा जिसे शीर्षक में और प्रकाशक द्वारा या उसकी ओर से जारी किए गए किसी विज्ञापन में इस प्रकार वर्णित किया गया है:
परंतु उसी रचयिता की कृतियों से ऐसे दो से अधिक उद्धरण उसी प्रकाशक द्वारा पांच वर्ष की किसी अवधि के दौरान प्रकाशित नहीं किए जाएंगे ।
स्पष्टीकरण-संयुक्त रचयिताधिकार की कृति की दशा में, इस खंड में कृतियों से उद्धरणों के प्रति निर्देशों के अंतर्गत उन उद्धरणों के रचयिताओं में से एक या अधिक की कृतियों से अथवा उन रचयिताओं में से एक या अधिक द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के सहयोग से रचित कृतियों से उद्धरणों के प्रति निर्देश भी होंगे;
(झ) किसी कृति का पुनरुत्पादन-
(i) किसी अध्यापक या विद्यार्थी द्वारा प्रशिक्षण के अनुक्रम में; या
(ii) ऐसा पुनरुत्पादन जो किसी परीक्षा में उत्तर दिए जाने वाले प्रश्नों का भाग है; या
(iii) ऐसे प्रश्नों के उत्तरों में पुनरुत्पादन;
(ञ) किसी शैक्षिक संस्था के क्रियाकलापों के अनुक्रम में, उस संस्था के कर्मचारिवृंद और विद्यार्थियों द्वारा किसी साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति का अथवा किसी चलचित्र फिल्म या किसी ध्वनि अभिलेखन का प्रस्तुतीकरण, यदि श्रोतागण ऐसे कर्मचारिवृंद और विद्यार्थियों, विद्यार्थियों के माता-पिता और संरक्षकों तथा उस संस्था के कार्यकलापों से संबद्ध व्यक्तियों तक ही सीमित हैं, अथवा ऐसे श्रोतागण को किसी चलचित्र फिल्म या ध्वनि अभिलेखन की संसूचना;
(न) ध्वनि अभिलेखन का, उसके निम्नलिखित उपयोग द्वारा,-
(i) ऐसे आवासीय परिसर में (जो कोई होटल या वैसा ही वाणिज्यिक स्थापन नहीं है) उसके निवासियों के सामान्य उपयोग के लिए आशयित किसी बंद कमरे या हॉल में, उसके निवासियों के लिए अनन्य रूप से या मुख्यतः उपलब्ध कराई गई सुख-सुविधाओं के भाग के रूप में सार्वजनिक रूप से सुना जाना, या
(ii) किसी ऐसे क्लब या वैसे ही संगठन के क्रियाकलापों के भाग के रूप में, जो लाभ के लिए स्थापित या प्रचालित नहीं है;
(ठ) किसी शौकिया क्लब या सोसाइटी द्वारा किसी साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति का प्रस्तुतीकरण, यदि ऐसा प्रस्तुतीकरण ऐसे श्रोतागण के समक्ष दिया जाता है जो उसके लिए संदाय नहीं करते या यदि वह किसी धार्मिक संस्था के फायदे के लिए दिया जाता है;
(ड) किसी समाचारपत्र, पत्रिका या अन्य आवधिक पत्र में सामयिक, आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक विषयों पर किसी लेख का पुनरुत्पादन, जब तक कि ऐसे लेख के रचयिता ने ऐसे पुनरुत्पादन का अधिकार अभिव्यक्त रूप से अपने पास आरक्षित न रखा हो;
(घ) किसी अवाणिज्यिक लोक पुस्तकालय द्वारा परिरक्षण के लिए इलैक्ट्रानिक साधनों द्वारा किसी माध्यम में किसी कृति का भंडारण, यदि उस पुस्तकालय के पास उस कृति की कोई गैर-डिजिटल प्रति पहले से है;
(ण) किसी अवाणिज्यिक लोक पुस्तकालय के भारसाधक व्यक्ति द्वारा या उसके निदेश के अधीन, उस पुस्तकालय के उपयोग के लिए किसी पुस्तक (जिसके अंतर्गत कोई पुस्तिका, संगीत पत्रक, मानचित्र, चार्ट या रेखांकन है) की तीन से अनधिक प्रतियां बनाया जाना, यदि ऐसी पुस्तक भारत में विक्रय के लिए उपलब्ध नहीं है;
(त) किसी पुस्तकालय, संग्रहालय या अन्य संस्था में, जिस तक जनता की पहुंच है, रखी गई किसी अप्रकाशित साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति का, अनुसंधान या निजी अध्ययन के प्रयोजन के लिए या प्रकाशन की दृष्टि से, पुनरुत्पादन:
परंतु जहां किसी ऐसी कृति के रचयिता की, या संयुक्त रचयिताओं द्वारा रचित कृति की दशा में उनमें से किसी रचयिता की, वास्तविक पहचान, यथास्थिति, उस पुस्तकालय, संग्रहालय या अन्य संस्था को ज्ञात है, वहां इस खंड के उपबंध केवल तभी लागू होंगे जब ऐसा पुनरुत्पादन रचयिता की मृत्यु की तारीख से, या संयुक्त रचयिताओं द्वारा रचित कृति की दशा में उस रचयिता की, जिसकी वास्तविक पहचान ज्ञात है, अथवा यदि एक से अधिक रचयिताओं की पहचान ज्ञात है तो उस रचयिता की, जिसकी मृत्यु सबसे बाद में होती है, मृत्यु की तारीख से साठ वर्ष के पश्चात् किसी समय किया जाता है;
(थ) निम्नलिखित का पुनरुत्पादन या प्रकाशन-
(i) किसी विधान-मंडल के अधिनियम से भिन्न कोई ऐसी बात, जो किसी शासकीय राजपत्र में प्रकाशित की गई है;
(ii) किसी विधान-मंडल का कोई अधिनियम, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि ऐसा अधिनियम उस पर की किसी टीका-टिप्पणी या किसी अन्य सारवान् बात के साथ पुनरुत्पादित या प्रकाशित किया जाता है;
(iii) सरकार द्वारा नियुक्त किसी समिति, आयोग, परिषद्, बोर्ड या अन्य वैसे ही निकाय की रिपोर्ट, यदि ऐसी रिपोर्ट विधान-मंडल के समक्ष रखी जा चुकी है, जब तक कि ऐसी रिपोर्ट के पुनरुत्पादन या प्रकाशन का सरकार द्वारा प्रतिषेध न किया गया हो;
(iv) किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य न्यायिक प्राधिकारी का कोई विनिश्चय या आदेश, जब तक कि ऐसे विनिश्चय या आदेश के पुनरुत्पादन या प्रकाशन का, यथास्थिति, ऐसे न्यायालय, अधिकरण या अन्य न्यायिक प्राधिकारी द्वारा प्रतिषेध न किया गया हो;
(घ) किसी विधान-मंडल के अधिनियम का और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या आदेशों का किसी भारतीय भाषा में अनुवाद तैयार किया जाना या प्रकाशित किया जाना-
(i) यदि ऐसा अधिनियम या नियम या आदेश अथवा उस भाषा में कोई अनुवाद सरकार द्वारा पूर्व में तैयार या प्रकाशित नहीं किया गया है; या
(ii) जहां ऐसे अधिनियम या नियमों या आदेशों का उस भाषा में अनुवाद सरकार द्वारा तैयार या प्रकाशित किया गया है, वहां यदि ऐसा अनुवाद जनता को विक्रय के लिए उपलब्ध नहीं है;
परंतु ऐसे अनुवाद में किसी सुस्पष्ट स्थान पर यह कथन अंतर्विष्ट होगा कि वह अनुवाद सरकार द्वारा प्रामाणिक रूप में प्राधिकृत या अनुमोदित नहीं है;
(ध) किसी वास्तुकला संबंधी कृति की चित्रकारी, रेखाचित्र, उत्कीर्णन या फोटोचित्र बनाना या प्रकाशित करना अथवा किसी वास्तुकला संबंधी कृति का प्रदर्शन करना;
(न) धारा 2 के खंड (ग) के उपखंड (iii) के अधीन आने वाले किसी मूर्तिशिल्प या अन्य कलात्मक कृति की चित्रकारी, रेखाचित्र, उत्कीर्णन या फोटोचित्र बनाना या प्रकाशित करना, यदि ऐसी कृति किसी लोक स्थान में या ऐसे किसी परिसर में, जिस तक जनता की पहुंच है, स्थायी रूप से स्थित है;
(प) किसी चलचित्र फिल्म में-
(i) ऐसी किसी कलात्मक कृति का सम्मिलित किया जाना जो किसी लोक स्थान में या किसी अन्य ऐसे परिसर में, जिस तक जनता की पहुंच है, स्थायी रूप से स्थित है; या
(ii) किसी अन्य कला कृति का सम्मिलित किया जाना, यदि ऐसा सम्मिलित किया जाना केवल पृष्ठभूमि के रूप में है या फिल्म में दर्शाए गए मुख्य विषयों के प्रति अन्यथा आनुषंगिक है;
(फ) किसी कला कृति के रचयिता द्वारा, जहां ऐसी कृति का रचयिता उसमें के प्रतिलिप्यधिकार का स्वामी नहीं है, उस कृति के प्रयोजन के लिए उसके द्वारा बनाए गए किसी सांचे, ढांचे, रेखाचित्र, आरेखण, प्रतिरूप या अभ्यास-कृति का उपयोग:
परंतु वह उसके द्वारा उस कृति के मुख्य अभिकल्प का पुनरुत्पादन या अनुकरण न करे;
(ख) किसी द्विविमीय कला कृति से, जैसे किसी तकनीकी रेखांकन से, किसी उपयोगी युक्ति के किसी पूर्णतः प्रकार्यात्मक भाग के औद्योगिक अनुप्रयोग के प्रयोजनों के लिए त्रिविमीय वस्तु का सृजन;
(भ) किसी भवन या संरचना का उन रेखांकनों या योजनाओं के अनुसार पुनर्निर्माण जिनके अनुसार वह भवन या संरचना मूल रूप से निर्मित की गई थी:
परंतु मूल निर्माण ऐसे रेखांकनों और योजनाओं में के प्रतिलिप्यधिकार के स्वामी की सम्मति या अनुज्ञा से किया गया था;
(म) किसी चलचित्र फिल्म में अभिलिखित या पुनरुत्पादित किसी साहित्यिक, नाट्य, कलात्मक या संगीतात्मक कृति के संबंध में, उसमें के प्रतिलिप्यधिकार की अवधि के अवसान के पश्चात् ऐसी फिल्म का प्रदर्शन:
परंतु खंड (क) के उपखंड (ii), खंड (ख) के उपखंड (i) तथा खंड (घ), (छ), (ज), (ड) और (त) के उपबंध किसी कृति के संबंध में तब तक लागू नहीं होंगे जब तक उस कृति के साथ ऐसी अभिस्वीकृति न हो जो-
(i) उस कृति की उसके शीर्षक या अन्य वर्णन द्वारा पहचान कराती हो; और
(ii) रचयिता की पहचान कराती हो, सिवाय उस दशा के जहां वह कृति अनाम है या उस कृति के रचयिता ने पूर्व में यह सहमति दी है या अपेक्षा की है कि उसका नाम अभिस्वीकृत न किया जाए;
(य) किसी प्रसारण संगठन द्वारा, अपने स्वयं के प्रसारण के लिए अपनी सुविधाओं का उपयोग करते हुए, ऐसी कृति का, जिसे प्रसारित करने का उसे अधिकार है, बनाया गया क्षणिक ध्वनि अभिलेखन, तथा ऐसे ध्वनि अभिलेखन का, उसके अपवादात्मक अभिलेखीय स्वरूप के कारण, पुरातत्वीय प्रयोजनों के लिए प्रतिधारण;
(यक) किसी सद्भाविक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अथवा केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा आयोजित किसी सरकारी समारोह के दौरान किसी साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति का प्रस्तुतीकरण अथवा ऐसी कृति की या किसी ध्वनि अभिलेखन की जनता को संसूचना;
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए, धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत विवाह जुलूस और विवाह से संबद्ध अन्य सामाजिक उत्सव हैं;
(यख) (i) किसी व्यक्ति द्वारा निःशक्त व्यक्तियों की कृतियों तक पहुंच सुकर बनाने के लिए, जिसके अंतर्गत निजी या वैयक्तिक उपयोग, शैक्षिक प्रयोजन या अनुसंधान के लिए ऐसे सुगम्य प्ररूप में किसी निःशक्त व्यक्ति की भागीदारी है; या
(ii) निःशक्त व्यक्तियों के फायदे के लिए काम करने वाले किसी संगठन द्वारा, यदि सामान्य विधान ऐसे व्यक्तियों द्वारा ऐसी कृतियों का उपयोग निवारित करता है,
किसी कृति का किसी सुगम्य रूप में अनुकूलन, पुनरुत्पादन, उसकी प्रतियां उपलब्ध कराना या उसकी जनता को संसूचना करना:
परंतु यह और कि वह संगठन यह सुनिश्चित करेगा कि उन कृतियों की प्रतियां ऐसे सुगम्य रूप में केवल निःशक्त व्यक्तियों द्वारा ही उपयोग में लाई जाएं तथा उनके कारबार के मामूली अनुक्रम में प्रवेश का निवारण करने के लिए युक्तियुक्त उपाय किए जाएं:
परंतु जब कृतियों की प्रतियां निःशक्त व्यक्तियों को ऐसे सुगम्य रूप में अलाभकारी आधार पर उपलब्ध कराई जाती हैं, तब उनसे उत्पादन लागत वसूल की जाती है ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “संगठन” के अंतर्गत ऐसा निकाय है जो आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 45) की धारा 12क के अधीन सरकार द्वारा रजिस्ट्रीकृत है और निःशक्त व्यक्तियों के फायदे के लिए काम कर रहा है, अथवा जो निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1956 का 1) के अध्याय 10 के अधीन मान्यताप्राप्त है, अथवा जिसे निःशक्त व्यक्तियों की पहुंच सुकर बनाने के लिए सरकार से अनुदान प्राप्त है; प्राप्तकर्ता भी कोई संगठन या सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त कोई शैक्षिक संस्था अथवा कोई पुस्तकालय या अभिलेखागार है;
(यग) किसी साहित्यिक या कलात्मक कृति की प्रतियों का आयात, जैसे लेबल, कंपनी लोगो या संवर्धनात्मक या व्याख्यात्मक सामग्री, जो विधिपूर्वक आयात किए जा रहे अन्य माल या उत्पादों के प्रति पूर्णतः आनुषंगिक है ।
(2) उपधारा (1) के उपबंध किसी साहित्यिक, नाट्य या संगीतात्मक कृति के अनुवाद अथवा किसी साहित्यिक, नाट्य, संगीतात्मक या कलात्मक कृति के अनुकूलन के संबंध में किए गए किसी कार्य को उसी प्रकार लागू होंगे मानो वे उस कृति के संबंध में ही लागू होते हों ।
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